प्रेस रिव्यू: चंद्रबाबू नायडू करोड़पति, माणिक सरकार लखपति

  • 13 फरवरी 2018
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Image caption त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार के पास सिर्फ़ 26 लाख रुपए की संपत्ति है

चंद्रबाबू नायडू देश के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं जबकि त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार के पास सबसे कम संपत्ति है.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के पास 177 करोड़ रुपए की संपत्ति है जबकि दूसरे नंबर पर अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू हैं जिनके पास 129 करोड़ रुपए की संपत्ति है.

इसके बाद नंबर आता है पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का, जिनके पास 48 करोड़ रुपए की संपत्ति है.

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने सिर्फ़ 26 लाख रुपए की संपत्ति घोषित की है जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास 30 लाख और जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती के पास 55 लाख रुपए की संपत्ति है.

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ओमान से समझौता

भारत ने हिंद महासागर में अपना प्रभाव बढ़ाने के उद्देश्य से ओमान के बंदरगाह के सैन्य इस्तेमाल के लिए ओमान के साथ समझौता किया है.

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारत ने ये क़दम इस क्षेत्र में चीन के प्रभाव को जवाब देने के लिए उठाया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमान के सुल्तान क़बूस बिन सैयद अल सैयद से मुलाक़ात की थी.

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एनआरआई पतियों के लिए क़ानून

हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत सरकार क़ानून में बदलाव करने पर विचार कर रही है जिसके तहत पत्नियों को अकेला छोड़ देने वाले एनआरआई पतियों की संपत्तियां ज़ब्त की जा सकेंगी.

यही नहीं, महिला और बाल कल्याण मंत्रालय बाल यौन उत्पीड़न के मामलों के रिपोर्ट करने के समय को बढ़ाने के लिए गृह मंत्रालय को पत्र लिख रहा है.

मौजूदा क़ानून के तहत अपराध होने के तीन साल के भीतर मामला दर्ज कराना ज़रूरी है. नए प्रस्ताव के तहत ये सीमा समाप्त कर दी जाएगी.

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जज लोया की मौत पर महाराष्ट्र सरकार का बयान

द हिंदू में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक़, सीबीआई के विशेष जज बीएच लोया की संदिग्ध मौत पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से कहा गया है कि जज लोया की मौत से संबंधित जनहित याचिकाएं सुनी-सुनाईं बातों पर आधारित हैं.

महाराष्ट्र सरकार की ओर से अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि ये जनहित याचिकाएं न्यायपालिका को बदनाम करने के उद्देश्य से दायर की गई हैं.

मुकुल रोहातगी ने कहा कि याचिकाएं सुनी सुनाई बातों और एक अपुष्ट लेख पर आधारित हैं.

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