'मृत जवान के सम्मान के लिए सरकार से कोई नहीं आया '

  • 14 फरवरी 2018
मुजाहिद ख़ान का पार्थिव शरीर इमेज कॉपीरइट Ashutosh Kumar

सीआरपीएफ़ जवान मुजाहिद ख़ान का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह क़रीब आठ बजे बिहार के भोजपुर ज़िले के पीरो पहुंचा. वो भारत प्रशासित कश्मीर के श्रीनगर में सोमवार को सीआरपीएफ़ कैंप पर हुए चरमपंथी हमले में मारे गए थे.

मुजाहिद ख़ान के पार्थिव शरीर को पहुंचने के पहले ही हजारों लोग उन्हें अंतिम बार देखने और उनके जनाज़े में शामिल होने के लिए पीरो पहुंच चुके थे.

लेकिन मुजाहिद के चचेरे भाई अजमेर ख़ान को इस बात का दुख है कि उनके भाई को सम्मान देने बिहार सरकार की तरफ़ से कोई नहीं आया.

उन्होंने बीबीसी को फ़ोन पर बताया, "सरकार की तरफ़ से कोई नहीं आया, इसका हमें बहुत मलाल है. दुख है."

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इतना ही नहीं मुजाहिद के परिजनों ने अनुग्रह अनुदान देने में भी भेदभाव किए जाने की भी बात कही. उनके परिजनों ने बिहार सरकार की ओर से दिए गए पांच लाख की सहायता राशि ठुकरा दी है.

इस संबंध में अजमेर ख़ान सवाल करते हैं, "इस मामले में भेदभाव हो रहा है. अभी खगड़िया ज़िले के भी एक सैनिक मारे गए. लेकिन उनके और मुजाहिद के परिवार के जो राशि दी जा रही है उसमें भेदभाव क्यों किया जा रहा है?"

इस मसले पर बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और सूबे के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर बिहार सरकार की तीखी आलोचना की है.

उन्होंने लिखा, "बिहार में दो जांबाज़ सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए. लेकिन नीतीश सरकार का एक भी मंत्री वीर जवानों को श्रद्धांजलि देने और अंतिम संस्कार में सम्मिलित होने नहीं पहुंचा. नीतीश जी संघ के वकील मत बनिए. ये राजनीतिक आरोप नहीं शहीदों के सम्मान की बात है."

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मुजाहिद के परिजनों की नाराज़गी दूर करने के लिए बिहार सरकार क्या करेगी?

इस सवाल पर बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा नेता मंगल पांडेय ने कहा, "सैनिकों के कारण ही देश की सीमाएं सुरक्षित हैं. इनकी शहादत का कोई मुकाबला नहीं हो सकता. केंद्र और राज्य सरकार शहीद के परिवार की चिंता करेगी. उनके परिजनों से मिलने निश्चित रूप से एनडीए और भारतीय जनता पार्टी के लोग जाएंगे."

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Image caption मुजाहिद ख़ान

सोमवार तड़के चरमपंथियों ने श्रीनगर के करन नगर इलाके में स्थित 23 बटालियन कैंप में दाख़िल होने की कोशिश की थी. इस दौरान हुए मुठभेड़ में 49 बटालियन के मुजाहिद गंभीर रूप से घायल हुए. बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई.

उनके परिजनों ने बिहार सरकार से की मांग है कि पीरो में मुजाहिद की प्रतिमा लगाई जाए और वहां बन रहे स्टेडियम का नामकरण उनके नाम पर किया जाए.

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