गुजरात : ख़ुद को आग लगाने वाले दलित की मौत

  • 17 फरवरी 2018
Image caption अस्पताल के बाहर इंतज़ार करते दलित कार्यकर्ता

गुजरात के पाटन ज़िले के कलेक्टर कार्यालय परिसर में ख़ुद को आग लगाने वाले एक दलित कार्यकर्ता की शुक्रवार रात मौत हो गई.

भानुप्रसाद वणकर ने बीते गुरुवार ख़ुद को आग लगा ली थी और उसके बाद से गांधीनगर के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा था.

दलित कार्यकर्ता सुबोध परमार ने भानु वणकर की मौत की पुष्टि करते हुए बीबीसी गुजराती को बताया, "अस्पताल में दाखिल होने के बाद से ही भानुभाई लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे. उनका शरीर 96 फ़ीसद झुलस गया था."

भानु दलितों को दादुखा गांव में खेती के लिए ज़मीन दिए जाने की मांग कर रहे थे. उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर दलितों को ज़मीन नहीं मिली तो वो आत्मदाह कर लेंगे.

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Image caption भानुप्रसाद वणकर की सास और पत्नी

ज़मीन की मांग

दलित कार्यकर्ता और गुजरात के वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवाणी ने एक प्रार्थनापत्र के जरिए गुजरात राज्य के विभिन्न हिस्सों में दलितों को एक लाख 63 हज़ार 808 एकड़ जमीन देने की मांग उठाई है. दलितों के कई संगठन सरकार से ज़मीन हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

दलित ऑफिसर फोरम वर्कर के सब्बो परमार कहते हैं, "सरकार ने कागज़ों पर तो ज़मीन के अधिकार दे दिए हैं लेकिन हकीकत में दलितों का उन जगहों पर कब्ज़ा नहीं है. नतीज़तन दलितों को संघर्ष करना पड़ रहा है."

61 साल के भानुप्रसाद वणकर की पत्नी इंदुबेन शंखेश्वर के एक स्कूल में प्रिंसपल हैं. उनके तीन बच्चों में से एक ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे हैं.

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