क्या मोदी के कारण डूब जाएगा अरबों का हीरा कारोबार?

  • 21 फरवरी 2018
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हीरे के व्यापारी और हीरा व्यापार पर नज़र रखने वालों के अनुसार पंजाब नेशनल बैंक में हुए 11,500 करोड़ रुपये के घोटाले के कारण सूरत के करोड़ों रुपये के हीरा व्यापार पर बहुत बड़ा असर हो सकता है.

पूरे देश में फ़िलहाल पीएनबी घोटाले की चर्चा हो रही है और राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे पुर एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं.

इस बीच बीते गुरुवार को हीरा व्यापारी नीरव मोदी के मुंबई, दिल्ली और सूरत के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय ने छापे मारे. इन छापों के तहत हुए जांच अभियान में उन्हें नीरव मोदी के हीरे के कारखानों से कुछ दस्तावेज़ मिले. साथ ही उनके स्टोर यानी भंडार की भी जांच की गई.

दूसरी तरफ़ देश में नीरव मोदी की लगभग 5,100 करोड़ रुपये की संपत्ति के ज़ब्त किए जाने की भी ख़बरें हैं.

इन सबके बीच बीबीसी से ये जानने की कोशिश की कि सूरत के हीरा व्यापार पर इस घोटाले का क्या असर होगा?

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सूरत के हीरा व्यापारी कीर्ति शाह ने कहा, "इस घोटाले से भारत में हीरा व्यापार की साख को धक्का पहुंचा है. इस कारण अब अगर अन्य कंपनियां बैंक के पास इस प्रकार के लोन लेने जाएंगी तो उनके लिए मुश्किलें काफ़ी बढ़ जाएंगी."

"पहले भी इस प्रकार के भ्रष्टाचार की घटनाओं के कारण हमें लोन लेने में मुश्किलें आ रही थीं. बड़ी कंपनियां लोन नहीं चुका पाती हैं अन्य कंपनियों के लिए बहुत कठिन हो जाता है. "

कीर्ति शाह कहते हैं, "फिलहाल ऐसी परिस्थिति है कि सबूत में बैंक इस प्रकार का क्रेडिट (यानी लेटर ऑफ़ क्रेडिट के ज़रिए) देने के लिए तैयार नहीं हैं."

"नीरव मोदी की कंपनी को माल सप्लाई करने वाली किसी कंपनी का पैसा फ़ंसा हो ऐसा अभी तक पता नहीं चला है. इस वजह से छोटे व्यापारियों पर फ़िलहाल इसका असर हो ऐसा नहीं लग रहा. पर जब भी किसी हीरा कंपनी का करोड़ों रुपयों का ऐसा घोटाला सामने आता है तो बाज़ार पर उसका सीधा असर ज़रूर होता है."

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हीरा व्यापार पर नज़र रखने वाले विश्लेषक अनिरुद्ध लिडबिद कहते हैं, "हीरे के व्यापार का सबसे बड़ा आधार बैंक से मिलने वाला कर्ज़ा है. बिना कर्ज़े के वो काम नहीं कर सकता और पहले से ही इसमें समस्याएं हैं."

"हीरा मैन्युफ़ैक्चरिंग और रफ़ डायमंड्स ख़रीदने के लिए कर्ज़ बेहद ज़रूरी है. पंजाब नेशनल में जो हुआ वो लेटर ऑफ़ क्रेडिट नहीं बल्कि लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग है. इसका मतलब ये है कि इस मामले में गारंटर के तौर पर पंजाब नेशनल बैंक का नाम है."

"दूसरी तरफ बैंकों की जो विदेशी शाखाएं हैं उन्होंने लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग को स्वीकार हुए नीरव मोदी की तरफ़ से निर्यात करने वाली विदेशी कंपनी को पैसे दिए."

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अनिरुद्ध लिडबिद समझाते हैं कि "लेटर ऑफ़ क्रेडिट के तहत इसको लोन कहा जाता है जिसमें बाद में गांरटी देने वाला बैंक जो क्रेडिट लेता है (यहां पर नीरव मोदी) उससे पैसे वसूल करती है. पर पीएनबी का मामला अलग है. यहां अगर नीरव मोदी ने पैसे नहीं दिए तो बैंक को विदेशी बैंकों को पैसे चुकाने पड़ेंगे."

यानी सीधे तौर पर कहा जा सकता है कि बैंक के लिए ये दोहरी मार की तरह है- नुकसान दोगुना है. इस कारण से बैंक नीरव मोदी के पास से पैसे वसूल करने की कोशिश कर रहा है.

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कितना बड़ा है हीरा व्यापार?

सूरत डायमंड एसोसिएशन के अनुसार दुनिया के अस्सी फ़ीसदी हीरे सूरत में काटे और तराशे जाते हैं.

जेम्स एंड ज्वेलरी समेत सूरत में हीरों का व्यापार कुल 2.78 लाख करोड़ रुपये का है. इसमें एक लाख करोड़ रुपये के हीरे निर्यात किए जाते हैं जबकि 1.58 लाख करोड़ रुपये के हीरे आयात किए जाते हैं.

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नीरव मोदी का व्यवसाय कितना बड़ा है?

सूरत में नीरव मोदी के व्यापार के बारे में वरिष्ठ पत्रकार आरिफ़ नालबंद ने कहा, "सूरत के स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (एसईज़ेड) में उनके दो कारखाने हैं जिसमें ज्वेलरी की मैन्युफैक्चरिंग होती है."

"अन्य एक जगह पर उनका हीरा मैन्युफैक्चरिंग का कारखाना है. इस तमाम जगहों पर प्रवर्तन निदेशालय ने खोज अभियान चलाया है."

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आरिफ़ नालबंद कहते हैं, "आरिफ़ नालबंद ने कहा कि लेटर ऑफ़ क्रेडिट के लिए हीरा कंपनी को डीटीसी (डायमंड ड्रेट कंपनीज़) का साइट होल्डर होना चाहिए यानी उनके पास हीरे की खदानों से संबंधित उचित कागज़ात होने चाहिए."

"सूरत में ऐसी चालीस कंपनियां हैं और इन सभी के सामने अब अपने भविष्य को ले कर एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है."

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