ट्रूडो से मिलने पर न-न करते कैप्टन ने किया इकरार

  • 20 फरवरी 2018
जस्टिन ट्रूडो, कैप्टन अमरिंदर सिंह इमेज कॉपीरइट ROBYN BECK/AFP/Getty Images/Twitter/capt_amarinder

सात दिनों के भारत दौरे पर आए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से मिलने के लिए आख़िरकार पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रजामंदी दे दी.

सोमवार को कैप्टन के ट्वीट से पहले तक पंजाब के मुख्यमंत्री और कनाडा के प्रधानमंत्री की मुलाकात पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे.

यहां तक कि कनाडा की मीडिया में भी इस तरह की ख़बरें चल रही थीं कि जस्टिन ट्रूडो कैप्टन अमरिंदर सिंह से भारत दौरे के समय नहीं मिल रहे हैं.

लेकिन कैप्टन ने सोमवार को ट्वीट किया, "बुधवार को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से अमृतसर में मुलाकात को लेकर आशान्वित हूं. मुझे उम्मीद है कि इस मुलाकात से भारत-कनाडा के व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ दोनों देशों के लोगों के आपसी रिश्तों को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी."

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पहली बार भारत में ट्रूडो

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो पहली बार भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए हुए हैं.

लेकिन उनकी यात्रा न तो मीडिया में सुर्खियां बन रही हैं और न ही उनके दौरे को लेकर सरकार की तरफ़ से कोई बहुत ज़्यादा गर्मजोशी दिख रही है.

ट्रूडो परिवार के साथ बुधवार को स्वर्ण मंदिर जाने वाले हैं और इसके बाद अमृतसर में ही कैप्टन से उनकी मुलाकात तय हुई है.

पिछले साल ही कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब दौरे पर आए कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सज्जन से मिलने से इनकार कर दिया था.

कैप्टन ने हरजीत सज्जन पर खलिस्तान समर्थकों के लिए सहानुभूति रखने का आरोप लगाया था.

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जब जस्टिन ट्रूडो से मिले जस्टिन ट्रूडो

ट्रूडो की कैबिनेट में चार सिख

साल 2016 में जब अमरिंदर सिंह पंजाब कांग्रेस कमिटी के चीफ़ हुआ करते थे तो उन्हें कनाडा में अप्रवासी भारतीयों से मिलने से रोका गया था.

इस पर कैप्टन ने विरोध जताते हुए कनाडा के प्रधानमंत्री को कड़े शब्दों में चिट्ठी भी लिखी थी.

कनाडा की घरेलू राजनीति में वहां के भारतीय समुदाय की मजबूत भागीदारी है और इसमें ज्यादातर लोग सिख हैं.

इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जस्टिन ट्रूडो की कैबिनेट में चार सिख मंत्री हैं.

लेकिन ट्रूडो जब राजधानी दिल्ली पहुँचे तो उनकी आगवानी के लिए वहां भारत सरकार के एक जूनियर मंत्री मौजूद थे.

हालांकि दूसरे देशों के बड़े नेताओं के मामले में सरकार अतीत में गर्मजोशी दिखाती रही है.

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