किस चाह में 83 की उम्र में दूल्हा बन गए सुखराम

  • 20 फरवरी 2018
सुखराम इमेज कॉपीरइट BBC/Narayan Bareth

एक बेटे की चाहत में सुखराम बैरवा 83 साल की उम्र में दूल्हा बन गए. सुखराम दो दिन पहले राजस्थान के करौली ज़िले के सेमरदा गांव में खुद से 53 वर्ष छोटी रमेशी के साथ विवाह बंधन में बंधे.

सुखराम की शादी में मंगल गीत गाए गए और हिन्दू विवाह विधि के सारे रस्मो रिवाज़ पूरे किए गए. इस मौके पर सुखराम की पहली पत्नी मौजूद थीं.

सुखराम ने सेहरा बाँधा और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए लोगों से आशीर्वाद माँगा.

सेमरदा गांव सपोटरा थाना क्षेत्र में आता है. सपोटरा के एक पुलिस अधिकारी ने कहा उनके पास इस मामले में कोई शिकायत नहीं आई है.

शादी के बाद दूल्हे सुखराम को लगा कहीं इस विवाह पर पुलिस कार्रवाई न हो जाए इसलिए वो और उनका परिवार थोड़ा सहमा हुआ है.

इलाके के लोगों ने बताया दुल्हन रमेशी के सात बहनें हैं. रमेशी इनमें सबसे छोटी हैं. सुखराम की दो बेटियों को शादी हो चुकी है. दोनों बेटियां आस-पास रहती हैं.

सुखराम के इकलौते बेटे कान्हू की कुछ समय पहले मौत हो गई. सुखराम का छोटा दामाद पप्पू भी वहीं पास ही रहता है. पप्पू के तीन बेटे और एक बेटी है. पप्पू का दावा है कि रमेशी की उम्र 30 साल है. हालांकि वो देखने में अपनी उम्र से छोटी लगती हैं.

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पहले चली थी गोद लेने की बात

पहले बात चली कि बेटियों में किसी एक की संतान को गोद ले लिया जाए, लेकिन ये बात बहुत रास नहीं आई.

पप्पू ने बीबीसी से कहा ''सब लोगों की यही राय बनी. फिर हम क्या कहते.''

पप्पू ने कहा, गांव देहात में कई बातें होने लगती है कि दामाद की जायदाद पर नजर है. सबकी राय के बाद ही ये काम हुआ है.

सुखराम की माली हालत ठीक है लेकिन उन्हें एक बेटे की कमी महसूस होती है. उन्हें लगा कि उनकी विरासत संभलाने के लिए वारिस का होना ज़रूरी है.

उम्र के इस पड़ाव पर विवाह की ख़ुशी के बाद सुखराम अब उन लम्हों का इंतजार कर रहे हैं जब वो फिर से पिता बनेंगे.

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