पीएनबी घोटाला: जितनी चपत फ्रॉड से, उससे ज़्यादा की मार्केट कैप साफ़

  • 20 फरवरी 2018
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देश के दूसरे सबसे बड़े सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक यानी पीएनबी में 11,400 करोड़ रुपये के घोटाले की ख़बर उजागर होने के बाद बैंक को लगातार झटके पर झटके लग रहे हैं.

ये घोटाला मुंबई की एक शाखा में हुआ. इस घोटाले को भारत के बैंकिंग इतिहास का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा बताया जा रहा है.

बैंक ने 14 फ़रवरी को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई को इस फ़र्जीवाड़े की जानकारी दी थी और इसके बाद से बैंक का शेयर लगातार टूट रहा है.

14 फ़रवरी के दिन बैंक का शेयर 161 रुपये पर था और तब बैंक की मार्केट कैपिटल (कुल बाज़ार पूंजी) 39,436 करोड़ रुपये थी. इसके बाद निवेशकों का बैंक से भरोसा इस क़दर टूटा कि पांच कारोबारी सत्रों में शेयर साढ़े 28 फ़ीसदी लुढ़क गया.

मंगलवार के कारोबारी सत्र के दौरान जब शेयर 115 के भाव पर कामकाज कर रहा था तो इसकी बाज़ार पूंजी 27,918 करोड़ रुपये है. यानी घोटाला उजागर होने के बाद बैंक की मार्केट पूंजी 11,436 करोड़ रुपये घट गई.

मतलब साफ़ है कि हीरा व्यापारी नीरव मोदी ने बैंक को जितनी चपत लगाई, उससे ज़्यादा का नुक़सान बैंक के निवेशकों को हो गया.

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फ़िच ने घटाई रेटिंग

इसके अलावा, रेटिंग एजेंसी फ़िच ने मंगलवार को पीएनबी की वाइअबिलिटी रेटिंग 'बीबी' को रेटिंग वॉच नेगेटिव (आरडब्ल्यूएन) पर रखा है. फ़िच ने बैंक के साथ हुए 11,400 करोड़ रुपये के फ़र्जीवाड़े के बाद यह कदम उठाया है. इस फ़ैसले के बाद पीएनबी की रेटिंग में गिरावट आ सकती है.

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रेटिंग एजेंसी ने कहा, "बैंकिंग व्यवस्था पर नियंत्रण की असफलता के बारे में चीजें स्पष्ट होने तथा पीएनबी की वित्तीय स्थिति पर इसके असर को देखने के बाद फ़िच एक बार फिर रेटिंग वाच का विश्लेषण करेगी."

फ़िच ने कहा कि इस घोटाले से बैंक की छवि को धक्का पहुंचा है और इसका पूंजी बाज़ार पर भी असर हुआ है. उसने कहा कि वह पीएनबी की जिम्मेदारियों, संभावित वसूली आंतरिक और बाह्य स्रोतों से नई अतिरिक्त पूंजी के प्रबंध की निगरानी करेगा ताकि वह तय कर सके कि बैंक की वित्तीय स्थिति मौजूदा रेटिंग के स्तर की है या नहीं.

एजेंसी की तरफ से AAA से F तक की रेटिंग दी जाती है. फ़िलहाल पीएनबी के पास BBB रेटिंग है, जिसका मतलब है कि इसे मध्यम श्रेणी के बैंकों में रखा गया है.

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कैसे हुआ था फर्जीवाड़ा

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अरबपति डायमंड कारोबारी नीरव मोदी और उनके साथियों ने साल 2011 में बिना तराशे हुए हीरे आयात करने को लाइन ऑफ़ क्रेडिट के लिए पंजाब नेशनल बैंक की एक ब्रांच से संपर्क साधा.

आम तौर पर बैंक विदेश से आयात को लेकर होने वाले भुगतान के लिए एलओयू या लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग जारी करता है. इसका ये मतलब है कि बैंक नीरव मोदी के विदेश में मौजूद सप्लायर को 90 दिन के लिए भुगतान करने को राज़ी हुआ और बाद में पैसा नीरव को चुकाना था.

लेकिन पीएनबी के कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर नीरव मोदी की कंपनियों को फ़र्ज़ी एलओयू जारी किए और ऐसा करते वक़्त उन्होंने बैंक मैनेजमेंट को अंधेरे में रखा.

इन्हीं फ़र्ज़ी LoU के आधार पर भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने पंजाब नेशनल बैंक को लोन देने का फ़ैसला किया.

साज़िश रचने वाले लोगों ने एक क़दम जाकर स्विफ़्ट या सोसाइटी फ़ॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फ़ाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन का नाजायज़ फ़ायदा उठाने का फ़ैसला किया. ये इंटर-बैंकिंग मैसेजिंग सिस्टम है जो विदेशी बैंक पैसा जारी करने से पहले लोन ब्योरा पता लगाने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

बैंक के कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर अपने सुपरवाइज़र से बिना कोई इजाज़त लिए गारंटी को हरी झंडी दिखाने के लिए स्विफ़्ट तक अपनी पहुंच का फ़ायदा उठाया.

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इसके फ़लस्वरूप भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को कोई शक़ नहीं हुआ और उन्होंने नीरव मोदी की कंपनियों को फ़ॉरेक्स क्रेडिट जारी कर दिया.

ये रकम एक विदेशी बैंक के साथ पंजाब नेशनल बैंक के खाते में दी गई थी जिसे नोस्ट्रो एकाउंट कहते हैं. पैसा इस एकाउंट से मोदी के विदेश में मौजूद बिना तराशे हुए हीरे सप्लाई करने वाले लोगों को भेजा गया.

जब ये फ़र्ज़ी एलओयू मैच्योर होने लगे तो पंजाब नेशनल बैंक के भ्रष्ट कर्मचारियों ने सात साल तक दूसरे बैंकों की रकम का इस्तेमाल इस लोन को रिसाइकिल करने के लिए किया.

इस सारी धोखाधड़ी से तब पर्दा हटा जब इस घोटाले में लिप्त पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारी-अधिकारी रिटायर हो गए और नीरव मोदी की कंपनी के अफ़सरों ने जनवरी में दोबारा इसी तरह की सुविधा शुरू करने की गुज़ारिश की. नए अधिकारियों ने ये ग़लती पकड़ ली और घोटाले से पर्दा हटाने के लिए आंतरिक जांच शुरू कर दी.

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