यूपी में निवेश लाने में कितना सफल होगा इंवेस्टर्स समिट?

  • 21 फरवरी 2018
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Image caption प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे

लखनऊ में बुधवार से दो दिवसीय इन्वेस्टर्स समिट शुरू हो रहा है. कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री और अगले दिन समापन राष्ट्रपति करेंगे.

समिट को लेकर राज्य सरकार काफ़ी उत्साहित है और उसे भरोसा है कि इसके ज़रिए राज्य में क़रीब चार लाख करोड़ का निवेश आ सकता है.

लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होने वाले इन्वेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के अलावा केंद्र सरकार के क़रीब डेढ़ दर्जन मंत्री भी शामिल हो रहे हैं. 30 सत्रों में होने वाले इस सम्मेलन में देश के तमाम उद्योगपतियों के अलावा जापान, नीदरलैंड, मॉरीशस समेत सात देश कंट्री पार्टनर के रूप में हिस्सा ले रहे हैं.

उत्तर प्रदेश के उद्योग मंत्री सतीश महाना का कहना है कि सम्मेलन शुरू होने से पहले ही सैकड़ों एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, "हम लोग इसे लेकर बेहद उत्साहित हैं क्योंकि ख़ुद प्रधानमंत्री इसमें आ रहे हैं. इस समिट से देश विदेश के निवेशकों में ये विश्वास जगेगा कि उत्तर प्रदेश में निवेश का माहौल तैयार हो रहा है. क़रीब 900 एमओयू पर सम्मेलन शुरू होने से पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं."

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Image caption चार लाख करोड़ निवेश जुटाने का अनुमान

उद्योग मंत्री ने नहीं दी पूरी जानकारी

हालांकि जिन एमओयू पर हस्ताक्षर हुए हैं, उनकी विस्तृत जानकारी उद्योग मंत्री ने नहीं दी लेकिन उनका कहना था कि वो इसे लेकर काफ़ी उत्साहित हैं.

राज्य सरकार का अनुमान है कि वो इन्वेस्टर्स समिट के ज़रिए क़रीब चार लाख करोड़ रुपए का निवेश जुटा लेगी. सम्मेलन की तैयारी काफ़ी पहले से हो रही है और ख़ुद मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी इसे लेकर सक्रिय हैं. मुख्यमंत्री योगी भी कह चुके हैं कि निवेश से रोजगार के अनेक अवसर सृजित होंगे और प्रदेश के नौजवानों को रोजगार मिलेगा.

सरकार को मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन और ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश की ज़्यादा उम्मीद है. उद्योग मंत्री सतीश महाना का कहना था कि सम्मेलन में उद्यमियों के लिए घर वापसी का एक विशेष सत्र होगा जिसमें उन उद्यमियों को शामिल किया गया है, जो यूपी छोड़कर दूसरे प्रदेश में जाकर बिज़नेस कर रहे हैं.

सरकार का अनुमान है कि वो निवेश के लिए उचित माहौल बना रही है और इस माहौल में निवेशक उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित होंगे लेकिन जानकारों का कहना है कि सिर्फ़ सम्मेलन कर देने से माहौल तैयार नहीं होता और निवेश लायक़ माहौल सिर्फ़ राज्यों के ही चाहने से नहीं तैयार होता.

उत्तर प्रदेश के आर्थिक मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र भट्ट कहते हैं, "ये सिर्फ़ प्रदेश का मसला नहीं है बल्कि देश का है. भारतीय अर्थव्यवस्था की जो मौजूदा स्थिति है, निवेश उससे तय होगा. भारत में ब्याज दरें काफ़ी ज़्यादा हैं. हर कोर इंडस्ट्री में क्षमता का उपभोग स्तर सत्तर प्रतिशत से कम है. मार्केट में जब तक मांग नहीं बढ़ेगी, आर्थिक स्थितियां ठीक नहीं होंगी, तब तक निवेश नहीं आएगा, माहौल चाहे जितना बनाइए."

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Image caption यूपी में नोएडा-ग़ाज़ियाबाद में होता रहा है निवेश

निवेश लाना होगी बड़ी चुनौती

वीरेंद्र भट्ट कहते हैं कि अर्थव्यवस्था में मांग की कमी के दो तात्कालिक कारण हैं- नोटबंदी और जीएसटी. ऐसे में इन झटकों से उबरे बिना अर्थव्यवस्था में मज़बूती नहीं आएगी और तब तक निवेश आने की संभावना न के बराबर है.

जानकारों का कहना है कि निवेश और निवेश आकर्षित करने के लिए ऐसे बड़े सम्मेलन बीजेपी शासित राज्यों में काफी लोकप्रिय हैं लेकिन सवाल उठता है कि इतने भारी-भरकम सम्मेलनों के बावजूद निवेश आता कितना है?

आर्थिक मामलों के जानकार बताते हैं कि किसी भी उद्योग में निवेश के लिए आधारभूत संरचनाओं की उत्तर प्रदेश में अभी भी बहुत कमी है और ख़ासकर बिजली के सेक्टर में. यही वजह है कि निवेश आज भी नोएडा और ग़ाज़ियाबाद तक ही सीमित है.

बहरहाल, लखनऊ में इन्वेस्टर्स समिट दो दिन चलेगा. इसे देखते हुए लखनऊ में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम तो किए ही गए हैं, कई रास्तों पर ट्रैफ़िक डायवर्जन के कारण आम लोगों को ख़ासी परेशानी भी हो रही है.

यही नहीं, बड़ी संख्या में आने वाले महत्वपूर्ण व्यक्तियों के कारण लखनऊ एअरपोर्ट पर क्षमता से अधिक हवाई जहाज़ों और चार्टर्ड विमानों को उतारना और उनकी पार्किंग एक बड़ा सवाल बना हुआ है.

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