कौन हैं वो अंबानी जो PNB घोटाले में गिरफ़्तार हो गए

  • 21 फरवरी 2018
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पंजाब नेशनल बैंक में हुए 11 हज़ार करोड़ रुपए के घोटाले की जांच ने पैर पसारने शुरू किए हैं, तो कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं.

इस मामले की जांच करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की कंपनियों से जुड़े पांच आला अधिकारियों को गिरफ़्तार किया है.

इनमें फ़ायरस्टार इंटरनेशनल की कविता मनकिकर और नक्षत्र-गीतांजलि ग्रुप के चीफ़ फ़ाइनेंशियल ऑफ़िसर शामिल हैं.

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मुकेश अंबानी से रिश्ता

लेकिन जिस नाम को लेकर सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है वो हैं फ़ायरस्टार इंटरनेशनल के प्रेसिडेंट (फ़ाइनेंस) विपुल अंबानी. और दिलचस्पी की सबसे बड़ी वजह उनका सरनेम है.

विपुल अंबानी असल में मुकेश अंबानी के चचेरे भाई हैं. वो धीरूभाई अंबानी के छोटे भाई नट्टूभाई अंबानी के बेटे हैं. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक वो साल 2014 से फ़ायरस्टार का वित्तीय कामकाज देख रहे हैं.

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ज़ाहिर है नीरव मोदी की फ़्लैगशिप कंपनी के इतने बड़े ओहदे पर बैठे होने के कारण इस बात की आशंका काफ़ी बढ़ जाती है कि उन्हें इस मामले के बारे में काफ़ी जानकारी रही होगी.

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जो दूसरे लोग गिरफ़्तार किए गए हैं उनमें फ़ायरस्टार के सीनियर एग्ज़िक्यूटिव अर्जुन पाटिल और गीतांजलि ग्रुप में मैनेजर नितेन शाही शामिल हैं.

इन पाच लोगों से सीबीआई ने मंगलवार को लंबी पूछताछ की थी जिसके बाद हिरासत में ले लिया गया.

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ब्लूमबर्ग के मुताबिक विपुल अंबानी ने अपना करियर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ में उसके प्रोजेक्ट एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग ग्रुप के साथ शुरू किया.

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बिज़नेस के क्षेत्र का व्यापक अनुभव

इसके साथ-साथ उन्होंने टेक्नो इकोनॉमिक फ़िज़ीबिलिटी इवेल्यूशन के लिए कंप्यूटरीकृत मॉडल तैयार किया, जो ख़ास तौर से पॉलीप्रॉपिलीन प्रोजेक्ट के लिए था.

उनके पास यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैसाच्युसेट्स से केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री है.

पढ़ाई के बाद वो इंडस्ट्री में उतरे और फिर कुछ साल बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के मैनेजिंग डायरेक्टर के एग्ज़िक्यूटिव असिस्टेंट रहे और साल 1993 तक अलग-अलग ग्रुप में बड़े पदों पर काम किया.

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उन्हें टावर कैपिटल और सिक्योरिटीज़ का डायरेक्टर बनाया गया था और वो साल 2009 तक इस पद पर रहे. इसके बाद उन्होंने कैरोक्स टेक्नोलॉजी में पद संभाला.

टावर कैपिटल में रहने के दौरान उन्होंने कथित तौर पर होलसेल डेट मार्केट के विकास में अहम रोल निभाया था.

उन्होंने रिसर्च आधारित डेट इंटरमीडिएशन डिविज़न बनाया, जिसमें समुचित सिस्टम और प्रक्रियाएं थीं और ये आज भारत के तीन शीर्ष इंटरमीडियरीज़ में शुमार है.

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कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के मुताबिक इसके बाद वो साल 2012 में कोंटैंगो ट्रेडिंग एंड कमॉडिटी नामक कंपनी में चले गए.

इसके दो साल बाद उन्होंने नीरव मोदी से हाथ मिलाया और फ़ायरस्टार का कामकाज देखने लगे.

फ़ायरस्टार की वेबसाइट के मुताबिक ये कंपनी अमरीका, यूरोप, मिडल ईस्ट, सुदूर पूर्व और भारत में कारोबार करती है और उसके पास 1200 से ज़्यादा प्रशिक्षित प्रोफ़ेशनल हैं.

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