क्या श्रीदेवी को दिल की बीमारी का ख़तरा था?

  • सरोज सिंह
  • बीबीसी संवाददाता
श्रीदेवी

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श्रीदेवी इस दुनिया से चलीं गईं, लेकिन उनकी मौत अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई.

उनकी मौत के पीछे कार्डिएक अरेस्ट को वजह बताया जा रहा है.

श्रीदेवी महज़ 54 साल की थीं. अमूमन सेहत पर बहुत ज़्यादा ध्यान देने वाले फ़िल्मी सितारों के लिए ये उम्र नहीं होती दुनिया से चले जाने की.

आम धारणा है कि अक्सर इस उम्र में महिलाओं में हृदय रोग की संभावना न के बराबर होती है. क्या वाक़ई में ऐसा है?

मेडिकल के पेशे से जुड़े डॉक्टरों के मुताबिक श्रीदेवी की मौत महिलाओं के लिए एक सबक है.

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इंडियन मेडिकल एसोशिएसन ने श्रीदेवी की मौत पर श्रद्धांजिल देते हुए कहा है कि अब ज़रूरत इस बात की है कि महिलाओं में कार्डिएक डेथ के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए. इस अभियान को वो श्रीदेवी को समर्पित करना चाहते हैं.

महिलाओं को ज़्यादा ख़तरा?

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के डॉक्टर के के अग्रवाल के मुताबिक 'महिलाओं में प्री मेनोपॉज़ हार्ट की बीमारी नहीं होनी चाहिए.'

इसके पीछे महिलाओं में पाए जाने वाले सेक्स हॉर्मोन हैं जो उन्हें दिल की बीमारी से बचाते हैं.

लेकिन पिछले कुछ समय में महिलाओं में प्री मेनोपॉज़ वाली उम्र में भी हार्ट अटैक जैसे बीमारियां बढ़ी हैं.

डॉ. अग्रवाल के मुताबिक '10 हार्ट अटैक में तीन हार्ट अटैक महिलाओं में हो रहे हैं. ये होना नहीं चाहिए.'

महिलाओं में हृदय रोग के कारण

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महिलाओं में जब भी हार्ट अटैक या फिर कार्डिएक अरेस्ट होता है पुरुषों के मुकाबले वो ज़्यादा गंभीर होता है.

महिलाओं में हार्ट अटैक सांस लेने में दिक्कत से भी शुरू हो सकती है.

अक्सर उनमें अटैक साइलेंट आता है. श्रीदेवी के मामले में भी ऐसा ही कुछ हुआ सा लगता है.

डॉ. अग्रवाल के मुताबिक महिलाओं में बीमारी की पहचान और इलाज दोनों देरी से शुरू होता है.

ऐसा इसलिए क्योंकि महिलाएं अपने सीने में दर्द को हल्के में लेती हैं. वो समझती नहीं है और अस्पताल देरी से जाती हैं, जबकि पुरुष अस्पताल जल्दी जाते हैं.

औरतों में ज्यादा डर ब्रेस्ट कैंसर का होता है. हालांकि आंकड़े उल्टी कहानी बयान करते हैं.

डॉ. अग्रवाल के मुताबिक दुनिया भर में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर से होने वाली मौत कम हैं और हार्ट अटैक से होने वाली ज़्यादा हैं.

इसलिए आज महिलाओं में हृदय से जुड़ी बीमारी के लिए जागरूकता फ़ैलाने की ज़्यादा ज़रूरत है.

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महिलाओं में हृदय की बीमारी का पता चलने में देरी क्यों ?

महिलाओं में इलेक्ट्रो कार्डियोग्राम यानी इसीजी का डेटा अक्सर सही नहीं आता.

वो इसलिए क्योंकि इसीजी के दौरान महिलाओं में इलेक्ट्रोड दूसरी जगह लगते हैं.

अमरीका में चल रही फ्रैमिंघमभी महिलाओं और हृदय रोग पर लंबे समय से इस पर शोध कर रही है.

उस स्टडी के मुताबिक :

  • महिलाओं में सडन कार्डिएक डेथ की दर पुरुषों के मुकाबले कम है.
  • मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं में हृदय रोग की आशंका ज़्यादा बढ़ जाती है.
  • 40 के उम्र के बाद कोरोनरी हार्ट की बीमारी हर दो में से एक पुरुष को और हर तीन में एक महिला को होती है.

कोरोनरी हार्ट की बीमारी की वजह से मरने वाले पुरुषों के मुकाबले कोरोनरी हार्ट की बीमारी से मरने वाली महिलाओं की संख्या आधी होती है.

फ़िल्म स्टार श्रीदेवी के मामले में ये भी एक वजह हो सकती है. दुबई से छपने वाले खलीज़ टाइम्स के मुताबिक संजय कपूर ने उन्हें बताया की श्रीदेवी को हार्ट से संबंधित कोई दिक्कत पहले नहीं थी.

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कैसे कर सकते हैं हृदय रोग की स्क्रीनिंग ?

श्रीदेवी की मौत से सबक लेते हुए महिलाएं आज से भी हृदय रोग के लिए सजग हो सकती है.

डॉ. के के अग्रवाल के मुताबिक अब भी देर नहीं हुई है. इसके लिए कुछ आसान से तरीके हैं जिनका इस्तेमाल किया जा सकता है.

  • 6 मिनट वॉक टेस्ट - अगर छह मिनट में 500 मीटर या उससे ज्यादा वॉक कोई महिला कर सकती है तो उसके हृदय में ब्लॉकेज की आशंका बहुत कम होती है.
  • 40 की उम्र को पार कर चुकी महिलाओं को कभी भी ऐसी कमज़ोरी, थकान, सीने में दर्द को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, जिसकी वजह उन्हें नहीं पता.
  • डॉक्टर अग्रवाल के मुताबिक अगर महिला के परिवार में किसी को भी हृदय रोग की शिकायत रही है तो उन महिलाओं को ज़्यादा सजग रहने की ज़रूरत है. परिवार में किसी पुरुष को 55 साल की उम्र के पहले हृदय रोग हो और महिला को 65 के बाद तो फ़ैमली हिस्ट्री स्ट्रांग हो जाती है.

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