नगालैंड, मेघालय में सरकार किसकी, आज होगा फ़ैसला

  • मयूरेश कोण्णूर
  • बीबीसी संवाददाता, कोहिमा से

पूर्वोत्तर भारत के तीन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं. त्रिपुरा की वोटिंग के बाद नगालैंड और मेघालय के लोग मंगलवार को अपना फ़ैसला सुनाएंगे.

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नगालैंड में असली लड़ाई फ़िलहाल सत्ता संभाल रही 'नगा पीपल्स फ़्रंट' और 'एनडीपीपी' और बीजेपी गठबंधन के बीच है.

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बीते सालों में यहां की सत्ता को देखें तो यहां अधिकतर स्थानीय नगा राजनीतिक पक्षों का बोलाबाला रहा है.

बीच-बीच में कांग्रेस भी पूर्ण सत्ता में रही और बीजेपी भी गठबंधन के ज़रिए सरकार में शामिल रही है.

मगर इस बार कुछ नए बने गठबंधनों ने नगालैंड में चुनावी समीकरण बदल दिया है.

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भाजपा के साथ गठबंधन

11 साल तक नगालैंड की सत्ता संभाल चुके नेफ़्यू रिओ कभी मौजूदा सत्तारूढ़ 'नगालैंड पीपल्स फ़्रंट' के अगुआ हुआ करते थे.

लेकिन अपनी पार्टी को छोड़ वो 'नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव फ्रंट' यानी 'एनडीपीपी' में शामिल हो गए और उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन बना लिया.

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नगालैंड में मतदान के लिए सुरक्षा व्यवस्था

नगालैंड विधानसभा के लिए कुल 60 सीटों पर मतदन हो रहा है जिसमें गठबंधन ने सभी सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं.

'एनडीपीपी' ने 40 जगहों पर और बीजेपी 20 जगहों पर चुनाव लड़ रही है.

इस गठबंधन ने अपना खाता पहले ही खोल लिया है क्योंकि एलायंस की तरफ़ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार रिओ पहले ही अपने चुनाव क्षेत्र से निर्विरोध जीत चुके हैं.

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नगालैंड का विकास

दूसरी ओर सत्ता में रही 'एनपीएफ़' मुख्यमंत्री टीआर ज़ेलियांग के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है. उनके सामने सत्ता बचाने की चुनौती है.

नगालैंड के 11 लाख 91 हजार मतदाता मंगलवार को मतदान कर रहे हैं. उनके लिए भ्रष्टाचार और अच्छी सड़कें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं.

दिमापुर मार्केट में जब हमने सेंग्योर रिमाक से बात की तो उनका कहना था, "हमारे नगालैंड में तो कोई विकास ही नहीं है. दूसरे राज्यों से तुलना की जाए तो हमारे यहां रास्ते नहीं हैं, उद्योग नहीं है, शिक्षा की सुविधा में भी हम बहुत पीछे हैं. जो चुन कर आने वाले नेता हैं, उनको नगालैंड के आर्थिक विकास पर ध्यान देना चाहिए."

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क्या नया इतिहास रचा जाएगा?

वरिष्ठ पत्रकार रविशंकर का कहना है कि बाकी मुद्दों में अहम मुद्दा यह है कि इस बार पांच महिलाएं राज्य में पहली बार चुनाव लड़ रही हैं.

वो कहते हैं, "सबसे महत्वपूर्ण बात यह है नगालैंड के चुनाव में पांच महिलाओं ने नामांकन पत्र दाखिल किया है और अगर एक भी महिला चुनी गई तो नगालैंड विधानसभा में नया इतिहास रचा जाएगा. आज तक यहां कोई महिला प्रतिनिधि नहीं चुनी गई है विधानसभा में."

मेघालय में मतदान

उधर मेघालय में भी मंगलवार को मतदान हो रहे हैं जहां स्थानीय पक्षों ने यहां की कांग्रेस की सरकार के सामने चुनौती खड़ी कर दी है.

यहां कुल मिलाकर 60 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है.

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कांग्रेस के लिए परेशानी

कांग्रेस के मुकुल संगमा के सामने यहां सबसे बड़ी चुनौती 'नेशनल पीपल्स पार्टी' यानी 'एनपीपी' की है जिसका नेतृत्व कोर्नार्ड संगमा कर रहे हैं.

उसी के साथ इस चुनाव में बनी 'यूडीएफ़', 'एचएसपीडीपी' और 'जीएनसी' का गठबंधन भी सत्ता में रहे कांग्रेस के लिए परेशानी का कारण बन सकता है.

हालांकि बीजेपी के साथ 'एनपीपी' 'एनडीए' में शामिल है, मगर दोंनो पक्ष राज्य में अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं.

मेघालय मे तुरा, खासी और जैंतिया पहाड़ी इलाकों में किसका ज़ोर है, इसी पर यहां की राजनीति निर्भर करती है.

इन अलग-अलग इलाकों के अलग-अलग आदिवासी वोट बैंक हैं.

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नगालैंड की राजनीति में क्यों पिछड़ी हुई हैं महिलाएं?

वरिष्ठ पत्रकार रविशंकर का कहना है, "विकास और रोज़गार ये मुद्दे तो हैं ही. वह तो पूरे देश में ही हैं. मगर मेघालय में एक अलग मुद्दा है. मेघालय में जिनकी ज़मीनें हैं उन्हीं की खदानें हैं. फिर वहां पर कोयले की अवैध ढुलाई भी होती है. उसके साथ करप्शन का एक तंत्र चलता है. उससे स्थानीय लोगों को बड़ी परेशानी होती है. कांग्रेस और बीजेपी ने चुनावी घोषणापत्र में भी इस मुद्दे को शामिल किया है."

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