स्पीड डेटिंग क्यों कर रहे हैं भारतीय?

  • सिन्धुवासिनी
  • बीबीसी संवाददाता
डेटिंग, युवा, स्पीड डेटिंग

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"जब मैं वहां गई तो ऐसा लगा जैसे मेरा स्वयंवर होने वाला है. मेरे सामने तक़रीबन 10 लड़के थे और मेरी नज़रें उनमें से बेस्ट को ढ़ूंढ रही थीं."

29 साल की श्रुति ये बताते हुए खूब हंसती हैं. ऐसा तब हुआ था जब वो पहली बार किसी स्पीड डेटिंग प्रोग्राम में शामिल होने गई थीं.

स्पीड डेटिंग को आधुनिक स्वयंवर कहना ग़लत नहीं होगा. हालांकि इनमें एक बड़ा फ़र्क ये है कि यहां लड़के और लड़कियां दोनों होते हैं और दोनों को मनपसंद पार्टनर या दोस्त चुनने की आज़ादी होती है. अगर कोई पसंद नहीं आया तो बिना किसी दबाव या झिझक के ना भी कहा जा सकता है.

श्रुति फ़िलहाल स्पीड डेटिंग के ज़रिए मिले एक लड़के को डेट कर रही हैं.

क्या है स्पीड डेटिंग?

इसका कॉन्सेप्ट वैसे तो पश्चिमी देशों से आया है, लेकिन अब इसे भारत समेत दुनिया के कई देशों में पंसद किया जा रहा है.

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स्पीड डेटिंग प्रोगाम में सिंगल लड़के-लड़कियां मिलते हैं. मसलन, अगर 10 लड़कियां और 10 लड़के हैं तो दसों को एक-दूसरे से अलग-अलग बात करने का मौक़ा मिलेगा.

इसके लिए उन्हें तक़रीबन आठ मिनट का वक़्त दिया जाता है. इस आठ मिनट में वो एक-दूसरे की पसंद-नापसंद और बेसिक इंट्रोडक्शन जान सकते हैं.

यानी तक़रीबन 80 मिनट (एक घंटे 20 मिनट) में आप 10 ऐसे लोगों से मिल पाएंगे जो भविष्य में आपके पार्टनर बन सकते हैं.

इस आठ मिनट की बातचीत में आप ये तय करते हैं कि आप इन 10 लोगों में किसी से दोबारा मिलना चाहेंगे या नहीं.

स्पीड डेटिंग के फ़ायदे

अगर दो लोग दोबारा मिलने को राज़ी होते हैं तो बात आगे बढ़ती है. स्पीड डेटिंग की सबसे अच्छी बात ये है कि आप कम वक़्त में अपनी तरह के लोगों से मिल पाते हैं.

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ज़रूरी नहीं है कि यहां लोग सिर्फ़ प्यार या डेट की तलाश में आते हैं. कई ऐसे लोग भी हैं जो सिर्फ़ दोस्ती और नॉर्मल बातचीत के लिए स्पीड डेटिंग चुनते हैं.

'लाइफ़ ऑफ़ लाइन' एक ऐसा फ़ोरम है जो भारत के अलग-अलग शहरों में स्पीड डेटिंग इवेंट्स आयोजित कराता है. इसकी शुरुआत 2016 में हुई थी.

प्रतीक इसके आयोजकों में से एक हैं. उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा, "अगर कोई स्पीड डेटिंग करना चाहता है तो वो हमारी वेबसाइट पर रजिस्टर करता है और फिर हम उससे संपर्क करते हैं."

प्रतीक के मुताबिक वो अब तक 134 इवेंट्स करा चुके हैं जिनमें तकरीबन 4,000 लोगों ने हिस्सा लिया. ये इवेंट्स दिल्ली, मुंबई , हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु में हुए थे.

प्रतीक के मुताबिक, उनके पास आम तौर पर 20-40 साल के लोग आते हैं जिन्हें काम से फ़ुर्सत नहीं मिलती. इस तरह उन्हें नए लोगों से मिलने-जुलने का मौका मिलता है.

डेटिंग कंपनी बिना किसी की सहमति के उसका फ़ोन नंबर या कोई दूसरी जानकारी शेयर नहीं कर सकती.

स्पीड डेट.कॉम और क्वैक-क्वैक.कॉम कुछ ऐसी ही वेबसाइट्स हैं जो स्पीड डेटिंग की सुविधा देती हैं.

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स्पीड डेटिंग का ऑफ़र देनी वाली कंपनियां मैट्रिमोनियल बेवसाइट्स की तरह शादी कराने के मक़सद से काम नहीं करतीं. हां, अगर डेटिंग के बाद बात शादी तक पहुंच जाए, ऐसा कई बार होता है.

डॉ. गीतांजलि सक्सेना एक रिलेशनशिप एक्सपर्ट हैं और उनके पास आने वालों में एक बड़ी संख्या युवाओं की होती है.

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डॉ. गीतांजलि कहती हैं, "आज के माहौल को देखते हुए मुझे लगता है कि स्पीड डेटिंग में कोई बुराई नहीं है. ज़रूरी नहीं कि हर किसी को पहली नज़र वाला प्यार हो. इसलिए अगर आप सोच-समझकर किसी को चुनते हैं तो ये अच्छा ही है."

दिल्ली के रहने वाले गौरव वैद्य एक आईटी कंपनी में काम करते हैं. ऑस्ट्रेलिया से वापस लौटे उनके एक दोस्त ने उन्हें स्पीड डेटिंग आज़माने की सलाह दी.

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गौरव ने बीबीसी से बताया, "पहली बार में मुझे ये एक गेम जैसा लगा. मैं एक लड़की से बात कर रहा था तभी एक सीटी बजी और मुझे दूसरी टेबल पर जाकर दूसरी लड़की से बात करने को कहा गया."

हालांकि बाद में उन्हें लगा कि स्पीड डेटिंग की ख़ासियत ही यही है कि आप कम वक़्त में ज़्यादा लोगों से बात कर पाते हैं.

उन्होंने कहा, "अभी मैं दो लड़कियों से बात कर रहा हूं. मैं चाहता हूं कि मुझे यहां मनचाहा मैच मिल जाए."

पता करिए, आप क्या चाहते हैं?

लेकिन ऐसा भी नहीं है कि स्पीड डेटिंग के फ़ायदे ही फ़ायदे हैं और यहां प्यार या पार्टनर मिलने की गारंटी है.

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डॉ. गीतांजलि के मुताबिक, "अगर आप स्पीड डेटिंग कर रहे हैं तो आपको पता होना चाहिए कि आप वाक़ई में कैसा साथी ढूंढ रहे हैं, क्योंकि एकसाथ कई लोगों से मिलकर आप कंफ़्यूज़ हो सकते हैं."

उनका मानना है कि हम पहली बार में किसी की ख़ूबसूरती या मुस्कुराहट से आकर्षित हो सकते हैं, लेकिन वो हमारे लिए सही ही होगा, ऐसा ज़रूरी नहीं है.

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