प्रेस रिव्यू: श्रीदेवी के पार्थिव शरीर को दुबई से भारत भेजने में मदद करने वाला अशरफ़ कौन?

श्रीदेवी की अंतिम यात्रा

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आज सारे अख़बार श्रीदेवी के अंतिम संस्कार से जुड़ी ख़बरों से अटे पड़े है. सभी अख़बारों ने उनकी अंतिम यात्रा की तस्वीरें लगाई हैं.

अमर उजाला ने हेडलाइन दी है - 'हर आँख नम, हर कोई ग़मज़दा...' श्रीदेवी से जुड़ी एक दिलचस्प ख़बर दैनिक जागरण में भी छपी है.

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दैनिक जागरण ख़बर के मुताबिक श्रीदेवी के पार्थिव शरीर को भारत भेजने में अशरफ़ नाम के एक भारतीय की अहम भूमिका रही है.

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अशरफ़ का नाम दुबई पुलिस की तरफ़ से जारी किए गए उस लेप लगानेवाले दस्तावेज़ में था जिससे पता चला कि श्रीदेवी की मौत डूबने से हुई है.

ये अशरफ़ शेरी थमारासेरी केरल के निवासी हैं. अशरफ़ कर्ज़े में डूबे मज़ूदरों से लेकर अमीरों तक के 4700 शवों को दुनिया के 38 देशों में भेज चुके हैं.

अशरफ़ कहते हैं उन्हें इस काम से बड़ा सुकून मिलता है.

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राफ़ेल की असली क़ीमत?

द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से पहले पन्ने पर ख़बर छापी है कि राफ़ेल विमान की मौजूदा क़ीमत, उसकी साल 2007 की क़ीमत से कम है.

फ़्रांस से ख़रीदे जा रहे राफ़ेल फ़ाइटर विमानों की कीमत को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीख़ी बयानबाज़ी होती रही है.

अख़बार को सूत्रों ने बताया कि विपक्ष जो कीमत बताता है वो साल 2007 की है जब एक यूरो की वैल्यू 66.60 रुपये थी.और इसमें कोई अन्य हथियार भी शामिल नहीं थे.

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चिंदबरम के पुत्र जेल में

दूसरी ख़बर जो हर अख़बार के पहले पन्ने पर है, वो पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिंदबरम के बेटे कार्ति की गिरफ़्तारी की है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ सीबीआई का आरोप है उन्होंने एक मीडिया कंपनी से रिश्वत ली.

कार्ति ने दिल्ली की एक अदालत में पेशी के लिए जाते वक्त अपनी गिरफ़्तारी को बदले की भावना से की गई सियासी कार्रवाई क़रार दिया है.

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अटवाल पर विवाद

द ट्रिब्यून ने ख़बर छापी है कि सज़ायाफ़्ता सिख चरमपंथी जसपाल अटवाल को कनाडा के प्रधानमंत्री के भारत दौरे के दौरान, डिनर पर बुलाने वाले कनाडाई सांसद रणदीप सराई ने लिबरल पार्टी के एक अहम पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

सराई ने अटवाल को दिल्ली में कनाडा के हाई कमिश्नर के यहां डिनर पार्टी में आमंत्रित किया था.

लेकिन जैसे ही उच्चायोग के अधिकारियों ने अटवाल का नाम देखा, उनका निमंत्रण वापस ले लिया गया.

अख़बार लिखता है भारत से कनाडा लौटने पर जस्टिन ट्रूडो को संसद में इस दौरे से जुड़े कई कड़े सवालों का जवाब देना पड़ा.

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सत्यपाल सिंह फिर बोले

अमर उजाला लिखता है कि डार्विन की थ्योरी को ग़लत बताने वाले मंत्री सत्यपाल सिंह ने एक बार फिर कहा है कि दुनिया डार्विन नहीं बल्कि आर्यभट्ट की ज़ीरो और रामानुजम की नंबर थ्योरी को सलाम करती है.

अखबार के मुताबिक सत्यापाल सिंह ने एक समारोह में कहा, "मैं बचपन से ही साइंस का छात्र हूं, इसलिए आज भी अपनी बात पर कायम हूं."

सत्यपाल ने औरंगाबाद में ऑल इंडिया वैदिक सम्मेलन में कहा था कि डार्विन का विकास का सिंद्धात ग़लत है.

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