जस्टिन ट्र्डो ने लगाया भारत सरकार पर 'आरोप'

  • 1 मार्च 2018
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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो के भारतीय दौरे के समय नज़र आया एक विवाद उनके वापस जाने के बाद फिर सुर्ख़ियों में है.

ट्रुडो ने कनाडा की संसद में जो कहा है वो दोनों देशों के संबंधों में खटास पैदा कर सकता है.

जस्टिन ट्रुडो ने कनाडा की संसद में ये माना है कि उनके दौरे के वक़्त पूर्व सिख अलगाववादी जसपाल अटवाल का भारत में होना दरअसल भारत सरकार की वजह से मुमकिन हो पाया.

कनाडा की संसद में विपक्ष ने जस्टिन ट्रुडो से सवाल किया था, "क्या उनकी सरकार में से किसी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की थी जिसमें रिपोर्टर्स को ये बताया गया कि भारत सरकार उनसे भारत में हुई शर्मनाक ग़लती में शामिल थी?"

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इस पर जस्टिन ट्रुडो ने जवाब दिया कि अगर हमारे राजनयिक या सुरक्षा अधिकारी कोई बात कनाडा के लोगों को कहते हैं तो वो तभी कहते हैं जब वो जानते हों कि ये सही है.

इस पर भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने भी बयान जारी किया है.

उन्होंने कहा, "मैं साफ़ कर देना चाहता हूं कि भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का इससे कोई लेना देना नहीं है. जसपाल अटवाल का मुंबई में कनाडाई हाई कमीशन के कार्यक्रम में शामिल होना या नई दिल्ली के कार्यक्रम का न्योता भेजना सरकार से संबंधित नहीं है. इसके विपरीत कोई भी बात निराधार है और उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा."

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क्या हुआ था भारत में?

दरअसल, मुंबई और दिल्ली में जस्टिन ट्रूडो के दो कार्यक्रम थे जिनका न्योता जसपाल अटवाल के पास भी भेजा गया था.

मुंबई में 20 फ़रवरी को हुए इंवेट से अटवाल और कनाडा के प्रधानमंत्री की पत्नी सोफ़ी ट्रूडो की तस्वीर मीडिया में आई थी.

उस कार्यक्रम में सोफ़ी ट्रूडो के अलावा उन्हें कनाडा के एक मंत्री अमरजीत सोही के साथ भी देखा गया था.

इन तस्वीरों के सामने आने के बाद क्षतिपूर्ति के तौर पर कनाडा ने अटवाल को प्रधानमंत्री ट्रूडो की डिनर पार्टी के लिए दी गई दावत रद्द कर दी थी.

इसके बाद जस्टिन ट्रु़डो ने भी एक बयान जारी किया था कि उन्होंने डिनर रिसेप्शन के लिए जसपाल अटवाल को दिया न्योता रोक लिया है. जिस सांसद ने ये निमंत्रण दिया था, वे इसके लिए पूरी ज़िम्मेदारी लेंगे. सिख और कनाडा के भारतवंशी समाज ने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. ये दौरा दोनों देशों के रिश्तों को आगे ले जाने के लिए है."

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कनाडा का कवर-अप

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़ इस घटना के बाद कनाडा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी डेनियल जीन ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान कनाडा की मीडिया से कहा कि ये महज़ एक इत्तेफ़ाक नहीं था कि अटवाल जस्टिन ट्रु़डो के भारत दौरे के वक़्त भारत में मौजूद थे और भारत सरकार ने ही उन्हें ब्लैकलिस्ट से निकाला.

अटवाल को डिनर पार्टी का ये न्योता कनाडा के सांसद रनदीप सराय ने दिया था जिन्होंने मंगलवार की शाम पार्टी के पेसिफ़िक कॉकस के पद से इस्तीफा भी दे दिया. उन्होंने अपने ट्वीट में अपनी इस गलती के लिए माफ़ी भी मांगी.

जसपाल अटवाल को कैसे मिला वीज़ा?

'खालिस्तान समर्थक' जसपाल अटवाल को भारत का वीज़ा कैसे मिला? इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने 22 फ़रवरी को कहा था कि वो इस बात की जानकारी जुटा रहे हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, 'जहां तक वीज़ा की बात है, हमें नहीं मालूम कि ये कैसे हुआ, लेकिन हम ये पता करने की कोशिश कर रहे हैं.'

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जसपाल अटवाल एक सिख अलगाववादी थे और साल 1986 में वैंकूवर (कनाडा) में पंजाब के मंत्री मलकियत सिंह सिद्धू की हत्या की कोशिश के लिए अटवाल को कोर्ट ने कसूरवार ठहराया था.

भारत में जस्टिन ट्रूडो की सरकार को लेकर ये आरोप लगता रहा है कि वे 'खालिस्तान समर्थकों' के प्रति सहानुभूति रखते हैं.

मीडिया में ये बात भी काफ़ी उठी थी कि हर विदेशी प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति का ग़र्मजोशी से स्वागत करने वाले नरेंद्र मोदी ने इसी वजह से ट्रुडो के स्वागत के लिए कैबिनेट मंत्री को भेज दिया था.

यहां तक कि ट्रुडो जब ताजमहल देखने गए तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वहां नहीं पहुंचे थे, जबकि इसराइली पीएम नेतन्याहू की आगवानी के लिए वो गए थे.

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