मोदी के नेतृत्व में भारत अरब देशों से और क़रीब?

  • 2 मार्च 2018
इमेज कॉपीरइट PIB

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौर में भारत के पश्चिमी एशिया और अरब देशों के साथ संबंध काफ़ी घनिष्ट हो गए हैं. ऐसा भारत में अरब देशों पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञ कहते हैं.

प्रधानमंत्री पिछले चार सालों में कई अरब देश का दौरा कर चुके हैं और अरब देश के लीडर पहले की तुलना में अब भारत के दौरे पर आ चुके हैं. भारत के तीन दिनों के दौरे पर आए जॉर्डन के राजा अब्दुल्लाह द्वितीय यहां आने वाले अरब नेताओं में से एक हैं.

धार्मिक कट्टरवाद पर हुए एक सम्मलेन में गुरुवार को प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद और कट्टरता के ख़िलाफ़ लड़ाई किसी भी धर्म के ख़िलाफ़ नहीं है. दिल्ली के विज्ञान भवन में उन्हें सुनने वालों में जॉर्डन के राजा अब्दुल्लाह द्वितीय भी मौजूद थे जिनका यह भारत के दौरे का आख़िरी दिन था.

किंग अब्दुल्लाह ने भी अपने भाषण में कुछ इसी तरह की बातें कहीं. उनके दौरे के ख़ास मुद्दों में से एक विश्व स्तर पर जारी मज़हबी कट्टरता के ख़िलाफ़ भारत के साथ संयुक्त मोर्चा बनाने पर ज़ोर देना शामिल रहा.

इमेज कॉपीरइट MEA Twitter

अब रिश्ते ज़्यादा मजबूत

दरअसल पिछले चार सालों में प्रधानमंत्री मोदी ने भी पश्चिम एशिया और खाड़ी के देशों के दौरे में इस तरह का मोर्चा बनाने पर ज़ोर दिया है.

दिल्ली के इंस्टीच्यूट फॉर डिफ़ेंस स्टडीज एंड एनालिसिस की पश्चिम एशिया की विशेषज्ञ मीना सिंह रॉय कहती हैं कि प्रधानमंत्री की पश्चिम एशिया पॉलिसी का ये एक अटूट हिस्सा बन गया है.

मोदी के दौरे में पश्चिमी एशिया के साथ बढ़ती घनिष्टता पर टिपण्णी करते हुए मीना सिंह रॉय कहती हैं, "पिछले चार सालों में अरब देशों के साथ फिर से फ़ोकस बना है. चाहे वो नेताओं के आने-जाने की बात हो, या आर्थिक संबंध मज़बूत करने की बात हो या फिर निवेश का मुद्दा हो."

वो आगे कहती हैं कि व्यापारिक और राजनीतिक संबंध पहले के मुक़ाबले अब काफी मज़बूत हैं.

भारत के इसराइल के साथ बेहतर संबंध के बावजूद मोदी के नेतृत्व में अरब और खाड़ी देशों के साथ रिश्ते मज़बूत हुए हैं.

इमेज कॉपीरइट EPA

तेल और गैस से आगे भी राहें

पूर्व राजनयिक राजीव डोगरा के अनुसार इसके कई कारण हैं, वे कहते हैं, "पहली बात तो ये कि उस क्षेत्र को लेकर हम अपने दिमाग में काफी डिफेंसिव रहे हैं. प्रवासी भारतीयों से अरबों डॉलर का प्रेषण आता है तो हम कुछ ऐसा न करें कि गड़बड़ हो जाए.''

''दूसरा, प्रवासी भारतीयों ने इन देशों में जो निवेश किया वह काफ़ी मात्रा में है और सराहनीय है. और तीसरा इन देशों ने इस्लामिक कट्टरता के ख़िलाफ़ जो लड़ाई शुरू की है उसमें भारत अहम भूमिका निभा सकता है."

मीना सिंह रॉय के अनुसार दोनों पक्षों के बीच बढ़ते संबंधों के कुछ और भी कारण हैं. "अब भारत का ध्यान खाड़ी और अरब देशों के साथ संबंध मज़बूत करने में केवल ऊर्जा (तेल और गैस ) का पहलू नहीं होता है. अब आर्थिक और व्यापारिक संबंधों के अलावा भारत इन देशों के साथ आतंकवाद विरोधी मुद्दे और रक्षा के क्षेत्र जैसे मैदान में रिश्ते बढ़ा रहा है.''

राजीव डोगरा के मुताबिक़ दिलचस्प बात ये है कि ये एक दो तरफ़ा क़दम है. जितना भारत उनकी तरफ क़दम बढ़ा रहा है उतना अरब देश भी भारत के नज़दीक आ रहे हैं.

मीना सिंह रॉय कहती हैं, "हिंदुस्तान की अपनी पहचान और अहमियत बढ़ी है. आईटी क्षेत्र में हमारा नाम बहुत है. ये देश भी तेल और गैस के अलावा दूसरे क्षेत्रों में संबंध बढ़ाना चाहते हैं."

इमेज कॉपीरइट AFP

पश्चिम एशिया पॉलिसी का असर

इसके नतीजे में आज पाकिस्तान का पुराना दोस्त सऊदी अरब भारत से अधिक नज़दीक है. इस क्षेत्र में पाकिस्तान का दूसरा बड़ा करीबी देश जॉर्डन है. लेकिन किंग अब्दुल्लाह के दौरे से भारत की झोली में जॉर्डन के आने के आसार बढ़े हैं.

लेकिन एक छोटे से देश जॉर्डन से भारत का क्या फायदा होगा? राजीव डोगरा कहते हैं, ''बहुत! पहला ये कि इसराइल और फलस्तीनी इलाक़े के सटे जॉर्डन की भौगोलिक अहमियत है. दूसरे कि ये भारत की तरह जॉर्डन भी इसरायल और फ़लस्तीन दोनों से क़रीब हैं और तीसरा ये कि जॉर्डन की आबादी का एक काफ़ी बड़ा हिस्सा फ़लस्तीनी है जो भारत के हामी हैं."

मीना रॉय कहती हैं कि जॉर्डन को अलग से नहीं देखना चाहिए, "जॉर्डन के रिश्ते को भारत की पश्चिम एशिया पॉलिसी के परिपेक्ष्य में देखना चाहिए."

भारत की पश्चिम एशिया में बढ़ती लोकप्रियता की पॉलिसी में भी झलक होनी चाहिए. मीना रॉय के अनुसार इस पॉलिसी की दीर्घकालिक सफलता के लिए छोटे-छोटे क़दम उठाने पड़ेंगे. "जॉर्डन के साथ बढ़ते संबंध ऐसा ही एक छोटा क़दम है."

विशेषज्ञ इस बात पर राज़ी हैं कि अरब और खाड़ी देशों में भारत की अहमियत बढ़ी है और लोकप्रियता भी. इसका काफी हद तक श्रेय नरेंद्र मोदी को जाता है.

राजीव डोगरा कहते हैं कि भारत के इन देशों के साथ रिश्ते पहले से ही अच्छे थे जिसे स्थापित किया था जवाहर लाल नेहरू ने लेकिन वो ये स्वीकार करते हैं कि अब भारत और अरब देशों की दोस्ती एक नई दिशा ले चुकी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए