क्या प्रस्तावित क़ानून नीरव मोदी-माल्या जैसों को पकड़ पाएगा?

  • 2 मार्च 2018
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Image caption नीरव मोदी पर पीएनबी घोटाले में शामिल होने का आरोप है

नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और विजय माल्या. इन सभी में कुछ बातें सामान्य हैं, जैसे कि यह सब बड़े व्यापारी हैं, बैंकों के कर्ज़दार हैं और देश से फ़रार हैं.

कर्ज़ लेकर या धोखाधड़ी करके देश से बाहर चले जाने के बाद भी लोगों की संपत्ति भारत में ज्यों की त्यों बनी रहती है. अगर सरकार को उसको ज़ब्त करना हो या उसकी कुर्की करनी हो तो उसके लिए एक लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है.

इसी को ध्यान में रखते हुए गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक- 2018' को मंज़ूरी दी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर बताया कि पिछले कई महीनों से उनका मंत्रालय इसका मसौदा तैयार कर रहा था.

उन्होंने इसके कई प्रावधानों के बारे में विस्तार से बताते हुए एक मुख्य बिंदु की ओर ध्यान दिलाया.

जेटली ने कहा कि इस क़ानून के तहत 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक की धोखाधड़ी करने वाले भगोड़ों को रखा गया है.

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Image caption अरुण जेटली का कहना है कि यह बिल बेहद कारगर होगा

वित्त मंत्रालय के अनुसार इस विधेयक की कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • भगोड़ा घोषित किए गए व्यक्ति की संपत्ति को ज़ब्त करना.
  • धोखाधड़ी करके भागे व्यक्ति को विशेष न्यायालय द्वारा नोटिस जारी करना.
  • ऐसे अपराधी की बेनामी संपत्ति सहित भारत और विदेशों की दूसरी संपत्ति ज़ब्त करना.
  • भगोड़े शख़्स को किसी दीवानी दावे का बचाव करने से रोकना.
  • ज़ब्त की गई संपत्ति को संभालने और उसके निपटारे के लिए एक प्राधिकरण का गठन.

अब तक क्या थे प्रावधान?

बैंकों के साथ किसी शख़्स द्वारा धोखाधड़ी करने पर उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई के कई प्रावधान अभी भी हैं. इसके ज़रिए उस शख़्स की संपत्ति को ज़ब्त किया जा सकता है.

फिर इस क़ानून को लाने की क्या ज़रूरत पड़ी? इस सवाल पर वरिष्ठ आर्थिक विश्लेषक एम.के. वेणु कहते हैं, "अभी जो भी तरीके हैं, उनमें वक़्त लगता है. कोर्ट से आज्ञा लेनी होती है, इसके अलावा अगर तुरंत संपत्ति ज़ब्त करनी हो तो उसमें भी कई बाधाएं आती हैं."

वह आगे कहते हैं, "नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के देश से बाहर चले जाने के बाद सरकार दिखाना चाहती है कि एक क़ानून लाया जाए जिसे सब लोग एक निवारक के तौर पर देखें."

"वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी इस बिल के बारे में कहा कि अगर कोई बैंक से पैसा लेकर भागने की सोच रहा हो तो उसे अब सोचना पड़ेगा कि उसकी सारी संपत्ति सरकार अस्थाई रूप से ज़ब्त करके इस क़ानून के तहत उस पर कार्रवाई करेगी."

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Image caption भारत सरकार विजय माल्या को वापस लाने की कोशिशें कर रही है

कितना कारगर होगा बिल?

इसमें 100 करोड़ रुपये से ऊपर लेकर भागने वालों के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं ताकि बड़े लोगों को पकड़ा जाए.

इसमें एक और प्रावधान है कि किसी भगोड़े की विदेशी संपत्ति को भी सरकार क़ानून के दायरे में लाएगी.

दूसरे देश से संपत्ति लाना कितना आसान होगा? इस पर वेणु कहते हैं, "इसके तहते उस देश की सहमति की भी ज़रूरत होगी. यह अभी तक साफ़ नहीं है कि सरकार इसको किस तरह से लागू करेगी. दूसरे देशों में उसके अपने नियम चलते हैं. विजय माल्या और नीरव मोदी का मामला देखें तो उनकी काफ़ी संपत्तियां विदेशों में भी हैं. अगर यह क़ानून सरकार ले आती है तो उन संपत्तियों को सरकार कैसे ज़ब्त करेगी यह बड़ा प्रश्न है."

वित्त मंत्री अरुण जेटली कहते हैं कि इसके लिए उस देश के सहयोग की ज़रूरत है जिसके लिए वह आगे उन देशों से बात करेंगे.

इस विधेयक के ज़रिए यह कोशिश की जा रही है कि भगोड़े लोगों की भारत में जो संपत्तियां हैं उन्हें ज़ब्त कर लिया जाए और उस पर क़ानूनी कार्रवाई शुरू हो.

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Image caption भगोड़ों की विदेशी संपत्ति को ज़ब्त करने का भी प्रावधान

क्या यह क़ानून अभूतपूर्व है?

यह क़ानून क्या असाधारण है? इस सवाल पर वेणु का कहना है, "बिलकुल असाधारण है लेकिन कुछ लोग बोल रहे हैं कि इसका ग़लत इस्तेमाल भी हो सकता है. कल को अगर सत्ताधारी दल को कोई शख़्स पसंद न आए तो इसका उसके ख़िलाफ़ इस्तेमाल किया जा सकता है."

इन सबसे इतर सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस क़ानून की ज़रूरत क्यों आई?

इस पर वह कहते हैं, "इसकी वजह हमारे मौजूदा क़ानून और कार्रवाई को न ठीक से पालन करना और न ही ठीक से लागू करना है. जिस तरह विजय माल्या को बाहर जाने दिया, वो बड़ा सवाल है क्योंकि उनको लेकर ऑडिटर्स पहले से चेतावनी दे चुके थे."

"ख़ामियों को ढकने के लिए एक और क़ानून लाया जा रहा है. वित्त मंत्री जेटली कहते हैं कि आगे से कोई शख़्स देश से भागने से पहले सोचेगा लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि देश से भागने वाला शख़्स धीरे-धीरे अपनी संपत्तियों को विदेशों में स्थानांतरित कर दे."

इस विधेयक के अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय वित्तीय सूचना प्राधिकरण (एनएफ़आरए) की स्थापना को भी मंज़ूरी दी है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि नए कंपनी एक्ट के तहत इस प्राधिकरण को मंज़ूरी दी गई है जिसमें अध्यक्ष और कई सदस्य होंगे. उन्होंने बताया कि इस प्राधिकरण के पास कई वित्त और ऑडिट के अधिकार होंगे और यह कुछ वित्तीय मामलों में ही दख़ल देगा.

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