'होली है तो क्या हमारे साथ ज़बरदस्ती करोगे?'

  • 2 मार्च 2018
होली, लड़कियां, बदतमीज़ी
Image caption प्रदर्शन करतीं छात्राएं

दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज (एलएसआर) में पढ़ने वाली अविधा बहुत गुस्से में हैं. उनका कहना है कि किसी ने होली के बहाने उन पर सीमन (वीर्य) से भरा गुब्बारा फ़ेंका.

अविधा ने बीबीसी को बताया, "सोमवार की शाम तकरीबन आठ बजे होंगे. मैं बाज़ार जा रही थी तभी रिक्शे में बैठे किसी शख़्स ने मुझ पर गुब्बारा फेंका और मेरी टीशर्ट पूरी तरह भीग गई."

अविधा भागकर वापस कमरे पर आईं और उन्होंने देखा कि उनकी टीशर्ट पर सीमन जैसा सफ़ेद-पीले रंग का चिपचिपा दाग़ लगा है जिससे अजीब सी दुर्गन्ध आ रही थी.

'अजमेर दरगाह पर मेरे साथ यौन उत्पीड़न हुआ'

'मन नफ़रत से भर गया'

उन्होंने तुंरत कपड़े बदले टीशर्ट को बाथरूम के एक कोने में टांग दिया. उनका मन घिन और नफ़रत से भर गया.

उन्होंने कहा, "लोग पूछ रहे हैं कि मुझे कैसे पता कि वो सीमन था. मैं ये दावा नहीं करती कि वो सीमन ही था लेकिन मुझे ऐसा ही लगा. वैसे भी बात ये नहीं है कि ये सीमन था या नहीं, बात ये है कि कोई मुझ पर ज़बरदस्ती इस तरह कुछ भी क्यों फ़ेंकेगा?"

'चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी... मुझे सबकुछ देखना पड़ता था...'

'हद पार हो गई'

वो आगे पूछती हैं, "कोई बिना मर्ज़ी के मुझ पर पानी भी क्यों फ़ेंकेगा? कोई अंजान लड़का ऑफ़िस जाते वक़्त मुझ पर पानी डालकर क्यों भिगोएगा? किसने उसे ये हक़ दिया?"

अविधा इसी तरह गुस्से से एक-एक सवाल दागती हैं और उनके सवाल सोचने पर मज़बूर करते हैं.

'उसने मुझे 'किस' करना चाहा और फिर...'

Image caption प्रदर्शन में शामिल एक छात्रा

सवालों की झड़ी लगाने के बाद अविधा फिर बात शुरू की. उन्होंने कहा, "होली के नाम पर पूरे भारत में लड़कियों के साथ छेड़छाड़ और बदतमीज़ी होती है. मैं कोलकाता से हूं और वहां भी इस तरह की चीजें खूब देखी हैं लेकिन दिल्ली में तो हद पार हो गई है."

'बुरा न मानो होली है, ये बच्चों की टोली है'

होली के मौक़े पर रंग लगाने और मस्ती-मज़ाक के लिए अक्सर इसी लाइन का सहारा लिया जाता है लेकिन सवाल ये है कि आप होली के बहाने किसी के साथ कुछ भी करेंगे और वो बुरा नहीं मानेगा?

जब नेहरू ने जैकलीन केनेडी के साथ होली खेली

अविधा से पहले उन्हीं के कॉलेज की एक लड़की ने भी दिल्ली के अमर कॉलोनी में अपने साथ हुई इसी तरह की घटना का ज़िक्र इंस्टाग्राम पर किया था.

तोलिनो चिशी नाम की भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य असम की रहने वाली हैं और उनका कहना है कि उन पर सीमन से भरा गुब्बारा फेंका गया.

सोशल मीडिया में उनकी पोस्ट की खूब चर्चा हुई. बहुत से लोगों ने उनके साथ हुई बदतमीज़ी पर गुस्सा जताया तो कइयों ने इसे हिंदू परंपराओं को बदनाम करने की साज़िश का आरोप भी लगाया.

'होली पसंद है लेकिन ऐसे नहीं'

इन आरोपों के ज़वाब में ज़ोया कहती हैं, "मुझे होली बहुत पसंद है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि होली के बहाने कोई मेरे साथ कुछ भी करके चला जाए." ज़ोया डीयू के कमला नेहरू कॉलेज में पढ़ती हैं.

जब नवाब ने मुहर्रम के दिन होली मनाई

मल्लिका ने होली के मौके पर अपने साथ हुई एक घटना का ज़िक्र किया. उन्होंने बताया, "ये तब की बात है जब मैं स्कूल में पढ़ती थी. होली के दिन कुछ लड़के मेरे घर में घुस आए और उन्होंने मेरे चेहरे पर ज़बरदस्ती रंग मल दिया."

मल्लिका ने कहा कि वो इसे अब तक नहीं भूल पाई हैं और उनके मन में ऐसी हरकतों के ख़िलाफ़ बहुत गुस्सा भरा है.

एलएसआर में पढ़ने वाली एक दूसरी स्टूडेंट पूछती हैं, "अगर हम ये चाहते हैं कि कॉलेज से घर जाने तक के दौरान हमारे कपड़े ख़राब न हों तो क्या हम बहुत ज़्यादा मांग रहे हैं?"

गुरमेहर कौर को लगता है कि होली जैसे-जैसे क़रीब आती है, हर लड़की को ऐसा महसूस होता है कि उसके शरीर को निशाना बनाया जा रहा है.

'लड़कियां भी शामिल हैं'

शालू मिश्रा का मानना है कि सिर्फ लड़के या पुरुष ही ऐसा नहीं करते बल्कि महिलाएं भी इसमें शामिल हैं.

उन्होंने कहा, "मेरी दोस्त को एक 20-22 साल की लड़की ने गुब्बारा मारा. इसलिए ऐसा नहीं कह सकते कि ऐसा सिर्फ पुरुष ही कर रहे हैं. लोगों को ये समझना चाहिए कि हर कोई होली नहीं खेलना चाहता."

‘तेंदुलकर-धोनी को नहीं, लेकिन मुझे अनपढ़ कहते हैं’

क्या इस क़ानून के बाद कोई सेक्स वर्कर से शादी करेगा?

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए