जब जीत पर बोलते हुए अज़ान पर ठहर गए पीएम मोदी

  • 3 मार्च 2018
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त्रिपुरा और नगालैंड में बीजेपी गठबंधन की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं का संबोधित किया. उन्होंने इस जीत का श्रेय जनता, पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को दिया.

प्रधानमंत्री मोदी का जब भाषण शुरू हुआ था तभी अज़ान होने लगी तो उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश देते हुए दो मिनट चुप रहने को कहा. हालांकि, कुछ और मस्जिदों में अज़ान होने के कारण यह विराम दो मिनट से अधिक समय तक जारी रहा.

इसके बाद उन्होंने भाषण की शुरुआत 'भारत माता' का नारा लगाकर की.

प्रधानमंत्री से पहले पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपने भाषण में त्रिपुरा में मारे गए नौ कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजली दी थी. मोदी ने भी अपने भाषण में उन्हें याद किया. उन्होंने कहा कि अमित शाह ने जो बात कही वह उसे दोहराना चाहते हैं और यह जीत उन मारे गए कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजली है.

उन्होंने कहा, "बीजेपी के अनेक कार्यकर्ताओं ने शहादत दी है. राजनीतिक विचारधारा के कारण हमारे निर्दोष कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार दिया गया है. वामपंथी पार्टियों ने ज़ुल्म किया है. यह लोकतंत्र की ताकत है कि ग़रीब से ग़रीब, अनपढ़ से अनपढ़ मतदाता ने भी इस चोट का जवाब वोट से दिया है."

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि कार्यकर्ताओं को खोने की पीढ़ा जितनी उनकी पार्टी को है उतनी त्रिपुरा के लोगों को है. इसके बाद उन्होंने कार्यकर्ताओं के लिए दो मिनट का मौन रखने को कहा.

प्रधानमंत्री से पहले पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपना भाषण दिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि बीजेपी के नए मुख्यालय में यह पहला विजय उत्सव है. उन्होंने कहा कि जीत का रथ त्रिपुरा पहुंचा है, जो अब कर्नाटक जा रहा है. उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी की एक्ट ईस्ट पॉलिसी की विजय बताया है.

ईवीएम पर हर बार उठने वाले सवालों पर अमित शाह ने तंज़ कसा उन्होंने कहा कि इस बार पार्टियों के पास कोई बहाना नहीं बचा है क्योंकि चुनाव वीवीपीएटी मशीनों से हुआ था.

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वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कांग्रेस पर तंज़ कसा और कहा कि वह अब समाप्ति की ओर है. उन्होंने पुद्दुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी से मुलाकात का ज़िक्र करते हुए कहा कि वह कांग्रेस मुख्यमंत्रियों की भूतपूर्व की सूची में अब तक नहीं आए हैं.

साथ ही उन्होंने पंजाब की कांग्रेस सरकार का ज़िक्र करते हुए कहा कि दोनों ही एक-दूसरे को अपना नहीं मानते हैं. उन्होंने कार्यकर्ताओं को कहा कि वह आगाह रहें कि कांग्रेस की कार्यशैली उनमें न आ जाए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कल देश अनेक रंगों से रंगा हुआ था लेकिन आज सारे रंग केसरिया रंग में रंग गए हैं.

प्रधानमंत्री ने वास्तु-शास्त्र का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, "मैंने सुना है कि जो वास्तु शास्त्र के ज्ञाता होते हैं वो एक मान्यता रखते हैं कि इमारत के निर्माण में उत्तर-पूर्व का कौना सबसे महत्वपूर्ण होता है इसलिए सारा केंद्र उनका उत्तर-पूर्व में होता है. यानी के उत्तर-पूर्व ठीक हो गया तो सारी इमारत ठीक हो जाती है. मुझे खुशी है कि उत्तर-पूर्व देश की विकास यात्रा का नेतृत्व करने आया है."

उन्होंने कहा कि उनकी केंद्र सरकार को लेकर पूर्वोत्तर भारत के लोगों में विश्वास जागा है इसलिए उनको लोगों ने चुना है.

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Image caption मोहम्मद सलीम (बाएं) का मानना है कि त्रिपुरा का चुनाव कठिन था

वहीं, सीपीएम ने भी इन परिणामों पर अपनी बात रखी है. सीपीएम नेता मोहम्मद सलीम ने बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत में कहा कि शुरू से यह चुनाव कठिन था.

उन्होंने कहा, "लगातार 25 साल सरकार चलाना भी उपलब्धि है लेकिन जिस प्रकार चुनाव से पहले कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के नेता टूटकर बीजेपी में चले गए और वही जीतकर आए हैं तो यह बीजेपी की जीत नहीं है. बीजेपी का जो नारा था कि कांग्रेस मुक्त भारत वो त्रिपुरा में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस युक्त बीजेपी बना."

मोहम्मद सलीम ने कहा कि त्रिपुरा चुनाव में मास और मनी पावर का इस्तेमाल हुआ जो यहां के लिए नया था.

माणिक सरकार पर चुनाव की पूरी ज़िम्मेदारी के सवाल पर सलीम ने कहा कि वामपंथी पार्टी में एक व्यक्ति पर चुनावी ज़िम्मेदारी नहीं होती है और यह एक मीडिया का प्रचार था.

उन्होंने आगे कहा, "विकास के नाम पर अलग-अलग मॉडल है. शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर हम जो ख़र्च करते हैं वो परिणाम दिखाता है. त्रिपुरा शिक्षा के नाम पर बाकी राज्यों से कहीं आगे है. बीजेपी और मीडिया के कैंपेन से त्रिपुरा की चकाचौंध नहीं दिखी क्योंकि वो आदिवासी इलाका है. बेरोज़गारी बड़ा मुद्दा है लेकिन वह पूरे देश में है."

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