जो दल पकौड़ों में यकीन नहीं रखते वो साथ आएंगेः आजम खान

  • 5 मार्च 2018
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समाजवादी पार्टी के नेता आज़म ख़ान ने कहा है कि 2019 लोकसभा चुनाव के लिए ज़्यादा से ज़्यादा दलों को साथ आना चाहिए. ख़ासकर समान विचार वाले दलों को एक साथ होना ही चाहिए.

उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों के उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी के समाजवादी पार्टी उम्मीदवारों के समर्थन के ऐलान के बाद आज़म खान ने बीबीसी से कहा, "ये अच्छी बात है. ये पहल यहां न रुके बल्कि ये पहला कदम हो. हम मंज़िल तक पहुंचें."

हालांकि, पार्टी अधिकारियों के सीधे ऐलान के बाद रविवार को बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने साफ़ किया कि उन्होंने समाजवादी पार्टी के समर्थन की घोषणा नहीं की है बल्कि पार्टी समर्थकों से कहा है कि वो भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार के ख़िलाफ़ मजबूत उम्मीदवार का समर्थन करें.

मायावती ने कहा, "बीजेपी कैंडिडेट को जिस भी पार्टी का उम्मीदवार हराता नज़र आए, उसको आप अपना वोट दे दो ताकि बीजेपी का उम्मीदावार चुनाव हार जाए."

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बसपा ने नहीं उतारे उम्मीदवार

वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान की राय है कि मायावती ने भले ही सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी को समर्थन देने की बात नहीं की हो लेकिन ये साफ़ है कि उत्तर प्रदेश में हो रहे उपचुनाव में सबसे मजबूत समाजवादी पार्टी ही है.

बहुजन समाज पार्टी ने उपचुनाव में अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं.

आज़म ख़ान के मुताबिक उप चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी में कोई सहमति बनी है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है.

वो कहते हैं, "इस बारे में हमारी पार्टी में कोई ऐसी बात नहीं हुई है जिसमें मेरी शिरकत रही हो."

आज़म ख़ान एक दौर में बहुजन समाज पार्टी के साथ गठजोड़ पर सवाल उठाते रहे हैं लेकिन अब उनकी सोच बदलती दिखी.

उन्होंने कहा, "मैं हमेशा इस बात के पक्ष में रहा कि एक विचार वाले लोगों को तो साथ होना ही चाहिए. जो वाकई दबे- कुचलों की बात करते हैं. अगर वो ठगी नहीं करते, अगर वो पकौड़ों में यकीन नहीं रखते, अगर वो झूठ नहीं बोलते कि 20 लाख रुपया घर पहुंच जाएगा और दो करोड़ नौजवानों को नौकरी मिल जाएगी तो ज़रूर अच्छे नतीजे निकलेंगे. एक अच्छा हिंदुस्तान सामने आएगा."

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'वोटों को बांटकर मिट जाएंगे'

आज़म ख़ान ये दावा भी करते हैं कि बहुजन समाज पार्टी के अंदर से बने दबाव की वजह से ही मायावती ने दो लोकसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव में समाजवादी पार्टी को समर्थन देने का फ़ैसला लिया.

आज़म ख़ान ने कहा, "पिछले काफी दिनों से ख़ुद बीएसपी के नेताओं में बातचीत चल रही थी कि वो अपनी सुप्रीमो से बात करेंगे और उन्हें मनाने की कोशिश करेंगे कि इस तरह वोटों को बांटकर वे सिर्फ़ नुकसान में ही नहीं होंगे बल्कि मिट जाएंगे. हो सकता है कि ये उसका नतीजा हो."

उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच नए गठजोड़ की संभावना पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा और नगालैंड के चुनाव नतीजे आने के एक दिन बाद उभरी है.

त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटें हासिल कीं. नतीजों के ऐलान के बाद भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह ने दावा किया कि 'ये नतीजे आने वाले कर्नाटक और 2019 के चुनाव के परिणाम के परिचायक हैं'.

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लेकिन आज़म ख़ान इस दावे पर सवाल उठाते हैं.

वो कहते हैं, "देखिए पॉलिटिकल लोग उसे अपनी कामयाबी कहेंगे ही. लेकिन वो अभी मध्य प्रदेश में दो उपचुनाव हारे हैं. बीजेपी ने जो प्रदेश जीता है, वो एक ज़िले के बराबर है. उनका और विपक्ष का असल इम्तिहान मध्य प्रदेश और राजस्थान में होना है. जो ये जीतेगा, वही 2019 भी जीतेगा."

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