'त्रिपुरा के लोगों की चाहत पूरी करने की जिम्मेदारी बीजेपी पर'

  • 6 मार्च 2018
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त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दल इंडीजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के अध्यक्ष एनसी देबबर्मा ने कहा है कि त्रिपुरा के लोगों की चाहत के मुताबिक नया मुख्यमंत्री तय करने की जिम्मेदारी भारतीय जनता पार्टी पर है.

उनकी पार्टी नई सरकार में शामिल होने या नहीं होने का फ़ैसला मंगलवार को नितिन गडकरी और बीजेपी के दूसरे नेताओं से मीटिंग के बाद लेगी.

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में बीजेपी का आईपीएफटी के साथ गठबंधन था. बीजेपी ने 35 और आईपीएफटी ने आठ सीटें हासिल कीं.

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'वोटरों की मांग'

नई सरकार का चेहरा तय करने की कवायद के बीच सोमवार को ख़बर आई कि आईपीएफटी के नेता ने सार्वजनिक रूप से दावेदारी पेश की है कि मुख्यमंत्री उनकी पार्टी से होना चाहिए. उनकी पार्टी अलग राज्य की मांग भी उठा रही है.

लेकिन बीबीसी से बातचीत में देबबर्मा ने कहा कि ये मांग किसी एक राजनीतिक दल की नहीं है बल्कि बीजेपी गठबंधन को वोट देने वाले लोगों की है.

उन्होंने कहा, "ये हमारी मांग नहीं है. ये सारे त्रिपुरा के जनजातीय लोगों की मांग है जिन्होंने बीजेपी को वोट दिया और बहुत सारी एसटी सीट को जिताया. जनजातीय लोगों ने बीजेपी और आईपीएफटी गठबंधन के पक्ष में मतदान किया. जिससे वो सत्ता में आ सकें और सीपीएम को बाहर कर दिया."

देबबर्मा ने ये भी दावा किया कि चुनाव के पहले बीजेपी के साथ मुख्यमंत्री के मुद्दे पर उनकी पार्टी की कोई बात नहीं हुई थी.

उन्होंने कहा, " जब हम लोगों का गठबंधन हुआ, उस वक़्त ऐसी कोई शर्त नहीं रखी गई थी कि जनजातीय मुख्यमंत्री देना पड़ेगा."

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मीटिंग के बाद फ़ैसला

देबबर्मा ने बताया कि मंगलवार को बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अगरतला पहुंच रहे हैं. उनकी पार्टी उनसे बातचीत करेगी.

भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन में बने रहने और सरकार में शामिल होने के सवाल पर देबबर्मा ने कहा कि इस पर फ़ैसला मंगलवार को होने वाली मीटिंग के बाद ही होगा.

उन्होंने कहा, "बीजेपी मांग नहीं मानती है तो हम लोग क्या करेंगे, हमारा गठबंधन है, गठबंधन आगे कैसे जारी रखा जाए इस पर चर्चा करनी होगी.हम सरकार में शामिल होंगे या नहीं, ये फ़ैसला मीटिंग के बाद ही होगा."

उधर, त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी के प्रभारी सुनील देवधर ने बीबीसी संवाददाता सलमान रावी से कहा कि उन्हें देबबर्मा के बयान के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

सुनील देवधर ने ये भी कहा कि आईपीएफटी की अलग त्रिपुरालैंड की मांग भाजपा को बिलकुल स्वीकार नहीं है.

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