राम मंदिर पर श्री श्री क्यों कर रहे हैं ख़ून ख़राबे की बात?

  • 6 मार्च 2018
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'आर्ट ऑफ लिविंग' के श्री श्री रविशंकर इन दिनों अयोध्या विवाद को अदालत के बाहर सुलझाने की कोशिश में जुटे हैं.

राम मंदिर के मसले पर श्री श्री रविशंकर ने कहा है कि अगर अयोध्या विवाद नहीं सुलझा तो 'भारत में सीरिया जैसे हालात हो जाएंगे'.

श्री श्री रविशंकर ने ये बातें इंडिया टुडे और एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू के दौरान कहीं.

श्री श्री रविशंकर ने एनडीटीवी को बताया, ''अगर कोर्ट कहता है कि ये जगह बाबरी मस्जिद है तो क्या लोग इस बात को आसानी और खुशी से मान लेंगे? 500 सालों से मंदिर की लड़ाई लड़ रहे बहुसंख्यकों के लिए कड़वी गोली की तरह होगी. ऐसी स्थिति में खून ख़राबा भी हो सकता है.''

श्री श्री रविशंकर ने ये भी कहा, ''मुसलमानों को सद्भावना दिखाते हुए अयोध्या पर अपना दावा छोड़ देना चाहिए... अयोध्या मुसलमानों की आस्था की जगह नहीं है.

  • अगर कोर्ट मंदिर के पक्ष में फ़ैसला सुनाता है तो मुस्लिम हारा हुआ महसूस करेंगे. वो न्यायपालिका में अपनी यक़ीन खो सकते हैं. ऐसे में वो अतिवाद की तरफ बढ़ सकते हैं. हम शांति चाहते हैं.
  • इस्लाम में विवादित स्थल पर इबादत की इजाज़त नहीं है. भगवान राम किसी और जगह पर पैदा नहीं हो सकते.

श्री श्री रविशंकर के इस बयान पर बहस शुरू हो गई. कई लोगों ने उनके प्रस्ताव पर सवाल उठाए.

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Image caption फ़ाइल चित्र

बयान पर चर्चा

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्विटर पर सवाल किया, " क्या वो अपनी तरफ से बोल रहे हैं या फिर भारत सरकार और वीएचपी की ओर से."

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अख़बार अमर उजाला के मुताबिक, पूर्व सांसद डा. रामविलास वेदांती ने श्री श्री रविशंकर की कोशिशों पर सवाल उठाते हुए कहा, "आखिर वह होते कौन हैं अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की ठेकेदारी लेने वाले. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी अयोध्या में श्री श्री की दखलंदाजी नहीं चाहते."

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कब कब चर्चा में रहे श्री श्री रविशंकर?

क़रीब छह साल पहले मार्च के ही महीने में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर पाकिस्तान के दौरे पर थे.

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अपने एक आश्रम की शुरुआत के बाद उन्होंने बीबीसी से कहा कि वो 'तालिबान और दूसरे उग्रपंथियों से बात करने को तैयार हैं'.

एक लंबे साक्षात्कार के दौरान श्री श्री रविशंकर ने दावा किया, "मेरा पहले से मक़सद रहा कि किसी न किसी तरह से लोगों के बीच की दूरी को कम करें. अमन और सुकून की नई लहर लाएं."

हालांकि इस दिशा में उनकी कोशिशें क्या रहीं और उसके क्या नतीजे आए इसकी कोई प्रामाणिक जानकारी मौजूद नहीं है.

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श्री श्री के कार्यक्रम से पर्यावरण को नुकसान!

ये पहला मौका नहीं है जबकि श्री श्री रविशंकर विवाद में घिरे हों.

श्री श्री सबसे बड़े विवाद में तब घिरे थे, जब दिल्ली में यमुना किनारे आयोजित किए गए वर्ल्ड कल्चरल फ़ेस्टिवल पर राष्ट्रीय हरित ट्राइब्यूनल ने सवाल उठाए थे.

ट्राइब्यूनल ने श्री श्री की संस्था ऑर्ट ऑफ़ लिविंग पर यमुना को हुए नुकसान के लिए पांच करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था.

मार्च 2016 में हुए कार्यक्रम को एनजीटी ने शर्तों के साथ अनुमति दी थी. लेकिन श्री श्री की संस्था ने ये जुर्माना जमा नहीं कराया.

एनजीटी के विशेषज्ञों के पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि श्री श्री के कार्यक्रम की वजह से "पर्यावरण को इतना भारी नुकसान हुआ है कि उसकी भरपाई नहीं हो सकती."

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समलैंगिकता पर बयान से विवाद

श्री श्री रविशंकर के समलैंगिकता पर दिए गए बयान पर भी विवाद हुआ. उन्होंने कहा था कि समलैंगिकता एक प्रवृत्ति है और इसे बाद में बदला जा सकता है.

श्री श्री रविशंकर ने बीते साल अप्रैल में किसानों की ख़ुदक़ुशी पर अपनी राय देते हुए कहा कि किसान अध्यात्म की कमी की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं.

श्री श्री रविशंकर ने पाकिस्तान की छात्रा मलाला यूसुफ़ज़ई को शांति का नोबेल पुरस्कार दिए जाने पर सवाल उठाया था.

उन्होंने कहा कि मलाला यूसुफ़ज़ई ने ऐसा कुछ भी नहीं किया है जिसके लिए उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार दिया जाना चाहिए.

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'शांति दूत'

हालांकि, तमाम विवादों के बाद भी 62 बरस के श्री श्री रविशंकर "शांति दूत" की अपनी कथित छवि को पुष्ट करने की कोशिश में दिखते हैं.

आर्ट ऑफ लिविंग की वेबसाइट अपने संस्थापक श्री श्री रविशंकर का परिचय "मानवतावादी नेता, आध्यात्मिक गुरु और शांति के दूत" के तौर पर देती है.

वेबसाइट का दावा है , "श्री श्री ने पूरी दुनिया में संघर्ष के समाधान में अहम भूमिका अदा की है. इराक, आइवरी कोस्ट, कश्मीर और बिहार में विपक्षी दलों को बातचीत की मेज पर लाने का उन्हें श्रेय दिया जाता है. प्राकृतिक आपदाओं, चरमपंथी हमलों और युद्ध पीड़ितों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बच्चों को अपने कार्यक्रमों के ज़रिए मदद मुहैया कराते हैं. "

हालांकि इन दावों के प्रमाण के तौर पर ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है.

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बेवसाइट के मुताबिक "श्री श्री रविशंकर का जन्म साल 1956 में दक्षिण भारत में हुआ. चार साल की उम्र में ही वो भगवत गीता का पाठ करते थे और कई बार गहरे ध्यान में लीन हो जाते थे. साल 1973 में जब उनकी उम्र 17 साल थी, उन्होंने वैदिक साहित्य और भौतिकी शास्त्र में स्नातक की उपाधि हासिल की. श्री श्री का बनाया अंतरराष्ट्रीय संगठन 'द आट ऑफ लिविंग' 150 से ज्यादा देशों में अपने पाठ्यक्रम चलाता है."

हालांकि, फिलहाल अयोध्या को लेकर श्री श्री रविशंकर ने जो पहल शुरू की है, उससे समाधान के रास्ते कम और विवाद ज्यादा निकलते दिख रहे हैं.

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