माणिक सरकार के नए घर के बारे में जानते हैं आप?

  • 8 मार्च 2018
माणिक सरकार इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption सीपीएम माणिक सरकार को गुज़ारे के लिए भत्ता देती है

त्रिपुरा में ऐसे प्रावधान किए गए हैं जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्री को सरकारी आवास मिलता है. पीए मिलता है और वाई-श्रेणी की सुरक्षा उन्हें मुहैय्या कराई जाती है.

सिर्फ त्रिपुरा ही नहीं दूसरे राज्यों में पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए इसी तरह के प्रावधान किए गए हैं.

माणिक सरकार ने त्रिपुरा की झीलों वाली नगरी के रूप में जाने-जाने वाले उदयपुर में अपना पुश्तैनी मकान पहले ही पार्टी को दे दिया था.

उनके बारे में कहा जाता है कि जो तनख़्वाह बतौर मुख्यमंत्री उन्हें मिलती थी वो उसे पार्टी फंड में जमा कर देते थे और फिर पार्टी उन्हें गुज़र बसर के लिए भत्ता देती रही है. उनका गुज़ारा उनकी पत्नी को मिलने वाली पेंशन से भी चलता रहा है.

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Image caption अगरतला में सीपीएम का दसरथ देब स्मृति भवन है

त्रिपुरा में भले ही वाम दलों की हार हुई हो या फिर मार्क्सवादियों का सफ़ाया हो गया हो. वाम विचारों की आलोचना हो रही हो. मगर माणिक सरकार के व्यक्तित्व पर उनके प्रतिद्वंद्वी भी संभलकर ही उंगली उठाने का काम करते हैं.

इसीलिए तो भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री के रूप में जब बिप्लब देब के नाम की घोषणा हुई तो विधायक दल की बैठक के अगले दिन वो सीपीएम के दफ़्तर गए और माणिक सरकार के पैरों को छूकर उनका आशीर्वाद लिया.

बिप्लब देब भी उदयपुर के ही रहने वाले हैं.

राजधानी अगरतला हो या उनका अपना शहर उदयपुर, माणिक सरकार के बारे में लोग बताते हैं कि अक्सर उन्हें लोग पैदल सब्ज़ी ख़रीदते हुए भी दिख जाया करते थे. उनकी पत्नी ने कभी पति को मिलने वाले सरकारी वाहन का भी इस्तेमाल नहीं किया. वो शिक्षक थीं और अपने स्कूल तक का सफ़र वो बस या ऑटोरिक्शा से तय करती थीं.

माणिक सरकार ने अपना सरकारी बंगला खाली कर दिया है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीएम के लोग बताते हैं कि उनके रहने के लिए पार्टी ऑफ़िस में ही एक कमरे का इंतज़ाम किया गया है.

पार्टी के एक नेता ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास से वो चंद कपड़े और किताबें लेकर निकले और सीधे पार्टी के दफ़्तर पहुंच गए.

हालांकि वो मीडिया से फ़िलहाल बात नहीं कर रहे हैं लेकिन उनकी पार्टी के लोगों का कहना है कि अगले कुछ महीनों तक उनका यही निवास स्थान होगा.

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Image caption माणिक सरकार बीबीसी संवाददाता सलमान रावी के साथ

सीपीएम कार्यालय के एक कमरे में बीबीसी से अनौपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने बताया की दिल्ली में होने वाली पार्टी कांग्रेस में वो शामिल होंगे. साथ ही उन्होंने त्रिपुरा की राजनीति और हालिया विधानसभा परिणामों पर बातचीत करने से इनक़ार किया.

काली चाय पीते हुए और झक सफ़ेद कुर्ता पहने बैठे माणिक सरकार के पास कार्यकर्ताओं के फ़ोन आ रहे थे और उन पर हमले की बात कही जा रही थी तो ख़ुद फ़ोन उठाते हुए वह कह रहे थे कि पुलिस में जाइये.

पार्टी के लोग कहते हैं कि विधायकों को मिलने वाले सरकारी आवास में भी शायद माणिक सरकार ना जाएं.

सीपीएम का दफ्तर अगरतला के मेलारमाठ के इलाक़े में है और इसे दसरथ देब स्मृति भवन के नाम से जाना जाता है.

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