दिल्ली हाईकोर्ट की चीफ़ जस्टिस को मिले सरकारी सम्मान पर सवाल

  • 8 मार्च 2018
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Image caption जस्टिस गीता मित्तल ने पिछले साल अप्रैल में दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाला था

दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल को केंद्र सरकार की ओर से दिया गया नारी शक्ति पुरस्कार विवाद का विषय बन सकता है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, महिलाओं को मिलने वाला यह भारत का सर्वोच्च सम्मान है जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए गए कामों के लिए विश्व महिला दिवस पर दिया जाता है.

इसको लेकर विवाद इसलिए बन सकता है क्योंकि वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कई ट्वीट कर जस्टिस मित्तल को पुरस्कार दिए जाने पर सवाल खड़े किए हैं.

इंदिरा जयसिंह ने एक वेबसाइट की ख़बर ट्वीट करते हुए लिखा, "कार्यरत जजों ने सरकार से पुरस्कार स्वीकार किए? कभी नहीं, मुझे आशा है कि उनमें इसे ख़ारिज करने की ताक़त है."

हालांकि, जस्टिस मित्तल ने यह पुरस्कार स्वीकार कर लिया है. गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें यह पुरस्कार दिया. महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने उन्हें पुरस्कार दिए जाने की तस्वीर को ट्वीट किया.

न्यायाधीश द्वारा पुरस्कार स्वीकार करने पर सवाल आख़िर क्यों खड़े हो रहे हैं? दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि शायद ऐसा पहली बार है कि किसी कार्यरत न्यायाधीश को यह पुरस्कार दिया गया है.

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इंदिरा ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करते हुए अगला ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, "बहुत से तरीके हैं जिनके ज़रिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नष्ट किया जा सकता है, जिनमें से किसी कार्यरत जज को सम्मान दिया जा सकता है, खासकर महिला को."

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इसको लाभ के पद के मामले पर भी देखा जा सकता है. हालांकि, न्यायपालिका की आचार संहिता किसी जज को पुरस्कार लेने से नहीं रोकता है.

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह यहीं नहीं रुकीं. उन्होंने अगला ट्वीट करके जस्टिस गीता मित्तल को सरकारी मामलों की सुनवाई से ख़ुद को अलग रखने को कहा और साथ ही उन्होंने पुरस्कार वापस करने के लिए हैशटैग #awardWapsiKaro चलाया.

इंदिरा जयसिंह के अलावा वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी इस पर सवाल उठाए. उन्होंने ट्वीट किया, "सरकार के लिए पूरी तरह अनुचित है कि वह कार्यरत जजों को पुरस्कार दें. इस तरह की प्रथा न्यायपालिका की स्वतंत्रता को प्रभावित करेगी. आशा है कि कार्यकरी मुख्य न्यायाधीश इसे ख़ारिज करेंगी."

वहीं, आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता कपिल मिश्रा ने आशा मित्तल पर सवाल उठाने को आम आदमी पार्टी सोशल मीडिया टीम का कैंपेन बताया है. उन्होंने ट्वीट किया, "मुख्य न्यायाधीश के ख़िलाफ़ आप सोशल मीडिया टीम ने ट्विटर पर गंदा अभियान शुरू किया है. यहां तक आप सरकार से आधिकारिक तौर पर पैसे लेने वाले वकील भी मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल के ख़िलाफ़ ट्वीट कर रहे हैं."

पिछले साल अप्रैल में जस्टिस जी. रोहिणी के रिटायर होने के बाद जस्टिस मित्तल ने दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाला था. उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के कामकाज में कई बदलावों की शुरुआत की थी.

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