#HerChoice: मैं लेस्बियन हूं और मेरी मां ये जानती हैं

  • 11 मार्च 2018
मैं लेस्बियन हूं

तुम्हें ये बता दूं कि जितनी बार मेरी नज़र मेज पर रखी तुम्हारी तस्वीर पर पड़ती है, मैं तुमसे इश्क़ कर बैठती हूं.

मुझे अपनी ज़िंदगी यूं ही तुमसे इश्क़ करते हुए बितानी है. ज़ाहिरा के नाम लिखी ये मेरी आख़िरी चिट्ठी थी.

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#HerChoice 12 भारतीय महिलाओं के वास्तविक जीवन की कहानियों पर आधारित बीबीसी की विशेष सिरीज़ है. ये कहानियां 'आधुनिक भारतीय महिला' के विचार और उके सामने मौजूद विकल्प, उकी आकांक्षाओं, उकी प्राथमिकताओं और उकी इच्छाओं को पेश करती हैं.

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मैं उससे मेडिकल कॉलेज में मिली थी और वहीं हम दोस्त बने थे. समय के साथ ये दोस्ती कब प्यार में बदल गई पता ही नहीं चला.

मैंने उसे बता दिया था कि मुझे लड़के नहीं, लड़कियां पसंद हैं. ज़ाहिरा ने मेरी बात को बड़ी संजीदगी से समझा. हम अच्छे दोस्त बने रहे.

एक दिन मैं ज़ाहिरा के बॉयफ़्रेंड से मिली. हॉस्टल आकर मैं बहुत रोई.

ऐसा नहीं है कि मैंने लड़कों को डेट करने की कोशिश नहीं की.

एक लड़के के साथ मेरा रिश्ता भी रहा और शायद उसी के बाद मुझे एहसास हो गया कि मैं किसी पुरुष से कभी भावनात्मक या शारीरिक तौर पर नहीं जुड़ पाऊंगी.

मां को पता नहीं कैसे ये पता चल गया. मुझसे तो कुछ कहा लेकिन एक दिन अचानक शादी की बातें करने लगीं.

मैंने मां की खुशी के लिए शादी करने का मन बना भी लिया था पर फिर मुझे लगा कि मैं अपने साथ ग़लत कर रही हूं.

इसलिए मैंने उनसे साफ़ कह दिया कि मैं किसी भी लड़के से शादी नहीं कर सकती. आज मैं 26 साल की हूं.

लड़कों में मेरी दिलचस्पी हो, मां इसके लिए नित नए उपाय ढ़ूंढती रहती हैं.

पापा को अभी तक मेरे सेक्शुअल ओरिएंटेशन के बारे में नहीं पता. आने वाले वक़्त में वो भी मुझ पर शादी का दबाव डालने लगेंगे.

मगर मैंने फ़ैसला कर लिया है. मुझे अपनी सेक्शुएलिटी पर गर्व है.

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(हमारी सिरीज़ #HerChoice में बहुत सी पाठिकाओं ने कहा कि वे अपनी कहानियां शेयर करना चाहती हैं. उस कड़ी में यह कहानी दिल्ली की एक डॉक्टर की है. इसे हमें प्रेरणा ने भेजा है)

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