त्रिपुरा में अब कंकाल पर राजनीति, देवधर ने उखाड़ा गड़ा मुर्दा

  • 10 मार्च 2018
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भाजपा के त्रिपुरा प्रभारी सुनील देवधर के एक ट्वीट से विवाद हो सकता है.

शनिवार दोपहर किए ट्वीट में सुनील देवधर ने कहा, "मैं त्रिपुरा के नए मुख्यमंत्री बिप्लब देब से गुज़ारिश करता हूं कि वो मंत्रियों के दाख़िल होने से पहले सभी मंत्रियों के सरकारी क्वार्टरों के सेप्टिक टैंकों की सफ़ाई करवाएं."

देवधर ने कहा, "ये याद किया जाना चाहिए कि पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार के क्वार्टर के सैप्टिक टैंक से एक महिला का कंकाल 4 जनवरी 2005 को मिला था लेकिन ये मामला जानबूझकर दबा दिया गया था."

2004 में माणिक सरकार के सरकारी क्वार्टर के सैप्टिक टैंक से जब कंकाल निकलने का मामला सामने आया था तब उन्होंने पूरे विवाद से ख़ुद को दूर करते हुए सीबीआई जांच की सिफ़ारिश कर दी थी लेकिन सीबीआई ने जांच लेने से इनकार कर दिया था.

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Image caption भारतीय जनता पार्टी ने त्रिपुरा में पच्चीस साल से सत्ता पर काबिज़ रही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) को हराया है

साल 2005 में कंकाल मिलने के बाद उस समय त्रिपुरा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता समीर रंजन बरमन ने आरोप लगाया था कि लड़की की बलात्कार के बाद हत्या की गई थी और उसके परिजनों को त्रिपुरा छोड़ने पर मजबूर किया गया था. वामपंथी सरकार ने इन आरोपों की जांच नहीं करवाई थी.

सुनील देवधर के इस ट्वीट ने त्रिपुरा की राजनीति के गड़े मुर्दे उखाड़ने की कोशिश की है.

बीबीसी से बातचीत में सुनील देवधर ने कहा है कि अब उनकी सरकार कंकाल मिलने की इस घटना की पूरी जांच करवाएगी और इसके पीछे जो भी लोग हैं उन्हें सज़ा दिलवाएगी.

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देवधर ने कहा, "जिन भी लोगों ने पहले अपराध किए हैं अब उन्हें सज़ा दिलवाने का काम भी किया जाएगा."

जब देवधर से पूछा गया कि विकास के नाम पर चुनाव लड़ने वाली उनकी पार्टी क्या जीतते ही पार्टी पॉलिटिक्स को ज़्यादा तरज़ीह नहीं दे रही है तो उन्होंने कहा, "विकास हमारा एजेंडा है लेकिन अपराधियों को सज़ा दिलवाना भी हमारी प्राथमिकता है."

वहीं भाकपा (मार्क्सवादी) के विधायक और पूर्ववर्ती सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे बादल चौधरी ने बीबीसी से कहा, "कंकाल मिलने की उस घटना की पुलिस जांच हो चुकी है."

चौधरी ने कहा, "आरएसएस त्रिपुरा में अपना फासीवादी एजेंडा लागू कर रही है और ये सब उसी के तहत किया जा रहा है."

उन्होंने कहा, "आरएसएस और भाजपा का ध्यान सरकार चलाने से ज़्यादा अपने वैचारिक एजेंडे को बढ़ावा देने पर है और वो यहां की आबादी को धार्मिक आधार पर बदलना चाहते हैं."

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Image caption अगरतला में सीपीएम का दसरथ देब स्मृति भवन है. माणिक सरकार अब इसी भवन के एक कमरे में अपनी पत्नी के साथ रहेंगे

भारतीय जनता पार्टी ने सुनील देवधर के नेतृत्व में ही त्रिपुरा में वामपंथी किला फ़तह करते हुए ऐतिहासिक जीत हासिल की है.

त्रिपुरा में पिछले 25 सालों से भाकपा (मार्क्सवादी) की ही सरकार थी और माणिक सरकार बीस साल तक लगातार मुख्यमंत्री रहे.

वहीं माणिक सरकार इस बंगले के पास ही स्थित अपनी पार्टी के दफ़्तर में बने एक कमरे में अपनी पत्नी के साथ रह रहे हैं.

जीत के बाद हिंसा

भाजपा की जीत के बाद त्रिपुरा में कई दिन तक हिंसा होती. सीपीआई (एम) और भाजपा दोनों पार्टियों ने एक दूसरे के कार्यकर्ताओं पर हमले करने के आरोप लगाए हैं.

सुनील देवधर कहते हैं, "बीते तीन दिनों से त्रिपुरा में छुटपुट हिंसा की भी कोई घटना नहीं हुई है. अब हालात बिलकुल शांतिपूर्ण है और जो लोग हिंसा में शामिल रहे हैं उन पर भी कार्रवाई की जाएगी."

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