...तो क्या महिलाएं पुरुषों से बेहतर ड्राइवर हैं?

  • 16 मार्च 2018
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इस कहानी में ये शीर्षक जैसे ही मैंने भरे और न्यूज़ रूम में कहा, मुझसे पूछे जाने वाले सवालों की झड़ी लग गई.

एक पुरुष साथी ने कहा, "ऐसा कैसे हो सकता है? लड़कियां बिना इंडिकेटर के कई बार खटाक से लेन बदल देती हैं."

दूसरे पुरुष साथी का कहना था, "ये तभी सच हो सकता है जब महिलाओं को पार्किंग के लिए न कहा जाए."

तीसरे साथी ने दोनों की हां में हां मिलाते हुए कहा, "मैंने जब भी ड्राइव करते हुए अचानक ब्रेक लगाया है, तो 100 में 95 बार मेरे आगे गाड़ी चलाने वाली महिला की ग़लती रही है."

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महिलाओं की ड्राइविंग को लेकर जब भी चर्चा हो वहां इस तरह के कमेंट आम हैं. लेकिन दिल्ली ट्रैफिक पुलिस द्वारा 2017 में हुए कुल ट्रैफिक चालान के आंकड़े अलग ही कहानी कहते हैं.

इन आंकड़ों के मुताबिक जैसा पुरुष सोचते हैं महिलाएं उतना ख़राब गाड़ी नहीं चलातीं. दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक नियमों का तोड़ने के लिए पिछले साल 26 लाख लोगों का चालान काटा था.

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इन आकड़ों के मुताबिक महिलाएं गाड़ी चलाते वक्त पुरुषों के मुकाबले कम ग़लतियां करती हैं.

दिल्ली पुलिस की जॉइंट कमिश्नर (ट्रैफिक) गरिमा भटनागर कि मानें तो महिलाएं ड्राइविंग के नियमों का ज़्यादा बेहतर तरीके से पालन करती हैं, मोड़ और क्रासिंग पर भी ख़ास सावधान रहती हैं.

दिल्ली पुलिस के आकड़ों के मुताबिक 2017 में:

  • ट्रैफिक पुलिस ने लगभग 26 लाख लोगों के चालान किए हैं. जिसमें केवल 600 महिलाएं हैं.
  • 600 में से 517 महिलाओं का चालान तेज़ रफ़्तार गाड़ी चलाने की वजह से हुआ.
  • 44 महिलाओं का चालान ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने की वजह से हुआ.
  • लेकिन एक भी महिला ड्राइवर का चालान नशे में गाड़ी चलाने के मामले में नहीं हुआ.
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महिलाओं द्वारा गाड़ी चलाते हुए मोबाइल पर बात करना, गाड़ी चलाने के दौरान हुए हादसे, गाड़ी ओवरटेक करने के मामले इन सबके आंकड़े इसमें शामिल नहीं है.

हालांकि गरिमा भटनागर के मुताबिक, इन आंकड़ों से एक बात निकल कर आती है कि महिलाएं ज़्यादा सावधानी से गाड़ी चलाती हैं.

तो क्या महिलाएं पुरुषों के मुक़ाबले बेहतर ड्राइवर होती हैं?

इस सवाल के जवाब में गरिमा कहती हैं, "इन आंकड़ों से सीधे सीधे ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. ये आंकड़े केवल दिल्ली के उन इलाक़ों के हैं, जहां दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के जवान खड़े होते हैं. लेकिन कई जगह महिलाएं ड्राइविंग में ग़लती करने के बाद भी नहीं पकड़ी जाती. इसलिए ये आंकड़े पूरी तस्वीर बयां नहीं करते."

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कितनी महिलाएं गाड़ी चलाती हैं?

महिलाएं कैसी गाड़ी चलाती हैं ये जानने के लिए इसे भी जानना ज़रूरी है कि सड़क पर कितनी महिलाएं गाड़ी के साथ उतरती हैं. दिल्ली ट्रांसपोर्ट विभाग के आंकड़ों की मानें तो दिल्ली में 75 पुरुषों पर एक महिला ड्राइवर हैं, जिनके पास गाड़ी चलाने का लाइसेंस है.

दिल्ली में सिर्फ 11 फ़ीसदी महिलाओं के नाम गाड़ी रजिस्टर हैं. ये दोनों आंकड़े अपने आप में ये बताने के लिए काफ़ी हैं कि सड़क पर गाड़ी लेकर निकलने वाली महिलाओं की तादाद पुरुषों के मुक़ाबले कम है.

इसलिए महिलाओं के नाम पर कटने वाले चालान भी कम हैं.

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गरिमा आगे कहती हैं, "इतना जरूर है कि महिलाओं के मुक़ाबले पुरुष ज़्यादा आक्रमक हो कर गाड़ी चलाते हैं. वो ज़्यादातर दो पहिया गाड़ी चलाते हैं, जिसमें ट्रैफिक नियमों को तोड़ने के मौके भी ज़्यादा होते हैं."

2018 में अब तक के आंकड़े भी इसी तर्ज पर हैं. हर साल महिलाएं ट्रैफिक नियम कम तोड़ती हैं.

पूरी दुनिया में क्या है ट्रेंड ?

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के 2016 के आंकड़ों के मुताबिक 5 करोड़ लोग हर साल सड़क हादसों के शिकार होते हैं, इनमें 10 लाख लोगों की मौत हो जाती है. इसी रिपोर्ट में ये कहा गया है कि दुनिया में सबसे कम सड़क हादसे नॉर्वे में होते हैं. वहां सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या बहुत कम है.

2017 में नॉर्वे में हुए एक सर्वे में पाया गया है कि गाड़ी चलाते समय महिलाओं के मुकाबले पुरुष ड्राइवर का ध्यान ज़्यादा भटकता है.

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भारत में महिला टैक्सी ड्राइवर कम दिखती हैं. लेकिन गुड़गांव में यह परंपरा को बदल रही है.

नॉर्वे की संस्था ट्रांसपोर्ट इकोनॉमिक्स ने ये शोध 1100 लोगों पर किया.

एक दूसरा शोध ब्रिटेन के हाइड पार्क इलाके में हुआ है. हाइड पार्क चौराहा वहां का सबसे व्यस्तम चौराहा माना जाता है. वहां हुए एक सर्वे के मुताबिक महिलाएं ड्राइविंग में पुरुषों से कई मामले में बेहतर हैं.

ये सर्वे ड्राइविंग के तरीके जैसे- गाड़ी की स्पीड, इंडिकेटर का इस्तेमाल, स्टियरिंग कंट्रोल, गाड़ी चलाते समय फ़ोन पर बात करने जैसे पैमानों पर किया गया था. इस सर्वे में महिलाओं को 30 में 23.6 अंक मिले जबकि पुरुषों ने महज़ 19.8 अंक.

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