कैप्टन के 9 वादेः सत्ता तो मिली लेकिन वादे पूरे नहीं हुए

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Image caption कैप्टन अमरिंदर सिंह

अमरिंदर सिंह सरकार का एक साल पूरा हो गया है. एक दशक तक सत्ता में बनी अकाली-भाजपा सरकार और आम आदमी पार्टी को रोकने के लिए अमरिंदर सिंह ने दिल खोल कर वादे किए थे.

उन्होंने चार हफ़्तों में नशे से मुक्ति और किसानों का सारा कर्ज़ माफ़ करने जैसे वादों से सियासी और आर्थिक पंडितों को भी हैरान कर दिया था.

इसलिए सरकार के एक साल पूरा होने के साथ ही उनके उन वादों का लेखा जोखा होने लगा है. आइए देखते हैं कैप्टन अमरिंदर सिंह एक साल की अपनी सरकार में किन-किन वादों पर खरे उतरे हैं.

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1. किसानों की कर्ज़ा-कुर्की ख़त्म, फ़सल की पूरी रकम

कर्ज़ा-कुर्की ख़त्म, फसल की पूरी रकम का नारा लगाकर सत्ता में आई अमरिंदर सरकार ने न तो वादे के मुताबिक सभी किसानों का पूरा कर्ज़ा माफ़ किया और न ही प्रदेश में किसानों की कुर्की बंद हुई.

इसके विपरीत कर्ज़ के बोझ तले किसान प्रदेश में ख़ुदकुशी कर रहे हैं.

कैप्टन के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के एक साल के कार्यकाल में मीडिया में 420 किसानों के खुदकुशी करने की रिपोर्ट आई है.

सरकार बनने से पहले 90 हज़ार करोड़ रुपये का सारे किसानों के सभी प्रकार के कर्ज़ माफ़ करने के वादे किए गए थे लेकिन सरकार बनने के बाद केवल सहकारी बैंकों के दो लाख रुपये के कर्ज़ को माफ़ करने का ऐलान किया गया, जिसे आधार बना कर सरकार आगे बढ़ रही है.

यही कारण है कि कर्ज़ माफ़ी योजना सरकार की बदनामी का कारण बन रही है.

17 जनवरी को मुख्यमंत्री ने एक बार फिर ऐलान किया था कि 31 जनवरी तक एक लाख 60 हज़ार किसानों का सारा कर्ज़ माफ़ किया जाएगा इसे चार चरणों में पूरा किया जाएगा और इसके तहत 10 लाख 25 हज़ार किसानों को लाभ देने का दावा किया गया.

मुख्यमंत्री खुद स्वीकार कर चुके हैं कि चुनावी वादे के मुताबिक सभी किसानों का सारा कर्ज़ माफ़ करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं.

अब तक कर्ज़ माफ़ी के दो कार्यक्रम हो चुके हैं जिनमें सरकारी दावे के मुताबिक मानसा ज़िले में हुए पहले कार्यक्रम में 47 हज़ार और नकोदर (जालंधर) में हुए कार्यक्रम में 29 हज़ार किसानों के कर्ज़ माफ़ी के प्रमाणपत्र वितरित किए जा चुके हैं.

अब सरकार 50 हज़ार किसानों को लाभ देने के लिए तीसरा कार्यक्रम माझा क्षेत्र (गुरदासपुर, अमृतसर) में आयोजित करने जा रही है.

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2. घर घर नौकरी, हर घर नौकरी

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनावी घोषणा पत्र में पंजाब के हर घर से एक व्यक्ति को नौकरी देने का वादा किया था.

पार्टी का नारा था घर घर नौकरी. वादा किया गया था कि सरकार हर साल 1.61 लाख लोगों को नौकरियां देगी. यह भी कहा गया था कि जब तक नौकरी नहीं मिलती तब तक 2500 रुपये बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा.

इसके लिए सरकार ने अब तक पंजाब में दो रोजगार मेले लगाए हैं. पहले मेले का आयोजन 5 सितंबर 2017 को हुआ और मुख्यमंत्री ने कहा कि 21 हज़ार नौजवानों को नियुक्ति पत्र बांटे गए हैं जबकि दूसरे मेले के दौरान 9,500 नौकरियां दी गईं.

इन आंकड़ों को लिया जाए तो पंजाब सरकार ने अब तक करीब 30 हज़ार लोगों को ही नौकरियां दी हैं.

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3. 2500 रुपये बेरोजगारी भत्ता

जब तक युवाओं को नौकरी नहीं मिलती तब तक बेरोजगार नौजवानों को हर महीने 2,500 रुपये बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया गया था.

पंजाब में 18 लाख बेरोजगार नौजवान हैं. ये युवा पूछ रहे हैं कि हर साल दी जाने वाली डेढ़ लाख नौकरियां कहां गईं. ये पूछ रहे हैं कि नौकरियां नहीं तब तक 2500 रुपये बेरोजगारी भत्ता देने के वादे का क्या हुआ?

इसलिए घर-घर नौकरी वाला चुनावी वादा अब बदल कर घर-घर रोजगार और कारोबार हो गया है.

किसान नेता बूटा चकर के अनुसार साल भर बाद भी चुनावी वादे पूरे नहीं होने के कारण चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर प्रचलित नारा 'चाहता है पंजाब कैप्टन की सरकार' अब पलट कर 'रोता है पंजाब कैप्टन की सरकार' जुमले के साथ वायरल हो रहा है.

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4. नौजवानों को स्मार्टफ़ोन

चुनाव के दौरान स्मार्टफ़ोन देने का वादा करते हुए कांग्रेस ने युवाओं से फॉर्म भरवाए थे अब तक उनमें से किसी को भी फ़ोन नहीं मिला है. 2017 के बजट में पैसा रखने के बावजूद अब तक स्मार्टफ़ोन नहीं मिले.

सरकार के ख़िलाफ़ की जा रही पोल खोल रैलियों में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल कैप्टन के स्मार्टफ़ोन पर चुटकुले सुना रहे हैं. वो कह रहे हैं कि अकालियों की रैलियों में युवा इसलिए ज्यादा पहुंच रहे हैं क्योंकि कैप्टन के दिए गए स्मार्टफ़ोन पर अकाली जत्थेदार रैली में आने का मैसेज दे देते हैं.

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5. चार हफ़्ते में नशा ख़त्म

जालंधर के स्थानीय पत्रकार पाल सिंह नौली की रिपोर्ट के मुताबिक कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भटिंडा में प्रचार के दौरान हाथ में गटका साहिब उठा कर सरकार बनने पर चार हफ़्तों में नशा खत्म करने का वादा किया था, पर हकीकत यह है कि पंजाब में नशा बादस्तूर जारी है.

उनके कार्यकाल के दौरान विभिन्न जिलों में 16 युवाओं के नशे से मौत के मामले दर्ज किए गए हैं.

जानकार इस आंकड़े को काफी बड़ा मानते हैं क्योंकि ऐसे ज़्यादातर मामलों में पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं होती. पंजाब सरकार की नशे के ख़िलाफ़ मुहिम ठंडी पड़ चुकी है बस एक इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह को नौकरी से बर्खास्त करने के बाद ऐसा लग रहा है जैसे पंजाब में नशा खत्म हो गया हो.

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6. माफ़िया राज खत्म होगा

पंजाब कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र की शुरुआत में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार को माफ़िया की सरकार साबित करने की कोशिश की थी. इसमें पार्टी ने दावा किया था कि प्रदेश में लोकतांत्रिक नहीं बल्कि रेत माफ़िया, केबल माफ़िया, शराब माफ़िया, ड्रग्स माफ़िया औऱ ट्रांसोपर्ट माफ़िया का राज है. जिसे कांग्रेस सरकार बनने पर तुरंत खत्म किया जाएगा.

जानकारों के मुताबिक राज्य सरकार ने न कोई ठोस कार्यक्रम शुरू किया और न ही किसी बड़े सियासी नेता को गिरफ़्तार किया गया जिनपर कैप्टन अमरिंदर और बड़े कांग्रेसी माफ़िया को सरपरस्ती देने के आरोप लगाते थे.

सरकार के एक मंत्री को गैरक़ानूनी खनन में नाम आने के कारण इस्तीफा देना पड़ा.

कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री ने हेलिकॉप्टर में से सतलुज में खनन होते देखा. इसके बाद जालंधर और नवांशहर में कार्रवाई हुई.

ऐसी खबरें आईं कि एक पूर्व मंत्री और 11 कांग्रेसी विधायकों के नाम इससे जुड़ रहे हैं और मुख्यमंत्री को उन्हें समझाने के लिए बैठक बुलानी पड़ी. सिर्फ दो ज़िलों में ये हाल है तो पूरे पंजाब में गुंडा टैक्स कैसे वसूला जाता है इसकी तस्वीर खुद ही साफ़ हो जाती है.

पंजाब में केबल कारोबार भी पहले जैसा ही चल रहा है और शराब और ट्रांसपोर्ट के कारोबार में भी कहीं कोई अंतर नहीं दिख रहा. अगर कुछ बदला है तो ट्रांसपोर्ट माफ़िया खत्म करने के नाम पर ट्रांसपोर्ट यूनियनों पर पाबंदी लगा दी गई है.

दोआबा के युवा अकाली नेता जरनैल सिंह का इल्जाम है कि असल में कैप्टन ने माफ़िया के नाम पर पंजाब को बदनाम करके सत्ता हथियाई है.

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7. बेघर दलितों को घर

कैप्टन सरकार ने पंजाब में दलितों के सशक्तिकरण के लिए बेघरों को मकान, 50 हज़ार रुपये तक कर्ज़ माफ़ करने जैसे वादे किए थे जो जमीन पर पूरे होते नहीं दिख रहे हैं.

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पंजाब में कितना फैला है नशे का साम्राज्य

8. सरकारी कर्मचारियों का ख्याल

कर्मचारियों के नेता गुरविंदर सिंह ससकौर के अनुसार कैप्टन ने सत्ता में आने से पहले राज्य में ठेका भर्ती बंद करने, कर्मचारियों को रेगुलर करने, खाली पदों को भरने, बकाया भत्ते जारी करने के लिए महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने और छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के वादे किए थे.

गुरविंदर सिंह कहते हैं इनमें से एक भी वादा पूरा नहीं हुआ. कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों के बकाए की एक भी किस्त जारी नहीं की गई. और तो और शिक्षकों से अशैक्षिक काम न लेने जैसे वादे भी पूरे नहीं हो सके हैं.

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9. आटा दाल के साथ चीनी चाय

फ़तेहगढ़ साहिब से स्थानीय पत्रकार आरजेएस औजला को एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष चंद्र ने बताया कि एक साल के दौरान राज्य में सार्वजनिक कल्याण की सभी योजनाएं लगभग ठप हैं.

कप्तान ने अकाली-भाजपा सरकार की प्रतिष्ठित आटा दाल योजना के साथ चाय पत्ती और चीनी देने का वादा किया था. लेकिन अब तक केवल लोगों को केवल गेहूं ही मिल पा रहा है. इस योजना में दाल, चीनी और चायपत्ती अब तक नहीं मिली.

बुजुर्गों, विधवाओं और विकलांगों की पेंशन को 1500 रुपये करने का वादा किया गया था लेकिन पहले से मिल रहे 500 रुपये पेंशन भी लगातार नहीं मिल पा रही थी. हालांकि अभी कुछ दिन पहले ही पेंशन को 500 से बढ़ाकर 750 रुपये कर दिया गया है.

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