न खाऊंगा, न खाने दूंगा जैसे मोदी के वादे सिर्फ़ ड्रामेबाज़ी हैं: सोनिया गांधी

  • 17 मार्च 2018
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Image caption सोनिया ने मोदी सरकार पर कांग्रेसी योजनाओं को कमज़ोर करने का आरोप लगाया

दिल्ली में शनिवार को इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में हुए कांग्रेस के 84वें महाधिवेशन में पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने संबोधन में एक साथ कई मुद्दों पर अपनी बात रखी.

उन्होंने अपने आक्रामक भाषण से पार्टी में फिर से जान फूंकने की कोशिश की.

साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं को बलिदान के लिए तैयार रहने को कहा और इसके अलावा वह सीधे मोदी सरकार पर हमलावर रहीं.

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने नए अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं से बेहतर भारत बनाने की अपील की.

उन्होंने कहा, "कांग्रेस नए अध्यक्ष के नेतृत्व में वह पार्टी बने जो एक बार फिर हमारे देश का बुनियादी एजेंडा तय करे. कांग्रेस वह पार्टी बने जो एक बार फिर हमारे देश की विविधता भरे समाज की उम्मीदों और आकांक्षाओं की नुमाइंदगी करे. कांग्रेस वह पार्टी बने जो एक बार फिर देश की राजनीतिक और सार्वजनिक संवाद की सूत्रधार बने."

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'लोगों में कांग्रेस के लिए सद्भाव'

सोनिया गांधी ने कांग्रेस की मज़बूती के लिए कार्यकर्ताओं को सोचने को कहा.

उन्होंने कहा, "पार्टी की जीत देश की जीत होगी. हम सब की जीत होगी. कांग्रेस सिर्फ़ एक राजनीतिक दल नहीं बल्कि सोच है. कांग्रेस हमेशा से एक आंदोलन रही है. कांग्रेस हमारे राष्ट्रीय जीवन का 133 वर्षों में इसलिए अभिन्न अंग है क्योंकि इसमें लोगों को भारतीय संस्कृति की तस्वीर दिखाई देती है."

कांग्रेस के गिरते प्रदर्शन में तरक्की की उम्मीद बांधते हुए सोनिया ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का ज़िक्र किया.

उन्होंने कहा कि जिस तरह से इंदिरा के समय पार्टी ने प्रगति की थी, वैसी ही आशा है कि कुछ महीनों में कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का एक बार फिर ऐसा शानदार प्रदर्शन होगा जिससे देश की राजनीति को एक नई दिशा मिलेगी.

बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं. कांग्रेस मुक्त भारत को आधार बनाकर उन्होंने कहा कि गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में हुए चुनावों और उप-चुनावों के प्रदर्शन से पता लगता है कि जो लोग देश की राजनीति से कांग्रेस के अस्तित्व को मिटाना चाहते थे उन्हें यह अंदाज़ा नहीं था कि लोगों के दिलों में कांग्रेस के लिए अभी भी कितना गहरा सद्भाव है.

निजी जीवन की बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें परिस्थितियों ने सार्वजनिक जीवन में आने के लिए मजबूर किया जिसमें वह कभी नहीं आना चाहती थीं.

इसी के साथ ही मोदी सरकार को उन्होंने फ़रेबी सरकार बताया. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की योजनाएं कमज़ोर हैं, कांग्रेस ने देश को मनरेगा, सूचना का अधिकार और भोजन का अधिकार दिया. सोनिया ने कहा कि यह कांग्रेस पार्टी ही है जिसने राष्ट्र निर्माण में सबसे अधिक योगदान दिया है.

उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यक्रमों को मोदी सरकार कमज़ोर और नज़रअंदाज़ कर रही है.

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'विपक्ष के ख़िलाफ़ साज़िश'

सोनिया ने कहा, "पिछले चार साल में कांग्रेस को कमज़ोर करने के लिए साम, दाम, दंड भेद का खुला खेल खेला गया. सत्ता के अहंकार के आगे न तो कांग्रेस झुकी है, न तो कभी झुकेगी."

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की तानाशाही तौर-तरीकों, संविधान की उपेक्षा, संसद का अनादर, विभाजनकारी विचारधारा, विपक्ष के ख़िलाफ़ फ़र्ज़ी मुकदमे लगाना और मीडिया को सताने के षड्यंत्रों के खिलाफ कांग्रेस संघर्ष कर रही है.

प्रधानमंत्री और उनके मंत्रियों के दावों को सोनिया ने झूठा बताते हुए कहा कि वह उनके भ्रष्टाचारों का सबूतों के साथ ख़ुलासा कर रही हैं. उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री मोदी की 'न खाऊंगा, न खाने दूंगा' जैसे वादे सिर्फ़ ड्रामेबाज़ी और वोट हथियाने की चाल थी.

उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आगे कई चुनौतियां बताईं.

उन्होंने कहा, "हमें एक ऐसा भारत बनाना है जो सत्ता की मनमानी से मुक्त हो जिसमें नागरिकों की गरिमा बनी रहे. प्रतिशोध, अहंकार मुक्त भारत हो और इसके लिए हर कांग्रेसी को हर बलिदान देने के लिए तैयार रहना है. कांग्रेस के नए अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पूरे आत्मविश्वास के साथ ऐसा भारत बनाने के लिए हर क़ुर्बानी देंगे और कांग्रेस को कामयाबी की नई बुलंदियों पर लेकर जाएंगे."

सोनिया गांधी के भाषण से पहले पार्टी अध्यक्ष ने दिन में महाधिवेशन का उद्घाटन किया. उद्घाटन भाषण में उन्होंने परिवर्तन की बात की. उन्होंने कहा कि देश को सही रास्ता सिर्फ़ कांग्रेस पार्टी ही दिखा सकती है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी प्यार और भाईचारे का प्रयोग करती है जबकि सत्तारुढ़ दल नफ़रत की विचारधारा को मानता है.

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