सिद्धू भूल गए राहुल गांधी को क्या-क्या कहा था?

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पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू कुछ वक़्त पहले तक भारतीय जनता पार्टी में थे लेकिन अब कांग्रेस की शोभा बढ़ा रहे हैं.

वो अच्छा बोलते हैं और जानते हैं कि कब किसकी कैसे तारीफ़ करनी है.

दिल्ली में आयोजित कांग्रेस के 84वें अधिवेशन में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की चर्चा हुई लेकिन उन दोनों के साथ-साथ सिद्धू का ख़ास ज़िक्र हुआ.

सिद्धू ने अपने पिछले भाजपाई कुनबे पर व्यंग्य बाण चलाए और कांग्रेस के नेताओं की ख़ूब तारीफ़ की. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में कहा, ''वो सरदार भी हैं और असरदार भी हैं.''

बदल गए नवजोत

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''मैं सरदार मनमोहन सिंह से माफ़ी मांगना चाहता हूं और (उनके सामने) सिर झुकाता हूं. सरदार मनमोहन सिंह, आपकी चुप्पी ने वो कर दिखाया जो भाजपा का शोर नहीं कर सका.''

लेकिन सिद्धू ने मनमोहन सिंह के बारे में ऐसा क्या कहा था कि सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगने पड़ी? दरअसल, भाजपा में रहते हुए उन्होंने मनमोहन सिंह पर बड़े हमले किए थे.

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उन्होंने मनमोहन के बारे में कहा था, ''मजबूर आदमी ईमानदार नहीं हो सकता. मजबूर प्रधानमंत्री ईमानदार नहीं हो सकता. मुझे तो शक है कि सरदार भी है या नहीं.''

''सरदार होवे ना होवे, असरदार बिलकुल नहीं है. कहते हैं अर्थशास्त्री हैं, मैं कहता हूं व्यर्थशास्त्री है.''

मनमोहन की तारीफ़

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लेकिन रविवार को सिद्धू के सुर बदले हुए थे. उन्होंने कहा, ''सर, आपने चुप रहकर इस तरह काम किया है कि आपकी कामयाबी ने ख़ुद शोर मचाया. आप सरदार भी हो और असरदार भी हो.''

सिद्धू की इस बात पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह की तरफ़ देखकर मुस्कुराती नज़र आईं.

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और इस मुस्कुराहट को देखकर ऐसा लगा जैसे मनमोहन सिंह ने सिद्धू को उनके पिछले और पुराने बयानों के लिए माफ़ भी कर दिया है.

लेकिन क्या उन्हें सिर्फ़ मनमोहन से माफ़ी मांगनी चाहिए ? एक तस्वीर भी वायरल हुई जिसमें सिद्धू, सोनिया के पैर छू रहे हैं.

राहुल की आलोचना

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कांग्रेस अधिवेशन में सिद्धू ने कहा कि राहुल गांधी साल 2019 में लाल किले पर तिरंगा फहराएंगे. जो सिद्धू फिलहाल राहुल में प्रधानमंत्री बनने की संभावनाएं खोज रहे हैं, वो कभी उन्हें स्कूल जाने की सलाह दिया करते थे.

भाजपा के लिए चुनाव प्रचार करते हुए उन्होंने कई बार कांग्रेस नेता पर हमला बोला. एक बार सभा में उन्होंने कहा था, ''ऐ राहुल बाबा, स्कूल जाओ स्कूल. स्कूल में जाकर पढ़ना सीखो. राष्ट्रवाद और राष्ट्रद्रोह में फ़र्क़ सीखो.''

सिद्धू अब कांग्रेस की तारीफ़ कर रहे हैं लेकिन कभी जवाहरलाल नेहरू पर हमला करते थे. उन्होंने कहा था, ''साल 1945 में पंडित नेहरू ने कहा था कि दस साल में देश को शिक्षित कर देंगे. क्या हुआ? बाबाजी का ठुल्लू.''

''फिर इंदिरा गांधी आईं, उन्होंने कहा, गरीबी हटाओ. हुआ क्या? बाबाजी का ठुल्लू. और अब मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी आ गए और हुआ क्या, बाबाजी का ठुल्लू.''

कांग्रेस पर बदला रुख़

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''जो साठ साल आपको विश्वासघात करते रहे, उनका विश्वास कैसे करोगे. कांग्रेस, मुन्नी से ज़्यादा बदनाम है. अब तो ख़ुद मुन्नी भी इन पर शर्मिंदा है.''

सिद्धू भले अब कांग्रेस और उसके कार्यकर्ताओं में नई जान फूंकने की कोशिश कर रहे हो, कभी वो नरेंद्र मोदी के सामने उसे ज़रा भी तरजीह नहीं देते थे.

उन्होंने कहा था, ''कांग्रेस पर से विश्वास उठ गया है. कांग्रेस के साठ साल, मोदी साहब के दस साल. चंपा के दस फूल, चमेली की एक कली. मूर्ख की सारी रात, चतुर की एक कड़ी.''

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