बिहार से ग्राउंड रिपोर्ट: दरभंगा के 'नरेंद्र मोदी चौक' का पूरा मामला

  • 19 मार्च 2018
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बिहार के दरभंगा बस-स्टैंड से एनएच-77 पर पांच-छह किलोमीटर आगे बढ़ने पर बाईं ओर एक ग्रामीण सड़क लोआम की ओर उतरती है.

इसी सड़क पर करीब दस किलोमीटर आगे बढ़ने पर भदवा गांव में 'नरेंद्र मोदी चौक' आता है.

दरअसल ये कोई चौक नहीं है बल्कि सड़क किनारे एक निजी और बकौल पुलिस विवादित जमीन पर लगा एक बोर्ड है.

इस बोर्ड के साथ बांस के डंडे पर लगा भारतीय जनता पार्टी का झंडा भी है.

यह बोर्ड तेज नारायण यादव नाम के एक व्यक्ति ने लगाया है. वो खुद को भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ का कार्यकर्ता बताते हैं.

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Image caption तेज नारायण और उनकी पत्नी सुशीला देवी के साथ

चर्चा की वजह

इस बोर्ड के लगभग समानांतर तीन दुकानों के बोर्ड भी है. ये दुकानें तेज नारायण और उनके परिवार के लोग मिलकर चलाते हैं.

यहां पर 15 मार्च की रात को अज्ञात लोगों ने हमला कर तेज नारायण के पिता रामचंद्र यादव और भाई भोला यादव को गंभीर रूप से घायल कर दिया.

इस हमले में रामचंद्र यादव की मौत हो गई जबकि भोला यादव घायल हैं.

उन्हें रविवार अठारह मार्च को बेहतर इलाज के लिए दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से पटना स्थित बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल 'पीएमसीएच' रेफ़र कर दिया गया है.

यह घटना बीते दिनों सुर्खियों में इस कारण रही क्योंकि तेज नारायण और उनके घर वाले ये आरोप लगा रहे हैं कि नरेंद्र मोदी चौक का बोर्ड लगाने के बाद बीते करीब दो साल से जो विवाद चला आ रहा है, उसी के कारण ये हमला हुआ है. जबकि पुलिस इसे जमीन विवाद का मामला बता रही है.

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'मन की बात' से आगे बढ़ी बात

तेज नारायण बहुत दिनों तक हरियाणा में रोज़ी-रोज़गार के सिलसिले में रहे हैं. इसका असर उनके हिंदी बोलने के अंदाज पर भी दिखता है. हरियाणा में रहते ही वे भाजपा कार्यकर्ता बने.

वे बताते हैं, "रेडियो पर मन की बात सुनते थे. सबके मन में बैठ गया कि मोदी जी अच्छे व्यक्ति हैं. ये हमारे देश को आगे तक ले जाएंगे. उसके बाद 2016 के जनवरी में हमने चौक का नाम रखा."

वो आरोप लगाते हैं कि इस घटना के लिए पिलखवारा के वारिश मियां के लड़के और अनजान लोग जिम्मेदार हैं.

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Image caption तेज नारायण के परिवार की दुकानें

तेज नारायण ने बीबीसी को बताया, "पहला विवाद करीब रात के आठ बजे शुरू हुआ. दो बाइक पर तब पांच लोग आए थे. उनमें एक वारिश का लड़का था. आते ही वे बोले कि प्रधानमंत्री चौक किसने रखा भाई. वे मोदी जी का अपमान करने लगे तो मैंने उन्हें समझाने की कोशिश की."

"इस पर बाता-बाती हुई, तूतू-मैंमैं हुआ. हम लोग चारों भाई तब दुकान पर मौजूद थे. हम लोगों ने तब उन्हें खदेड़ दिया. इसके बाद वे दोबारा रात नौ बजे प्लान कर के आए और हमला किया. पहले उन्होंने दुकानों को आग लगाने की कोशिश की. लेकिन आवाज सुनकर पिताजी और भाई सामने आए तो उन्होंने दोनों पर हमला कर दिया."

तेज नारायण आगे बताते हैं, "दरअसल निशाने पर तो हम ही लोग थे. बोर्ड लगाने के बाद दुनिया हमारे जान के पीछे पड़ चुकी है. दो बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं. जिसमें मेरे भाई और पिताजी की जान जा चुकी है."

तेज नारायण के पिता रामचंद्र की हत्या इसी साल हुई है जबकि उनके एक अन्य भाई की हत्या दिसंबर 2016 में हुई थी.

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Image caption पिलाखवार गांव की एक दुकान

क्या कह रही है पुलिस?

घटना के बाद पुलिस ने तेज नारायण की पत्नी सुशीला देवी के बयान पर एफ़आईआर दर्ज की है जिसमें घटना की वजह जमीन विवाद बताया गया है.

लेकिन सुशीला देवी के मुताबिक उन्होंने भी पुलिस को घटना की वजह चौक के नाम से जुड़ा विवाद बताया था जिसे पुलिस ने दर्ज नहीं किया.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "मैं रो रही थी. मैंने बताया कि मोदी चौक के कारण झगड़ा हुआ है. पुलिस ने क्या नोट किया मुझे पता नहीं. इसके बाद उन्होंने मेरा अंगूठा का निशान लिया और चले गए."

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Image caption तेज नारायण की दुकान

घटना के बाद सोलह मार्च की रात दरभंगा एसएसपी सत्यवीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घटना की वजह जमीन विवाद बताया था.

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था, "भोला यादव ने वीडियो रिकॉर्डिंग में बयान दिया है कि उसका कमलेश यादव के साथ पूर्व में जमीन विवाद चल रहा था जिसमें हत्या का मुकदमा भी उसके विरुद्ध दर्ज कराया गया था. उनके (कमलेश यादव) द्वारा अज्ञात अपराधियों को भेजकर इसे अंजाम दिया गया. जहां तक बोर्ड को लेकर विवाद की बात बताई जा रही है तो वो कोई बहुत बड़ा विवाद नहीं है."

नरेंद्र मोदी चौक के कारण हत्या किए जाने का जो बयान परिवार वाले मीडिया को दे रहे हैं, पुलिस इसे किस नजर से देख रही है?

इस सवाल के जवाब में एसएसपी का कहना था, "इसकी भी जांच हमलोग कर रहे हैं, प्रथम दृष्टया ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है. बोर्ड जहां लगा था वहीं पर लगा है, उसमें कोई विवाद नहीं है."

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Image caption रामचंद्र यादव का श्राद्ध करते उनके परिजन

परिवार की छवि

इसी प्रेस क्रांफ्रेंस में एसएसपी ने आगे ये बातें भी कहीं थीं, "स्थानीय जांच में हमने पाया कि रास्ते से गुजरने वालों के साथ इनका लड़ाई-झगड़ा होता रहता था. गांव में सभी से इनकी दुश्मनी चल रही थी. कहीं-न-कहीं कोई व्यक्तिगत दुश्मनी रही होगी जिसके कारण लोगों ने षड़यंत्र करके ये घटना की है."

बीबीसी से बातचीत में भदवा गांव के कुछ लोगों ने भी एसएसपी की बातों से सहमति जताई.

गांव की एक महिला ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, "वो परिवार सभी के साथ जोर-जबरदस्ती करता है. जो रास्ता से जाता है उसके साथ मार-पीट करता है. औरतों के साथ भी छीन-छोर, मारपीट करता है."

भदवा गांव से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर पिलखवारा गांव है. इसी गांव के मोहम्मद वारिश हुसैन के बेटे पर घटना को अंजाम देने का आरोप तेज नारायण लगा रहे हैं.

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इस गांव और आस-पास के गांव वालों ने बताया कि इस 'चौक' की न तो इलाके में कोई बहुत चर्चा है और न ही उन्होंने ऐसा सुना है कि इस चौक के करण विवाद होते रहते हैं.

भदवा गांव के ठीक आगे अमडीहा चौक पर छोटा सा होटल चलाने वाले की विजय साह बताते हैं, "बीते दो सालों से ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ, ऐसी बात सामने नहीं आई कि मोदी चौक के कारण लगातार कोई विवाद या तनाव हो रहा है."

वहीं पिलखवारा गांव के मोहम्मद शमशुल होदा कहते हैं, "इस गांव में मोदी चौक को लेकर न कोई तनाव है और न ही उसको लेकर कोई चर्चा होती है. हकीकत तो यह है कि हम लोगों को मोदी चौक के बारे में अब जाकर पता चला है."

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Image caption मोहम्मद वारिश हुसैन की बेटी कैसर परवीन

क्या कहते हैं वारिश के परिजन

वहीं घटना के बाद वारिश के घर वाले परेशानियों का सामना कर रहे हैं. पहले तो वे बातचीत करने को तैयार नहीं हुए.

फिर कुछ रिश्तेदारों और गांव वालों के समझाने पर उन्होंने बीबीसी से बात की.

वारिश की बेटी कैसर परवीन बताती हैं, "उस दिन घर में सिर्फ अब्बा थे, भाई-वाई कोई नहीं था. हमें तो घटना के बारे में अगले दिन बारह बजे पता चला. बीते कुछ दिनों पहले ही मैं बूढ़े अब्बा का इलाज करा कर उन्हें पुणे से लेकर आई हूं. मेरे परिवार को फंसाया जा रहा है."

वे पुलिस पर परेशान करने का आरोप भी लगाती हैं, "दिन तो दिन पुलिस रात में भी आ रही है. एक रात में बाइस तो दूसरी रात आठ पुलिस वाले आए. पुलिस रात में आकर लेडीज सबको, हमारी बूढ़ी मां, भाभी को परेशान कर रही है. पुलिस कहती है मर्डर करने वाले अपने आदमी को बुलाओ. पुलिस धमकी देती है."

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Image caption जावेद आलम, जिन्हें पांच नवंबर, 2017 को तेज नारायण की दुकान पर कथित तौर पर पीटा गया था

हालांकि दरभंगा के एसएसपी सत्यवीर सिंह इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं.

वहीं कैसर परवीन ने एक दूसरी घटना के बारे में भी बताया, "बीते साल पांच नवंबर को मोदी चौक के पान दुकान पर विवाद हुआ था. मेरे भाई मोहम्मद जावेद आलम ने पान मांगा तो उसे पान नहीं दिया तो मार-पीट हुआ था. उन लोगों ने भाई को बहुत मारा. दरभंगा ले जाकर उसका प्लास्टर करवाना पड़ा. हमने केस भी दर्ज कराया. लेकिन पुलिस की ओर से अब तक कुछ नहीं किया गया है."

तेज नारायण यादव भी इस घटना को स्वीकार करते हैं लेकिन उनके मुताबिक उस दिन भी नरेंद्र मोदी को भला-बुरा कहने के कारण ही विवाद हुआ था.

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