प्रेस रिव्यू: प्रोफ़ेसर की अभद्र टिप्पणी के विरोध में टॉपलेस हुई छात्राएं

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दैनिक भास्कर के मुताबिक केरल के कोझिकोड स्थित एक कॉलेज के प्रोफ़ेसर की अभद्र टिप्पणी से लड़कियां इस कदर भड़क गईं कि दो लड़कियों ने फ़ेसबुक पर अपनी टॉपलेस तस्वीर शेयर कर दी.

हालाँकि फ़ेसबुक ने बाद में उन लड़कियों के अकाउंट को ब्लॉक कर दिया.

ख़बर के मुताबिक प्रोफ़ेसर जौहर मुनव्वर ने लड़कियों के पर अभद्र टिप्पणी करते हुए कहा था, "मैं एक कॉलेज का शिक्षक हूँ, जहाँ 80 फ़ीसदी लड़कियां हैं और उसमें से अधिकतर मुसलमान हैं. वो लड़कियां धार्मिक परंपरा के अनुसार कपड़े नहीं पहनती हैं. वो अपने ब्रेस्ट को हिजाब से नहीं ढकती हैं. सीना महिलाओं का ऐसा हिस्सा है, जो पुरुषों को आकर्षित करता है और इस्लाम इसे ढककर रखना सिखाता है."

सोमवार को कॉलेज की छात्राओं ने तरबूज मार्च भी निकाला और कॉलेज के मेन गेट पर प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.

एससी-एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ़्तारी नहीं

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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के ख़िलाफ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम- 1989 के दुरुपयोग को रोकने को लेकर महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी की है.

इसके तहत एक्ट में दर्ज अपराध में अब सरकारी कर्मचारी या अधिकारी की तत्काल गिरफ्तार नहीं होगी. गिरफ्तारी से पहले आरोपों की जांच ज़रूरी होगी और अग्रिम जमानत भी दी जा सकेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई अभियुक्त सरकारी कर्मचारी है, तो नियुक्त करने वाले स्तर के अधिकारी की लिखित अनुमति के बिना और यदि वह सरकारी कर्मचारी नहीं है तो ज़िले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की लिखित अनुमति के बिना गिरफ्तारी नहीं होगी. ऐसी अनुमतियों के लिए कारण दर्ज किए जाएंगे और गिरफ्तार व्यक्ति को संबंधित कोर्ट में पेश किया जाएगा.

व्यक्ति को हिरासत में तभी रखा जाना चाहिए, जब गिरफ्तारी के वाजिब कारण हों. कोर्ट ने कहा है कि यदि इन निर्देशों का उल्लंघन किया गया तो ये अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ अवमानना कार्रवाई के तहत होगी.

तो डॉक्टरों को होगी जेल

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक तपेदिक यानी टीबी के मरीज़ की जानकारी नहीं देने वाले डॉक्टरों और केमिस्ट को अब जेल हो सकती है.

खबर के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को एक अधिसूचना जारी की जिसमें कहा गया है कि अगर नोडल अधिकारी को इस बारे में सूचित नहीं किया गया तो छह महीने से लेकर दो साल तक की जेल हो सकती है.

भारत में साल 2012 में टीबी की सूचना देना अनिवार्य किया गया था, लेकिन तब इसमें किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान नहीं था.

जामिया को माइनॉरिटी का दर्जा नहीं

मोदी सरकार ने जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक स्टेटस देने का विरोध किया है. इंडियन एक्सप्रेस में छपी इस खबर के मुताबिक सरकार ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में 5 मार्च को नया हलफनामा दिया है.

सरकार का तर्क है कि इस संस्थान को संसद के कानून के तहत बनाया गया है और केंद्र से इसे आर्थिक मदद मिलती है. इसलिए इसे मिला माइनॉरिटी स्टेटस देना ग़लत है.

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