लिंचिंग मामले में बीजेपी नेता समेत 11 'गौ रक्षकों' को उम्र क़ैद

  • 21 मार्च 2018
झारखंड का रामगढ़ कोर्ट इमेज कॉपीरइट niraj sinha/BBC

झारखंड में रामगढ़ स्थित फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने एक युवक अलीमुद्दीन की हत्या (मॉब लिंचिंग) के मामले में 11 कथित गौ-रक्षकों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है.

इन लोगों ने 'गाय का मांस' ले जाने के शक में अलीमुद्दीन को पीट-पीट कर मार डाला था. इससे पहले 16 मार्च को इन अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया था.

जिन अभियुक्तों को ये सज़ा सुनाई गई है उनमें बीजेपी नेता नित्यानंद महतो के अलावा मुख्य अभियुक्त के तौर पर दोषी करार दिए गए दीपक मिश्रा, छोटू वर्मा और संतोष सिंह भी शामिल हैं.

फ़ैसले को लेकर रामगढ़ सिविल कोर्ट में दिनभर हलचल बनी रही. साथ ही प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे.

दिन के लगभग सवा तीन बजे सभी अभियुक्तों को ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश की अदालत में पेश किया गया जहां उन्हें सज़ा सुनाई गई.

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'जब निंदा हो रही थी, युवक की हत्या हो रही थी'

फ़ैसले के बाद अलीमुद्दीन की पत्नी ने कहा है कि आखिरकार कोर्ट से उन्हें इंसाफ़ मिला है. इस दिन का वे लोग इंतज़ार कर रहे थे.

ग़ौरतलब है कि पिछले साल 29 जून को हेसला निवासी अलीमुद्दीन सुबह दस बजे प्रतिबंधित मांस लेकर अपने मारुति वैन से चितरपुर की ओर जा रहे थे.

रामगढ़ स्थित बाजार टांड़ के पास अलीमुद्दीन को पकड़ा गया. भीड़ ने उनकी पिटाई की तथा वैन में आग लगा दी. बाद में इलाज के दौरान अलीमुद्दीन की मौत हो गई.

जिस दिन इस घटना को अंजाम दिया गया था उसी दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस तरह की हिंसाओं की निंदा भी कर रहे थे.

लिहाजा इस मामले में देश भर में सियासत भी गरमा गई थी.

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अपनी तरह का पहला मामला

इस मामले में कुल बारह अभियुक्त बनाए गए थे. एक आरोपी के नाबालिग होने की वजह से उसका मामला 'जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड' को भेजा गया है.

जानकार बता रहे हैं कि देश में यह अपनी तरह का पहला मामला है जहां कोर्ट ने 'गौ-रक्षकों' को हत्या का दोषी माना है.

इधर 22 सितंबर 2017 को इस मामले में आरोप तय किए गए थे, जबकि 5 मार्च को दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी हुई थी.

इससे पहले 1 सितंबर 2017 को अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आरोप पत्र दाखिल किया गया था. अभियोजन पक्ष की ओर से 19 गवाह प्रस्तुत किए गए थे.

इस बीच बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजीव अंबष्ठ ने कहा है कि वे लोग ऊपरी अदालत में बरी होने के लिए अपील करेंगे.

सरकारी लोक अभियोजक एसके शुक्ला ने कहा है कि कोर्ट ने अभियुक्तों के ख़िलाफ़ उम्र क़ैद की सज़ा के साथ धारा 147 के तहत एक साल की कठोर सज़ा भी सुनाई है. हालंकि दोनों सज़ाएं साथ चलेंगी.

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