प्रेस रिव्यू: उन आख़िरी पलों में क्या हुआ था जयललिता के साथ?

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'द हिंदू' की एक ख़बर के अनुसार शशिकला ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के आख़िरी पलों के बारे में जानकारी दी है.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि जयललिता की मौत के कारणों की जांच कर रहे जस्टिस अरुमुगस्वामी कमीशन के समक्ष दिए गए हलफनामे में शशिकला ने कहा है कि जयललिता को दिल के दौरा पड़ा था.

अख़बार के अनुसार शशिकला ने बताया है कि जयललिता टेलीविज़न पर धारावाहिक 'जय वीर हनुमान' की देख रही थीं और उन्होंने इससे पहले अपने लिए कॉफी और ब्रेड मंगवाया था.

धारावाहिक ख़त्म होने के बाद जयललिता ने टीवी बंद किया और इसके बाद उनके शरीर में कंपन हुआ और उन्होंने अपने दांत भींच लिए.

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शशिकला के अनुसार उन्होंने जयललिता को सहारा देकर बिस्तर पर लिटाया जिसके बाद डॉक्टर कमरे में आ गए और उन्हें ज़ोर ज़ोर से आवाज़ दे कर जयललिता को पुकारने के लिए कहा.

शशिकला के कई बार आवाज़ लगाई, "अक्का, अक्का..."

जयललिता ने शशिकला की ओर देखा और फिर आंखें बंद कर लीं. इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें कमरे से बाहर जाने के लिए कहा.

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गोल्ड कंपनी का 'घोटाला'

'दैनिक जागरण' में छपी एक ख़बर के अनुसार पीएनबी घोटाले के बाद अब चेन्नई की एक गोल्ड कंपनी का 824.15 करोड़ रुपये का बैंकिंग कर्ज घोटाला सामने आया है.

अख़बार के अनुसार ज्वैलरी कंपनी कनिष्क गोल्ड प्राइवेट कंपनी ने 14 सरकारी और गैर सरकारी बैंकों कर्ज लेने के लिए फर्जी दस्तावेज़ और बैंक स्टेटमेन्ट का इस्तेमाल किया. स्टेट बैंक की मांग पर इस मामले में एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है.

अख़बार कहता है कि हीरा व्यापारी नीरव मोदी ओर मेहुल चौकसी की तरह इस कंपनी के मालिक भूपेश कुमार जैन और उनकी पत्नी नीता जैन विदेश चले गए हैं और आशंका जताई जा रही है कि वो फिलहाल मॉरीशस में हैं.

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'हिंदुस्तान टाइम्स' में छपी एक ख़बर के अनुसार भारतीय विशिष्ट पहचान पत्र आधार के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के सामने छह सवाल रखे हैं.

कोर्ट ने सरकार से पूछा है - 1. क्या एकत्र की जा रही जानकारी का इस्तेमाल लोगों पर नज़र रखने के किया जाएगा?

2. क्या इससे किसी व्यक्ति की पहचान कर उसको परेशान किया जा सकता है?

3. जो आधार कार्ड नहीं रखना चाहते क्या सरकार उन पर अपनी योजनाएं लागू कर सकती है?

4. 2016 आधार कानून लागू करने से पहले जमा की गई जानकारी को नष्ट कर दिना चाहिए या नहीं?

5. जो जानकारी एकत्र की जा रही है वो कितनी सुरक्षित है?

6. क्या डेटा की सुरक्षा के लिए लिए गए कदमों से कुछ नुक़सान भी हो सकता है?

अख़बार के अनुसार सरकार की तरफ से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि आधार नंबर ना होने की सूरत में किसी व्यक्ति को सरकरी सुविधाओं से वंचित ना किया जाए.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर क अनुसार केके वेणुगोपाल ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आधार डेटा को 10 मीटर ऊंची और चार मीटर चौड़ी मज़बूत भेद्य दीवारों के बीच रखा गया है.

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रकम लौटाएं

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक अन्य ख़बर के अनुसार कोर्ट ने बुधवार को रियल एस्टेट कंपनी जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड से कहा है कि वो अप्रैल 15 तक 100 करोड़ रुपये और 10 मई तक और 100 करोड़ रुपये जमा करें.

अदालत का कहना है कि जो 2,800 लोग जेपी से घर नहीं खरीदना चाहते उन्हें उनके पैसे वापस देने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाएगा.

अख़बार के अनुसार अदालत का कहना है कि जो लोग कंपनी से घर खरीदना चाहते हैं वो ऐसा कर सकते हैं लेकिन जो लोग कंपनी के घरों में दिलचस्पी नहीं रखते कंपनी को उनके पैसों को अपने पास रखने का कोई हक नहीं.

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'आयुष्मान भारत' को मंजूरी

'अमर उजाला' में छपी एक ख़बर के अनुसार देश के 10 करोड़ परिवारों को सालाना पांच लाख का मेडिकल बीमा देने से संबंधित महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना को बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है.

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में योजना को मिशन मोड पर चलाने पर भी सहमति बनी है. योजना में केंद्र सरकार 60 फीसदी खर्च देगी जबकि 40 फासदी रकम राज्य सरकार खर्च करेगी.

अख़बार के अनुसार योजना के तहत आने वाले दो सालों में 10,500 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना समाहित होंगे.

अख़बार के अनुसार इस योजना की शुरूआत इस साल 15 अगस्त या गांधी जयंती के मौके पर किया जा सकता है.

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स्कूलों को निर्देश

स्कूल की फीस नहीं चुकाने पर प्रबंधन विद्यार्थी को परीक्षा देने और अंकसूची देने से मना नहीं कर सकता. 'नई दुनिया' में छपी एक ख़बर के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार इस संबंध में इसी सप्ताह निर्देश जारी कर सकती है.

अख़बार का कहना है कि ऐसा करने पर प्रबंधन के ख़िलाफ़ जुवेनाइल जस्टिस ऐक्ट 2015 यानी किशोर न्याय अधिकार अधिनियम के तहत कार्यवाई की जा सकेगी. ये निर्देश मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल सहित सीबीएसई-आईसीएसई बोर्ड से संबंद्ध स्कूलों पर लागू होंगे.

मानवाधिकार आयोग की सिफारिश पर शासन ऐसे मामलों में सख्ती बरतने की तैयारी कर रहा है. प्रताड़ना के आरोप के तहत दोषी पाए जाने पर स्कूल अधिकारियों को जेल और आर्थिक दंड देना पड़ सकता है.

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