कैसे होता है राज्यसभा के लिए सांसदों का चुनाव?

  • 23 मार्च 2018
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राज्यसभा की 58 सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान हो रहा है. सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक वोट डाले जाएंगे और देर शाम तक नतीजे भी आ जाएंगे.

राज्यसभा चुनाव के कद्दावर प्रत्याशी

सत्ताधारी पार्टी भाजपा ने 27 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. इनमें वित्त मंत्री अरुण जेटली, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, कृषि राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला और रसायन राज्यमंत्री मनसुख भाई मंडाविया के नाम प्रमुख हैं.

इसके अलावा अशोक वाजपेयी, विजय पाल सिंह तोमर, सकल दीप राजभर, अनिल जैन, हरनाथ सिंह यादव, जीवीएल नरसिम्हा राव, अनिल कुमार गर्ग आदि भी भाजपा प्रत्याशी हैं.

वहीं कांग्रेस की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी, एल हनुमंथइया, सईद नसीर हुसैन, जीसी चंद्रशेखर, कुमार केतकर समेत कई अन्य उम्मीदवार चुनाव में उतरे हैं.

तेंदुलकर 23 दिन आए राज्य सभा, रेखा 18

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Image caption अरुण जेटली

कि राज्य से कितनी सीटों पर चुनाव?

राज्यसभा में किस राज्य से कितने सांसद होंगे यह उस राज्य की जनसंख्या के हिसाब से तय किया जाता है.

राज्यसभा के सदस्‍य का चुनाव राज्‍य विधानसभा के चुने हुए विधायक करते हैं. प्रत्‍येक राज्‍य के प्रतिनिधियों की संख्‍या ज़्यादातर उसकी जनसंख्‍या पर निर्भर करती है.

इस प्रकार, उत्तर प्रदेश के राज्यसभा में 31 सदस्‍य हैं. जबकि अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड, मेघालय, गोवा, मिजोरम, सिक्‍किम, त्रिपुरा आदि छोटे राज्‍यों के केवल एक एक सदस्‍य हैं. लेकिन इसकी चुनावी प्रक्रिया बाकी सभी चुनावों से अलग होती है.

शुक्रवार को राज्यसभा के लिए हो रहे इस चुनाव की 58 सीटें 16 राज्यों से हैं. इसमें उत्तर प्रदेश की 10; बिहार और महाराष्ट्र की छह-छह; मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल की पांच-पांच; गुजरात और कर्नाटक की चार-चार; आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा और राजस्थान की तीन-तीन, झारखंड की दो, छत्तीसगढ़, हिमाचल, हरियाणा और उत्तराखंड की एक-एक सीट शामिल हैं.

इसके अलावा केरल की एक राज्यसभा सीट पर उपचुनाव होंगे. यहां से सांसद वीरेंद्र कुमार ने इस्तीफा दे दिया था, जिनका कार्यकाल अप्रैल 2022 तक था.

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राज्यसभा पहुंचने के लिए कितने वोट चाहिए?

एक उम्मीदवार को चुने जाने के लिए न्यूनतम मान्य वोट चाहिए होते हैं. वोटों की गिनती सीटों की संख्या पर निर्भर करता है.

इसे समझने के लिए उत्तर प्रदेश का उदाहरण लेते हैं. यहां विधायकों की कुल संख्या 403 है. अब प्रत्येक सदस्य को राज्यसभा पहुंचने के लिए कितने विधायकों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए इसे कैसे निकाला जाता है यह तय करने के लिए कुल विधायकों की संख्या को जितने सदस्य चुने जाने हैं उसमें एक जोड़कर विभाजित किया जाता है.

इस बार यहां से 10 राज्यसभा सदस्यों का चयन होना है. इसमें 1 जोड़ने से यह संख्या 11 होती है. अब कुल सदस्य 403 हैं तो उसे 11 से विभाजित करने पर 36.66 आता है. इसमें फिर 1 जोड़ने पर यह संख्या 37.66 हो जाती है. यानी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद बनने के लिए उम्मीदवार को 37 प्राथमिक वोटों की जरूरत होगी.

इसके अलावा वोट देने वाले प्रत्येक विधायक को यह भी बताना होता है कि उसकी पहली पसंद और दूसरी पसंद का उम्मीदवार कौन है. इससे वोट प्राथमिकता के आधार पर दिए जाते हैं. यदि उम्मीदवार को पहली प्राथमिकता का वोट मिल जाता है तो वो वह जीत जाता है नहीं तो इसके लिए चुनाव होता है.

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Image caption राजीव शुक्ला और सचिन तेंदुलकर का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है

राज्यसभा की मौजूदा गणित

राज्यसभा की कुल 245 सीटों में से से सर्वाधिक भाजपा (58) के पास हैं. इसके बाद सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस (54) है.

बात अगर केंद्र सरकार के सत्ता पक्ष की करें तो एनडीएन यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के 77 सदस्य हैं.

अन्य दलों में जेडीयू के 7, शिरोमणि अकाली दल और शिवसेना के 3-3 सदस्य, पीडीपी के 2 और चार अन्य दलों के एक-एक सदस्य हैं, जो एनडीए के घटक दल हैं.

राज्यसभा में विपक्ष (कांग्रेस) और अन्य दलों के पास कुल मिलाकर 168 सदस्य हैं.

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Image caption मनोनीत राज्यसभा सांसद रेखा का भी कार्यकाल समाप्त हो रहा है

राज्यसभा में कितने सांसद?

भारतीय संसद में दो सदन हैं, लोकसभा और राज्यसभा. ऊपरी सदन को राज्यसभा कहा जाता है. संविधान के अनुच्छेद 80 के मुताबिक राज्यसभा में सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 निर्धारित की गई है. इनमें से 12 को राष्ट्रपति मनोनीत (नामित) करते हैं जबकि 238 सदस्य संघ और राज्य के प्रतिनिधि चुनते हैं.

संविधान की अनुसूची चार के मुताबिक सदस्यों का चयन राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की आबादी के आधार पर होगा. इस प्रकार राज्यसभा के सदस्यों की कुल संख्या 233 ही हो सकी जबकि 12 सदस्य राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं. यानी वर्तमान में राज्यसभा के कुल सदस्यों की संख्या 245 है.

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Image caption मायावती की सीट पर भी चुनाव होंगे, जिन्होंने नाराज होकर अपने कार्यकाल (अप्रैल 2018) से पहले ही जुलाई 2017 में इस्‍तीफा दे दिया था

भंग नहीं होती राज्यसभा

राज्यसभा के सभापति भारत के उपराष्ट्रपति होते हैं. इसके सदस्य छह साल के लिए चुने जाते हैं. इनमें से एक तिहाई सदस्यों का कार्यकाल प्रत्येक दो साल में पूरा हो जाता है. इसका मतलब है कि प्रत्येक दो साल पर राज्यसभा के एक तिहाई सदस्य बदलते हैं न कि यह सदन भंग होता है. यानी राज्यसभा हमेशा बनी रहती है.

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