राज्यसभा चुनाव: यूपी में दसवीं सीट पर पेंच

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Image caption बसपा उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर

उत्तर प्रदेश में राज्य सभा की दसवीं सीट के लिए पिछले दो दिन से चल रहा नाटकीय घटनाक्रम अपने क्लाइमेक्स पर नज़र आया.

शुक्रवार शाम चार बजे मतदान पूरा होने के बाद वोटों की गिनती शुरू हुई लेकिन बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी की शिकायत के बाद करीब एक घंटे के लिए मतगणना रोक दी गई.

दोनों पार्टियों ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि बहुजन समाज पार्टी के विधायक अनिल सिंह और सपा विधायक नितिन अग्रवाल ने वोट देने के बाद अपनी पर्ची पार्टी के पोलिंग एजेंट को नहीं दिखाई थी. इसलिए उनका वोट निरस्त किया जाए. बाद में मतगणना शुरू कर दी गई.

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के दस सदस्य चुने जाने हैं. भारतीय जनता पार्टी के आठ और समाजवादी पार्टी उम्मीदवार जया बच्चन का चुना जाना तय माना जा रहा है.

दसवीं सीट के लिए बीएसपी के भीमराव आंबेडकर और बीजेपी के अनिल अग्रवाल आमने-सामने हैं और दोनों ही दल मतदान पूरा होने के बाद जीत का दावा कर रहे हैं.

चुनाव के दौरान दोनों धड़ों की नज़र एक-एक वोट पर थी.

ऐसे में निर्दलीय विधायकों के वोट अहम हो गए. गुरुवार को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के प्रति समर्थन जाहिर करने वाले निर्दलीय विधायक राजा भैया पर सबकी नज़र रही.

राजा भैया ने वोट डालने के पहले अखिलेश से मुलाक़ात की और बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले. ऐसे में उन्हें लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म है.

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Image caption रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया

राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग

बीएसपी उम्मीदवार भीमराव आंबेडकर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के विधायकों के अलावा कुछेक निर्दलीय विधायकों के वोट की उम्मीद लगाए थे.

लेकिन उनकी अपनी पार्टी के एक विधायक अनिल सिंह ने ऐलान कर दिया कि उन्होंने 'अपना वोट भारतीय जनता पार्टी को दिया है'.

निषाद पार्टी के विजय मिश्र गुरुवार से ही कह रहे थे कि वो बीजेपी को वोट देंगे और उन्होंने ऐसा ही किया भी. समाजवादी पार्टी के एक विधायक नितिन अग्रवाल पहले ही बीजेपी के खेमे में जा चुके हैं.

क्रॉस वोटिंग को लेकर सभी दल आशंकित थे. शायद इसीलिए कांग्रेस के सात और बीएसपी के 17 विधायकों ने एक साथ जाकर मतदान किया.

बीएसपी के मुख़्तार अंसारी और सपा विधायक हरिओम हाईकोर्ट के निर्देश के चलते वोट नहीं दे पाए. जानकारी के अनुसार समाजवादी पार्टी के आठ विधायकों ने बीएसपी उम्मीदवार को वोट दिया.

वहीं राष्ट्रीय लोकदल के एक विधायक ने भी बीएसपी के उम्मीदवार को ही वोट दिया है.

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आंबेडकर की राह में बीजेपी का पेंच

बीजेपी के नवें उम्मीदवार और बीएसपी के आंबेडकर के बीच कड़ा मुक़ाबला माना जा रहा है.

यदि प्रथम वरीयता के आधार पर जीत हार तय नहीं होती तो दूसरी वरीयता के आधार पर फ़ैसला होगा और उस स्थिति में सबसे ज़्यादा विधायक होने के नाते बीजेपी उम्मीदवार का पलड़ा भारी पड़ेगा.

फिलहाल दोनों पक्ष अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, इसलिए मुक़ाबला और रोमांचक हो चला है.

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