भीमा कोरेगांव के अभियुक्त संभाजी भिडे कब होंगे गिरफ़्तार?

  • 23 मार्च 2018
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महाराष्ट्र में पुणे ज़िले के भीमा कोरेगांव में 1 जनवरी को हुई हिंसा के मामले में ढाई महीने बाद मिलिंद एकबोटे को गिरफ़्तार किया गया.

लेकिन इस मामले में एक और शख़्स पर मामला दर्ज हैं जिन्हें अभी तक गिरफ़्तार नहीं किया गया है. वह हैं शिवप्रतिष्ठान संगठन के प्रमुख संभाजी भिडे.

उनकी गिरफ़्तारी की मांग लेकर भरिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने आक्रामक रवैया अपनाया है और 26 मार्च को उन्होंने मुंबई में मोर्चा निकालने का फ़ैसला किया है.

सुप्रीम कोर्ट के ज़मानत याचिका खारिज करने के बाद पुलिस ने 14 मार्च को मिलिंद एकबोटे को गिरफ़्तार किया.

प्रकाश आंबेडकर का सवाल है कि एक ही मामले में जब एकबोटे को गिरफ़्तार किया गया है तो संभाजी भिडे को क्यों नहीं गिरफ़्तार किया गया.

भीमा कोरेगांव हिंसा के बाद अनिता सावले नाम की महिला की शिकायत पर पिंपरी पुलिस थाने में संभाजी भिडे और मिलिंद एकबोटे पर 2 जनवरी को मामला दर्ज हुआ.

भीमा कोरेगांव शिक्रापूर पुलिस थाने के दायरे में आने के कारण यह मामला वहां ट्रांसफ़र किया गया. अब इस मामले की जांच शिक्रापूर पुलिस थाने में हो रही है.

पुलिस का क्या कहना है?

शिक्रापूर पुलिस थाना, पुणे ग्रामीण पुलिस अधिक्षक के अधिकार में आता है.

पुणे ग्रामीण इलाक़े के पुलिस अधिक्षक सुवेज़ हक़ से बीबीसी ने संभाजी भिडे की गिरफ़्तारी के बारे में पूछा.

इस पर उन्होंने बताया, "संभाजी भिडे से अभी पूछताछ नहीं की गई है. ज़रूरत पड़ने पर उनसे पूछताछ की जायेगी. मिलिंद एकबोटे को गिरफ़्तार किया गया क्योंकि उनके खिलाफ़ सबूत मिले थे. किसे गिरफ़्तार करना है ये किससे पूछताछ करनी है यह अधिकार जांच अधिकारी का है. भिडे से पूछताछ को लेकर अभी तक हमने कोई निर्णय नहीं लिया है."

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कानूनी विशेषज्ञ का क्या कहना है?

पुलिस की इस भूमिका पर बीबीसी ने लीगल एक्सपर्ट असीम सरोदे से बात कर न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी ली.

उन्होंने कहा, "एक ही मामले में दो लोगों पर एक ही प्रकार के आरोप लगे हों तो भी यह हो सकता है की एक की गिरफ्तारी हो और दूसरे की ना हो. क्योंकि हर शख़्स का उस मामले में रोल अलग-अलग हो सकता है. लेकिन संभाजी भिडे पर जो मामला दर्ज है वह कॉग्निजेबल अफेंस है यानि गंभीर मामला है. ऐसे मामले में तुरंत गिरफ्तारी होनी ही चाहिये. भिडे फ़रार भी नहीं है तो उनसे अब तक पूछताछ हो जानी चाहिये थी"

असीम सरोदे ने आगे कहा, "पुलिस के पास अधिकार है लेकिन उनका उत्तरदायित्व कानून की ओर है. विशेषाधिकार को संवेदनशीलता से इस्तेमाल करना चाहिए, ऐसा कानून का तत्व है. कोई भी प्रशासन अपना विशेषाधिकार कैसे इस्तेमाल करता है, उससे पता चलता है कि प्रशासन किसकी तरफ़ है"

क्या पुलिस ने प्रक्रिया का पालन किया?

ऐसे मामलों मे पुलिस की प्रक्रिया में क्या कहा गया है यह जानने के लिये बीबीसी ने रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी सुधाकर सुराडकर से बात की.

उन्होंने बताया, "इस घटना में जो मामला दर्ज हुआ है वह गंभीर मामला है. प्रक्रिया के अनुसार इस प्रकार के मामले में आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिये. इस मामले में शुरु में जो जानकारी सामने आयी थी, उसके अनुसार अगर गिरफ्तार करके तुरंत पुलिस रिमांड लिया होता तो जांच में फायदा होता. गिरफ्तारी में देरी होने पर अभियुक्त को सबूत मिटाने का मौका मिलता है. साथ ही अभियुक्त को पुलिस पर दबाव डालने, प्रलोभन देने के लिये भी समय मिलता है. इस मामले में पुलिस का काम प्रक्रिया के अनुसार नहीं है. साथ ही भिडे को गिरफ्तार करने पर कानून व्यवस्था बिगड़ेगी या नहीं, इसकी चिंता पुलिस को नहीं करनी चाहिये"

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राजनैतिक दबाव है?

राजनीतिक विश्लेषक प्रकाश बाल का कहना है, "संभाजी भिडे को गिरफ्तार नहीं किया जाता या उनसे पूछताछ नहीं होती तो इस में हैरानी की कोई बात नहीं. भिडे हिंदुत्ववादी परिवार से नाता रखते हैं, इसलिए भाजपा सरकार उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगी. भिडे का नेताओं पर प्रभाव है और सिर्फ बीजेपी के ही नहीं अन्य पार्टियों के नेताओं पर भी उनका प्रभाव है. इसलिए विपक्ष भी इस मामले को ज़्यादा नहीं उठा रहा. कोर्ट ने अगर आदेश दिया तो ही भिडे गिरफ्तार हो सकते हैं."

भाजपा ने इन आरोपों का खंडन किया है. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता माधव भंडारी ने बीबीसी को बताया, "संभाजी भिडे के मामले में सरकार ज़रुरी जांच कर सही निर्णय लेगी. हिंदुत्ववादी संगठन से जुड़े होने के कारण कार्रवाई हो नहीं हो रही...इस बात में कोई तथ्य नहीं. आरोपों मे सच्चाई होगी और तथ्य नहीं होगा तो कार्रवाई नहीं होगी."

संभाजी भिडे पर लगे आरोप पर बीबीसी ने शिवप्रतिष्ठान के प्रवक्ता नितिन चौगुले से बात की. भिडे पर लगे आरोपों के वह झूठा बताते हैं.

"जिन आरोपों के आधारपर मामला दर्ज हुआ, वह आरोप ही झूठ है. इस लिये मामला रफ़ा-दफ़ा करना चाहिये. मिलिंद एकबोटे पर लगे आरोप भी झूठ हैं. इन दोनों के ऊपर दर्ज मामले में हटा दिये जाये इस मांग को लेकर शिवप्रतिष्ठान संगठन ने 28 मार्च को पूरे राज्य में जगह-जगह जिलाधिकारी कार्यालय पर मोर्चा आयोजित किया है."

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