क्यों बोलीं मायावती, 'फिर होगी बीजेपी की हालत ख़राब'

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बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के नतीजों को लेकर बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के 'संबधों पर कोई असर नहीं होगा'.

राज्यसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार भीमराव आंबेडकर को हार का सामना करना पड़ा था और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अनिल अग्रवाल दूसरी वरीयता के वोटों के आधार पर जीत हासिल करने में कामयाब रहे थे.

चुनाव नतीजों के बाद अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने कहा, " कल जो भी राज्यसभा का नतीजा आया है, उससे सपा व बसपा की आई नज़दीकी में तिल भर भी असर पड़ने वाला नहीं है."

"ये सोच रहे होंगे रात भर, बड़े लड्डू खाए होंगे, मायावती बहुत गर्म मिजाज की है, ये एलायंस टूट जाएगा. इनमें जो तालमेल बन रहा है वो खराब हो जाएगा. फिर 2019 में लोकसभा का चुनाव होगा, उसमें हमारी बल्ले-बल्ले हो जाएगी. मेरे ख़्याल से आज मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद फिर उनकी हालात खराब हो जाएगी."

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'अब दिखेगी ज़िद'

मायावती ने ये भी कहा कि अब बीएसपी और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए ज़्यादा ज़िद के साथ काम करेंगे.

उन्होंने कहा, " ये हरा तो दिया लेकिन अब हमारी पार्टी के लोग और मुझे लगता है कि सपा के भी लोग और ज़्यादा मेहनत के साथ और ज़िद के साथ बीजेपी को केंद्र में सत्ता में आने से रोकने के लिए पूरी ताक़त झोंक देंगे."

'नहीं धुलेगा धब्बा'

मायावती ने भारतीय जनता पार्टी पर चुनाव जीतने के लिए साजिश करने और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया.

मायावती ने ये भी कहा कि राज्यसभा की जीत से भारतीय जनता पार्टी को गोरखपुर और फूलपुर उप-चुनाव में हार से जो झटका लगा है, उसकी भरपाई नहीं हो सकती है.

उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परपंरागत सीट पर लगभग 28 साल बाद और उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की फूलपुर सीट पर हुई करारी हार का जो धब्बा बीजेपी के दामन पर जनता ने दिया है. वो राज्यसभा की इस अनैतिक जीत से कभी धुलने वाला नहीं है. "

गोरखपुर और फूलपुर उप-चुनाव में बीएसपी ने समाजवादी पार्टी उम्मीदवारों को समर्थन दिया था. समाजवादी पार्टी दोनों सीटें जीतने में कामयाब रही. भारतीय जनता पार्टी इस गठबंधन को लगातार बेमेल बताती रही है.

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मायावती की प्रेस कॉन्फ्रेंस की ख़ास बातें

  • सपा-बसपा की नज़दीकी में बाधा डालने के लिए बीजेपी ने पूरी जान की बाज़ी लगा दी. इसके लिए इन्होंने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया. इन्होंने सपा-बसपा की नज़दीकी तोड़ने की कोशिश की. मोदी और योगी सरकार ने हमेशा की तरह सरकारी आतंक का भय पैदा करके एक धन्ना सेठ को राज्यसभा का चुनाव जितवा दिया है.
  • सीबीआई-ईडी का डर दिखाकर विधायकों को डराया गया और उन्हें अपने पक्ष में वोट डलवाया गया. जिन्होंने क्रॉस वोटिंग नहीं की उनकी हिम्मत के लिए मैं उन्हें बधाई देती हूं.
  • उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर जब चुनाव घोषित हुआ तो सपा-बसपा के वरिष्ठ नेतृत्व के बीच एक कारगर रणनीति बनाने की कोशिश की गई थी. इसका उद्देश्य बीजेपी की ओर से खड़े किए गए नौवें प्रत्याशी को चुनाव जीतने से रोकना था.
  • सपा-बसपा में तय हुआ था कि बसपा उम्मीदवार को सपा जिताने का प्रयास करेगी और विधान परिषद चुनाव में बसपा अपने विधायकों का वोट सपा को ट्रांसफ़र करेगी.
  • लोकसभा की दो सीटों पर उप-चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए मज़बूत विपक्ष का समर्थन किया जाएगा. इसके लिए बसपा ने गोरखपुर और फूलपुर में सपा के उम्मीदवारों का समर्थन किया. इसके परिणामों ने बीजेपी को दिन में तारे दिखा दिए.
  • गेस्ट हाउस कांड के समय के पुलिस अफ़सर ओपी सिंह को प्रदेश का पुलिस आयुक्त बनाया गया है तो क्या योगी सरकार मेरी हत्या कराना चाहती है? सपा-बसपा का जो गठबंधन था उसे ख़त्म करने की कोशिश की गई है लेकिन ऐसा नहीं होगा.
  • अखिलेश यादव अभी राजनीति में ज़्यादा तजुर्बेकार नहीं हैं लेकिन वह धीरे-धीरे सीख लेंगे. राज्यसभा चुनाव की अनैतिक जीत और इसके षड्यंत्र को धूल चटाई जा सकती थी यदि सपा मुखिया कुंडा के राजा भैया के जाल में न फंसते.
  • हमारी पार्टी के बारे में एक बात स्पष्ट कर देना चाहती हूं कि अगले चुनाव के लिए हमारी पार्टी लोगों को जोड़ने के काम पर लग चुकी है. किसी भी उप-चुनाव में बसपा अपने कार्यकर्ताओं को नहीं लगाएगी बल्कि ज़मीन और बूथ लेवल पर हम अपने दल को मज़बूत करने में अपनी ताक़त लगाएंगे.

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