राहुल गांधी को NCC के बारे में क्यों पता होना चाहिए?

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का कहना है कि उन्हें नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के बारे में कोई जानकारी नहीं है. लेकिन क्या उन्हें इसकी जानकारी नहीं होनी चाहिए?

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर काफ़ी हमलावर हैं, लेकिन बीच-बीच में अपने ही बयान से वो सवालों के घेरे में आ जाते हैं.

कुछ ऐसा ही मैसूर में हुआ, जहां वो महारानी आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज फ़ोर वुमन में बोल रहे थे. एक छात्रा ने उनसे पूछा कि NCC के लिए वो क्या बेनेफ़िट देंगे?

सवाल साधारण सा था, लेकिन राहुल गांधी ने कुछ ऐसा जवाब दिया कि वो वायरल हो गया. उन पर तंज़ भी कसे गए और हमला भी बोला गया.

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क्या बोले राहुल?

राहुल ने जवाब में कहा, ''मुझे NCC ट्रेनिंग और उस तरह की दूसरी चीज़ों के बारे में कुछ नहीं पता है, इसलिए मैं आपके सवाल का जवाब नहीं दे पाऊंगा.''

उन्होंने आगे कहा, ''लेकिन एक युवा भारतीय होने के नाते मैं ये ज़रूर कह सकता हूं कि मैं आपको ऐसे अवसर दूंगा जिससे आप अपना भविष्य बना सकते हैं, सफल शिक्षा ले सकते हैं, आगे बढ़ सकते हैं. लेकिन मुझे NCC के ब्यौरे के बारे में नहीं पता है.''

उनके ये कहने के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया. कई लोग राहुल गांधी के इस बयान पर नाराज़गी जताने लगे.

NCC कैडेट ख़फ़ा?

NCC कैडेट भी ख़फ़ा नज़र आए. इनमें से एक संजना सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''मैं हैरान हूं कि उन्हें NCC के बारे में नहीं पता. ये डिफ़ेंस की दूसरी क़तार है. उम्मीद है वो इसके बारे में आगे सीखेंगे. नेता इस बारे में जाने, ये ज़रूरी है.''

लेकिन असल में NCC है क्या और राहुल गांधी जैसे देश के प्रमुख नेता को उसके बारे में क्यों पता होना चाहिए?

भारत में NCC का गठन साल 1948 में हुआ था. इसकी तारें यूनिवर्सिटी कोर से जुड़ी हैं जिसे इंडियन डिफ़ेंस एक्ट 1917 के तहत बनाया गया था और इसका उद्देश्य सैनिकों की कमी से निपटना था.

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कब गठन हुआ था?

साल 1920 में जब इंडियन टेरिटोरियल एक्ट पारित किया गया है, तो यूनिवर्सिटी कोर की जगह यूनिवर्सिटी ट्रेनिंग कोर (UTC) ने ले ली. उद्देश्य था कि UTC का दर्ज़ा बढ़ा दिया जाए और इसे युवाओं के लिए और आकर्षित बनाया जाए.

UTC के अधिकारी और कैडेट सेना की तरह वर्दी पहना करते थे और इसे सशस्त्र सेनाओं के भारतीयकरण में अहम क़दम माना गया. इसे बाद में UOTC का नाम दिया गया ताकि NCC को यूनिवर्सिटी ऑफ़िसर्स ट्रेनिंग कोर (UOTC) का वारिस माना जाए जिसे ब्रिटिश सरकार ने साल 1942 में बनाया था.

हालांकि, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान UOTC उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा. इसके बाद ये विचार किया गया कि इस रणनीति में बदलाव किया जाए और शांति काल के दौरान युवाओं को ट्रेनिंग देने का कोई तरीक़ा हो.

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लड़कियों को मौक़ा दिया गया

पंडित हृदय नाथ कुंजरू की अगुवाई वाली समिति ने सिफ़ारिश दी कि राष्ट्रीय स्तर पर स्कूलों और कॉलेजों में कैडेट संगठन तैयार किया जाए.

इसके बाद गर्वनर जनरल ने नेशनल कैडेट कोर एक्ट को स्वीकार किया और 15 जुलाई, 1948 को ये वजूद में आ गया.

साल 1948 में इसका गर्ल्स डिविज़न बनाया गया ताकि स्कूल-कॉलेज जाने वाली लड़कियों को बराबरी का मौक़ा दिया जा सके. साल 1950 में एयर विंग बना और 1952 में नेवल विंग.

साल 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद साल 1963 में NCC ट्रेनिंग को अनिवार्य बनाया गया लेकिन 1968 में एक बार फिर इसे वॉलंटिअरी बना दिया गया.

कैसे बदली भूमिका?

साल 1965 में हुई भारत-पाकिस्तान जंग और 1971 के युद्ध में NCC के कैडेट ने डिफ़ेंस की दूसरी क़तार के रूप में काम किया. उन्होंने आयुध कारखानों की मदद के लिए कैंप बनाए, फ़्रंट पर हथियार पहुंचाने में सहायता दी और पेट्रोल पार्टी की तरह भी उनका इस्तेमाल हुआ.

साल 1965 और 1971 के युद्ध के बाद NCC सिलेबस में बदलाव किया गया. इसमें नेतृत्व क्षमता और अफ़सरों के दूसरे गुणों को रेखांकित किया गया था.

इसके बाद NCC कैडेट को मिलने वाली सैन्य ट्रेनिंग को घटाया गया और समाजसेवा एवं युवा प्रबंधन जैसे दूसरे क्षेत्रों पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया.

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