बिहार: औरंगाबाद में इस तरह भड़की सांप्रदायिक हिंसा

औरंगाबाद हिंसा

पथराव, नारेबाज़ी, दर्जनों दुकानें आग के हवाले, शहर में धारा 144, इंटरनेट पर पाबंदी, 150 लोगों की गिरफ़्तारी...

ये वो बाते हैं जो बिहार के औरंगाबाद ज़िले में रामनवमी के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा को बयान कर रही हैं.

इसकी शुरुआत 25 मार्च को रामनवमी के दिन हुई. औरंगाबाद के ज़िलाधिकारी राहुल रंजन माहीवाल ने बीबीसी से इसकी तस्दीक की.

उन्होंने बताया, "सोमवार दोपहर शहर के जामा मस्जिद इलाके से रामनवमी का जुलूस गुजर रहा था, उस पर पथराव हुआ. उसके बाद फिर हिंसा भड़क गई."

"आगजनी की घटनाएं हुईं. तीन दर्जन दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया. करीब दस लोग घायल हैं. तीन लोगों को गोली लगी है जिसमें एक की हालत गंभीर है."

इंटरनेट बंद

प्रशासन ने बताया कि जुलूस में शामिल लोगों को पुलिस ने अपने-अपने घर पहुंचा दिया था लेकिन इसके बाद फिर शहर के जामा मस्जिद से कुछ दूर तंग गलियों वाले इलाके में दोनों समुदायों के बीच गोलीबारी घटना हुई.

"इसमें तीन लोग घायल हुए हैं. दो को पैर में गोली लगी है. उनका इलाज औरंगाबाद में ही हो रहा है. तीसरे को पेट में गोली लगी है, उसकी हालत गंभीर है और बेहतर इलाज के लिए उसे पटना भेजा गया है. घायलों में दोनों समुदाय के लोग शामिल हैं. प्रशासन ने इस हिंसा के लिए तकरीबन 150 लोगों को गिरफ्तार किया गया है."

हालांकि औरंगाबाद की हिंसा में किसी की मौत नहीं हुई लेकिन शहर में धारा 144 लागू है और मंगलवार तक के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद रखने का फ़ैसला लिया है.

हालांकि प्रशासन का कहना है कि ज़रूरी सेवाओं को बहाल रखा गया है.

प्रशासन अलर्ट है...

ज़िलाधिकारी ने बताया, "सोमवार को भड़की हिंसा में के दौरान भड़काऊ नारे लगे थे और दोनों दोनों पक्षों की तरफ़ से पथराव हुआ था. इसके बाद करीब आधे घंटे के अंदर पुलिस ने लाठी चार्ज किया और आंसु गैस छोड़कर स्थिति को नियंत्रण में ले लिया था."

जामा मस्जिद से दूर जिस इलाके में इस घटना के बाद शाम में जहां गोलीबारी हुई थी, वहां दोनों संप्रदायों के लोग सालों से मिलजुल कर रहते थे.

प्रशासन का कहना है कि साजिश के तहत ऐसा किया गया है.

राहुल रंजन माहीवाल ने बताया, "प्रशासन अलर्ट है. पर्याप्त पुलिस बल तैनात है. पिछले 12 घंटे में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है. पटना से भी वरीय पुलिस पदाधिकारी यहां कैंप कर रहे हैं."

इमेज कॉपीरइट Sanjay Chaudhary/BBC

सोमवार को इस सवाल पर विधानसभा में भी चर्चा हुई. विपक्ष ने औरंगाबाद में लगे कथित कर्फ्यू पर सवाल उठाया.

कर्फ्यू के सवाल पर मुख्यमंत्री ने साफ़ किया कि औरंगाबाद में कर्फ्यू नहीं लगाया गया है. और न पुलिस की तरफ़ से गोलीबारी हुई है. हम हालात पर नज़र रखे हुए हैं. हम हर हाल में माहौल बिगाड़ने वालों पर कर्रवाई करेगा.

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