जब शेरवानी पहन दुल्हन चढ़ी घोड़ी...

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शेरवानी पहनकर घोड़ी चढ़ी लड़की

जिस दुकान पर लड़कों की शेरवानियां टंगी हों, उस दुकान पर एक लड़की पहुंचकर अपने नाप की शेरवानी मांगे, तो आप क्या कहेंगे?

शायद आप थोड़ा हैरान होंगे .. .

शायद थोड़ा परेशान भी...

राजस्थान के सीकर के बाज़ार में ठीक ऐसा ही हुआ.

नेहा की शादी 25 मार्च के लिए तय थी. फ़रवरी में शादी के जोड़े की शॉपिंग करने पूरा परिवार झुंझनू से 60 किलोमीटर दूर सीकर गया.

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शॉपिंग

वहां नेहा के लिए लहंगे की शॉपिंग तो की ही गई लेकिन परिवार वालों के साथ जब वो शेरवानी ख़रीदने पहुंची तो दुकानदार को लगा कि दूल्हे के लिए ख़रीदारी चल रही है.

जैसे ही दुकानदार ने दूल्हे का साइज पूछा तो नेहा तुरंत खड़ी हो कर शेरवानी नापने लगी.

एक पल के लिए दुकान पर मौजूद सभी ग्राहक और दुकानदार एक दूसरे का मुंह ताकते रह गए.

नेहा के पिता ने माहौल भांप लिया. उन्होंने तुंरत कहा, "ये मेरी बेटी नहीं बेटा है. अपनी बेटी के लिए हम बिंदौरी निकालेंगे और उसमें नेहा शेरवानी पहनेंगी."

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तारीफ़

फिर क्या था, वहां मौजूद सभी लोगों के सुर ही बदल गए. लोगों ने उनके परिवार की खूब तारीफ की.

राजस्थान में होने वाली शादी में बिंदौरी एक रस्म होती है, जिसमें दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर बारात की तरह घर से निकल कर रिश्तेदारों के घर जाता है.

अपने परिवार के इस फैसले पर बात करते हुए नेहा ने बीबीसी को बताया, "ये मेरा फैसला नहीं था. मेरे माता पिता ने इस बारे में पहले ही फैसला कर लिया था. जब उन्होंने मेरे साथ शेयर किया तो मुझे भी उनका नायाब आइडिया पसंद आया और मैंने भी इसके लिए हामी भर दी."

नेहा अपने गांव की पहली आईआईटी ग्रेजुएट हैं.

उनकी पूरी पढ़ाई शुरूआत से ही अग्रेज़ी मीडियम में हुई है. 12वीं पास करने के बाद नेहा को उनके माता पिता ने इंजीनियरिंग की तैयारी करने के लिए कोटा भेज दिया था.

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आईआईटी

जिसके बाद पहली बार में ही उनका सलेक्शन आईआईटी बीएचयू में हो गया.

नेहा ने इंजीनियरिंग में भी केमिकल इंजीनियरिंग को चुना. नेहा के मुताबिक इंजीनियरिंग की इस ब्रांच को महिलाएं ज्यादा पसंद नहीं करतीं. इसलिए वहां भी वो लड़कों को चुनौती देना चाहती थीं.

फिर मथुरा रिफाइनरी में उनकी नौकरी लग गई.

नेहा के बचपन की बातों को याद करते हुए उनके पिता सुरेश चौधरी कहते हैं, "बचपन में भी वो हमेशा जींस टी-शर्ट पहनने की ही जिद किया करती थी. हमने उसे हमेशा बेटे की तरह पाला है. साथ ही लड़कियों वाले सभी संस्कार भी दिए हैं."

नेहा शादी में होने वाली एक रस्म बिंदौरी के लिए शेरवानी पहना, माथे पर साफा बांधा और घोड़ी पर सवार हो कर रिश्तेदारों के घर खुद नांचते हुए पहुंची.

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नेहा झुंझनू के नवलगढ़ की रहने वाली हैं. ये ऐसा गांव है जहां औरतों के सिर से पल्लू आज भी नहीं गिरता, भले ही वो नाच-गा ही क्यों न रही हों.

ऐसे पिछड़े गांव से आने के बावजूद क्या पड़ोसियों ने नेहा के परिवार के इस फैसले का विरोध नहीं किया?

इस सवाल के जवाब में सुरेश कहते हैं, "वैसे तो बिंदौरी दूल्हे की निकाली जाती है, लेकिन हमने नेहा की बिंदौरी की. ये अपने आप में बरसों से चली आ रही परंपरा तोड़ने जैसा था. उस पर से लड़की के लिए शेरवानी और घोड़ी पर चढ़ना - दोनों अपने आप में बिलकुल नयी बाते थे. पर पूरे परिवार ने ही नहीं पूरे गांव ने इस बात के लिए हमें न सिर्फ सराहा, बल्कि नाचते गाते इस रस्म में शामिल भी हुए."

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सवाल

लेकिन, नेहा के इस कदम पर उसके ससुराल वालों की क्या प्रतिक्रिया थी? क्या नेहा की लव मैरेज हुई है ?

जैसे ही ये सवाल उनसे पूछा, जवाब में पलट कर नेहा ने सवाल दागा, "क्यों लव मैरेज में ही लड़कियां खुश होती हैं, अरेंज मैरेज में खुश नहीं हो सकती हैं?"

फिर अगले ही पल थोड़ा शांत हो कर कहती हैं, "मेरी अरेंज मैरेज है और मेरे ससुराल वाले बहुत सपोर्टिव हैं. उन्हें मेरे इस तरह से पंरपरा तोड़ने पर कोई दिक्कत नहीं थी."

नेहा कहतीं है कि बेहतरी के लिए तोड़ी गई परंपरा में सबकी भलाई ही है.

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