'मेरा बेटा गया कोई बात नहीं, दूसरे को तकलीफ़ मत होने दो'

  • 31 मार्च 2018
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'इस्लाम अमन का पैगाम देता है'

पश्चिम बंगाल के आसनसोल में रामनवमी समारोह के दौरान हुए दंगों में यहां के एक इमाम के बेटे की मौत हो गई. लेकिन इमाम ने इस घटना को सांप्रदायिक रंग ना देने और शांति बनाए रखने की अपील की.

बुधवार को आसनसोल ज़िला अस्पताल में वहां की नूरानी मस्जिद के इमाम इम्तदुल्लाह रशीद के सबसे छोटे बेटे हाफ़िज सब्कातुल्ला का शव मिला था. उनके सिर और गले पर चोट के निशान थे.

गुरुवार को लगभग एक हज़ार लोगों की मौजूदगी में 16 साल के सब्कातुल्ला के शव को दफ़नाया जा रहा था. इस मौक़े पर इमाम ने अपील की कि इलाक़े में शांति बनाए रखने के लिए बदले की भावना से काम ना किया जाए.

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"सवेरे पता चला कि मेरा बेटा मर चुका है"

इमाम ने कोलकाता स्थित बीबीसी संवाददाता अमिताभ भट्टासाली को बताया, "हमारे लड़के ने इस साल माध्यमिक की परीक्षा दी है. वो कुरान का हाफ़िज़ भी है."

वो बताते हैं, "28 तारीख़ को वो कुरान पढ़ने के लिए गया था. जब हल्ला-गुल्ला हो रहा था तो वो देखने के लिए गया था कि बाहर क्या हो रहा है. भीड़ उसे अपने साथ खींच कर ले गई."

"मेरा बड़ा बेटा अपने भाई को छुड़ाने के लिए गया और उनसे पुलिस से शिकायत की. पुलिस ने पहले छोटे बेटे की तस्वीर की पुष्टि की और उसके बाद मदद करने की बजाय ग़लत काम किया और मेरे बड़े बेटे को ही पुलिस स्टेशन में बंद कर दिया. रात में हमारे काउंसेलर साहब उसे वहां से छुड़ा कर लाए."

"सवेरे पता चला कि अस्पताल में एक लाश आई है. वो लाश मेरे छोटे बेटे की थी."

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"मारा, कोई बात नहीं जलाया क्यों?"

अपने बेटे के शव को याद करते हुए इमाम भावुक हो जाते हैं. वो कहते हैं कि मैं कोशिश कर रहा हूं कि ना रोऊं लेकिन आंसू अपने आप ही आंखों में आ रहे हैं.

वो कहते हैं, "मेरे बेटे की उंगलियों के नाखून खींच लिए गए थे. उसे जला दिया गया था. उसके शरीर पर चाकू से वार किया गया था. आम तौर पर आदमी मर जाता है तो उसका खून बहना रुक जाता है, लेकिन उसका खून लगातार बह रहा था."

"उन्होंने उसे मारा कोई बात नहीं, उन्होंने उसे जला दिया, ये ठीक नहीं था."

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इमाम इम्तदुल्लाह रशीद कहते हैं, "इस्लाम का पैगाम अमन का पैगाम है. ये कहता है कि खुद तकलीफ उठा लो लेकिन दूसरे को तकलीफ ना होने दो. हमारे आसनसोल में हम लोग अमन चैन से रहना चाहते हैं और मैं इस्लाम का पैगाम देना चाहता हूं."

"मुझे इसे सहने की जो ताक़त मिली है वो अल्लाह की दी हुई ताक़त है. उसने हमें ताक़त दी है कि हम अपना दुख सह सकें. अपने मुल्क में शांति रहे, दंगा-फसाद ना हो और हमारे किसी भाई को तकलीफ़ ना हो."

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मीडिया से अपील

मीडिया से उनकी अपील है कि वो अमन के इस पैगाम को लोगों के पास ले कर जाएं.

वो कहते हैं, "15-16 साल के बच्चों को जेल में बंद कर दिया जाता है और फिर वो सालों बाद बाइज़्ज़त बरी हो जाते हैं. उनकी ख़बर दिखाई जानी चाहिए और उनके धैर्य की तारीफ़ की जानी चाहिए कि उन्होंने एक लंबा वक्त मुश्किलों में गुज़ारा लेकिन अल्लाह ने उन्हें जो कुछ सिखाया है उससे उन्होंने समझौता नहीं किया."

पश्चिम बंगाल के पश्चिमी बर्दवान ज़िले के आसनसोल और रानीगंज में रामनवमी के दोरान हिंसक सांप्रदायिक दंगे हुए थे. यहां रामनवमी की झांकी निकालने को ले कर दो समूहों में झड़प हो गई थी.

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और और दो पुलिस अधिकारी घायल हुए थे.

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