एसएससी पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन: 'हम इस धांधलेबाजी से परेशान हैं'

  • 1 अप्रैल 2018
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आंखों में सुनहरे भविष्य की आस लिए सैकड़ों नौजवान दिल्ली के संसद मार्ग पर जमा हुए और विरोध प्रदर्शन किया. सालों की मेहनत के बाद हाथ लगने वाली नाकामी से पनपा गुस्सा अपने चरम पर था.

ये ग़ुबार सिर्फ एक पेपर लीक की घटना का नहीं लगा बल्कि ऐसा लगा कि सालों से उनके भीतर सुलग रहा था. और अब उसमें विस्फोट हो चुका था.

दिल्ली के बीचों-बीच पटेल चौक मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलते ही छोटे-छोटे समूहों में नौजवान खड़े थे. आगे बढ़ते हुए ये छोटे समूह बड़े होते गए और फिर संसद मार्ग पर युवाओं के हुजूम में बदल गया.

दूर-दूर तक कई चेहरे, कई आवाज़ें लेकिन एक ही मांग- "हमें अपनी मेहनत का न्याय चाहिए, हमें सरकार का जवाब चाहिए, एसएससी से अब सफाई चाहिए."

छात्रों का आरोप है कि बड़े स्तर पर हुई हैं अनियमितताएं

परीक्षार्थियों का आरोप है कि 17 से 22 फरवरी 2018 तक हुए कम्बाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा के दूसरे चरण की ऑनलाइन परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर कथित तौर पर लीक हो गए थे.

27 फ़रवरी से परीक्षार्थी केंद्रीय कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका आरोप है कि आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं और कई तरह की दूसरी धांधलियां भी हुई हैं.

परीक्षार्थी इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे. 5 मार्च को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी सीबीआई से जांच कराने के आदेश दिए थे. लेकिन परीक्षार्थी चाहते हैं कि हाल के दिनों में हुई सभी परीक्षाओं की सीबीआई जांच की जाए.

उनका आरोप है कि हाल में एसएससी की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं के दौरान सामूहिक नकल और बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं.

मंच, भाषण और इंक़लाब ज़िंदाबाद के नारे

सड़क पर बनाए गए मंच पर लगे पोस्टर में बड़े-बड़े काले अक्षरों में लिखा था, 'युवाओं का हल्ला बोल'. इस मंच के सामने तेज़ धूप में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और ह​रियाणा से आए नौजवान बैठे थे.

विरोध प्रदर्शन में अलग-अलग शहरों से आए युवाओं को बोलने का मौका दिया जा रहा था.

नौजवान वक्ता अपने ज़ोरदार भाषणों, तुकबंदियों और कविताओं से रोष प्रकट कर रहे थे और नौजवानों की भीड़ तालियों और शोरगुल से उनका जोश बढ़ा रही थी. बीच-बीच में 'इंक़लाब ज़िंदाबाद, भारत माता की जय, हमारी मांगे पूरी करो, झूठी बातें नहीं चलेंगी' जैसे नारे भी लगाए जा रहे थे.

'आश्वासनों से उकता ए हैं'

21 फरवरी को एसएससी के कम्बाइंड ग्रेजुएट लेवल टेस्ट का पेपर कथित तौर पर लीक होने के बाद छात्रों ने सीजीओ कॉम्प्लेक्स के बाहर 19 दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया था.

इसके बाद छात्रों ने 31 मार्च को संसद मार्ग पर विरोध प्रदर्शन का आयोजन करना तय किया और अपनी मांगों को सूचीबद्ध करके सरकार के सामने रखा.

क्या हैं छात्रों की मांगें

इस प्रदर्शन का नेतृत्व 16 छात्रों की एक कोर टीम कर रही है जो आगे की योजनाओं पर विचार करने और युवाओं को एकजुट करने का काम करती है.

इस टीम के एक सदस्य रोहित बताते हैं, "हमें इस समस्या का स्थायी हल चाहिए. हर बार कोई न कोई आश्वासन दे दिया जाता है और फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है. हम सिर्फ एक परीक्षा की जांच नहीं करवाना चाहते बल्कि एसएससी में ऊपर से नीचे तक हो रही गड़बड़ियों को ठीक करवाना चाहते हैं."

रोहित ने हमें वे मांगें बताईं, जो एक पर्चे में सबको बांटी भी गईं.

  • एसएससी द्वारा हाल ही में कराई गई सभी परीक्षाओं की एक समयसीमा के तहत जांच कराई जाए ताकि बड़े स्तर पर हो रही नकल और दूसरी धांधलियों का पता चल सके.
  • परीक्षा आयोजित कराने वाले वेंडर तुरंत बदले जाएं.
  • एसएससी की परीक्षाओं में गड़ब​ड़ी के चलते हुई देरी का असर युवाओं के लिए आयु समयसीमा पर न पड़े.
  • नतीजों में पारदर्शिता हो और नतीजे पीडीएफ के रूप में जारी किए जाएं.
  • एसएससी में सुधारों में समय लग सकता है इसलिए इन मांगों के लिए लिखित में आश्वासन दिया जाए.

पेपर लीक से लेकर ​नतीजों में देरी का गुस्सा

सुबह 9 बजे से शुरू हुआ युवाओं का विरोध प्रदर्शन दोपहर तक सरकार के जवाब का इंतजार करने के बाद एक मार्च में बदल गया. छात्रों ने कनॉट प्लेस में एक छोटा मार्च भी निकाला और इस दौरान सुरक्षाबलों से उनकी धक्कामुक्की भी हुई.

प्रदर्शन में शामिल होने आए नौजवान अपनी परेशानियों के बारे में गुस्सा भी ज़ाहिर कर रहे थे.

दिल्ली में पढ़ रहीं अनुष्का ने कहा, "हम इस धांधलेबाजी से परेशान हैं. हम मेहनत कर के पेपर देते हैं और फिर वो लीक हो जाता है. हमार सारी मेहनत खराब हो जाती है."

वहीं, समस्तीपुर के अरुण कुमार ने 20 फरवरी को हुई कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल की परीक्षा दी थी. अब पेपर लीक होने के आरोपों के बाद वह एसएससी की व्यवस्था से नाराज हैं.

अरुण कहते हैं, "मैंने भी सीजीएल की परीक्षा दी थी. यहां कुछ पता नहीं होता और नतीजे लटके रह जाते हैं. बच्चे सालों साल इंतज़ार करते हैं. कोई नहीं सोचता कि ये बच्चे कितने ग़रीब परिवार से हैं. यहां किस तरह ख़र्च करके रहते हैं."

कुछ नौजवान इसलिए भी नाराज़ हैं कि सरकार उनकी सुध नहीं ले रही. बिहार के रहने वाले एक युवक ने कहा, ''हम पहले 19 दिन प्रदर्शन कर चुके हैं और आज भी सुबह से यहां पर हैं पर कोई सुध लेने वाला नहीं है. जैसे सरकार को लगता है कि हम जैसे आए हैं वैसे ही चले जाएंगे.''

सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो क्या करेंगे, इस पर एक नौजवान ने तपाक से कहा, ''कैसे नहीं मानेगी सरकार. इससे बड़ा प्रोटेस्ट करेंगे. आखिर सरकार हमसे है, हम सरकार से नहीं.''

अस्मिता थियेटर ग्रुप के डायरेक्टर अरविंद गौड़ भी विरोध प्रदर्शन में युवाओं को समर्थन देने पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि इन नौजवानों से सहानुभूति के साथ बात की जानी चाहिए.

राजनीति से दूर रहने की कोशिश

विरोध प्रदर्शन के बीच एक ऐसा समय भी आया जब कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के कुछ प्रतिनिधि मंच पर पहुंचे और युवाओं को संबोधित करने लगे.

इसके बाद हंगामा मच गया. नीचे मौजूद नौजवान उन्हें मंच से उतारने की मांग करने लगे. शुरुआत में स्थिति कुछ साफ नहीं थी और ऐसा लग रहा था कि एनएसयूआई इस प्रदर्शन में शामिल थी.

लेकिन, कोर टीम के सदस्यों से पूछने पर उन्होंने बताया कि हम किसी भी राजनीतिक संगठन को यहां बुलाना नहीं चाहते. ये सिर्फ छात्रों का प्रदर्शन है.

युवाओं की आपत्तियों के बाद एनएसयूआई के छात्र नेताओं को मंच से उतार दिया गया. कुछ छात्रों का कहना था हम बीजेपी और कांग्रेस किसी का साथ नहीं चाहते. बस एसएससी में सुधार की मांग कर रहे हैं.

सरकार को सौंपा पत्र

विरोध प्रदर्शन के बीच ज्वाइंट कमिश्नर अजय चौधरी और डीसीपी पीआरओ मधुकर शर्मा भी वहां युवाओं से बात करने पहुंचे.

मधुकर शर्मा ने बताया, ''हमने युवाओं को हिंसक प्रदर्शन न करने की सलाह दी है. अब उनका एक प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगें सौंपेगा.''

वहीं, मंच से कहा जा रहा था कि हम सरकार के पास नहीं जाएंगे बल्कि सरकार हमारे पास आएगी.

मार्च ख़त्म हो जाने के बाद कोर टीम के सदस्य रोहित ने बीबीसी को बताया, ''हमने अपनी मांगों का एक पत्र कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को दिया है और हम उनके जवाब का इंतजार कर रहे हैं. उसके बाद ही आगे के लिए फैसला लिया जाएगा.''

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