आसनसोल: क्या इन नारों से भड़की थी रामनवमी पर हिंसा?

  • 3 अप्रैल 2018
आसनसोल, पश्चिम बंगाल, हिंसा, सांप्रदायिकता

पश्चिम बंगाल के आसनसोल में रामनवमी के मौक़े पर भड़की हिंसा ने सैकड़ों घरों को हिंसा की आग में झोंक दिया.

त्योहार खुशियाँ लेकर आते हैं लेकिन यहाँ त्योहार दंगे का दर्द दे गया.

दंगा प्रभावित इलाकों में रहने वाले एक मुस्लिम वर्ग का कहना है कि रामनवमी के जुलूस में जो गाने बजाए जा रहे थे, उनकी वजह से ही दंगा भड़का.

कुछ पुलिस अधिकारी और स्थानीय पत्रकार जो रामनवमी के जुलूस के दौरान मौजूद थे, वे भी ऐसा ही बताते हैं.

पत्थरबाज़ी एक बड़ी हिंसा में बदल गई

आसनसोल के चाँदमारी में रहने वाले बबलू ने बीबीसी को बताया, "हमारा जुलूस उधर से गुज़र रहा था, तभी अचानक से पत्थरबाज़ी शुरू हो गई. जुलूस के दौरान जिस छोटे वाहन पर म्यूज़िक सिस्टम था, पहले उस पर पत्थर फेंके गए और बाद में उसमें आग लगा दी गई."

इसी जगह रहने वाले उमा शंकर गुप्ता कहते हैं, "धीरे-धीरे माहौल बिगड़ता गया और बाद में ये पत्थरबाज़ी एक व्यापक हिंसा में तब्दील हो गई."

पिछले सप्ताह उनकी दुकान में आग लगा दी गई, जिसके बाद वो राहत कैंप में चले गए.

रानीगंज इलाक़े के एक पुलिस अधिकारी और स्थानीय पत्रकारों ने नाम न बताने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि रामनवमी के जुलूस में जो गाने बजाए जा रहे थे वो वाक़ई भड़काने वाले थे.

इन गानों की पड़ताल करने पर किसी ने बताया कि 'इंटरनेट पर खोजिए, आपको सारे के सारे गाने मिल जाएंगे.'

गानों का मतलब

ज़्यादातर गाने पाकिस्तान विरोधी शब्दों के साथ शुरू होते हैं लेकिन उसके बाद उनका पड़ोसी मुल्क़ से कोई लेना-देना नहीं होता.

जय श्री राम का जाप करते-करते वो कहने लगते हैं कि 'टोपीवाला भी सिर झुका कर बोलेगा जय श्री राम, जय श्री राम' और 'जिस दिन खौला खून मेरा, दिखला देंगे औक़ात तेरी, फिर तो हम नहीं बोलेंगे, बस बोलेगी तलवार मेरी'

अगर कोई इन गानों को अच्छी तरह से सुने तो उसे साफ़ हो जाएगा कि ये गाने पाकिस्तान विरोधी थे.

लेकिन अगर इसके अलग-अलग हिस्सों को सुना जाए तो ये मुस्लिम विरोधी मालूम पड़ते हैं.

आसनसोल के क़ुरैशी मोहल्ले में रहने वाले अलाउद्दीन कहते हैं, "इन शब्दों का क्या मतलब है कि टोपी वाला भी जय श्री राम का जाप करेगा?"

'हां, बजे थे वो गाने'

बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा से बात करते हुए आसनसोल में विश्व हिंदू परिषद के नेता राजेश गुप्ता ने माना कि रामनवमी के जुलूम में उन्होंने गाने बजाए थे.

उन्होंने कहा, "हां, हमने गाने बजाए. वो सभी गाने पाकिस्तान विरोधी गाने थे. लेकिन उनमें से किसी में भी भड़काऊ नारे नहीं थे."

लेकिन जब उनसे पूछा गया कि रामनवमी और पाकिस्तान विरोधी गानों का क्या मेल है? तो उन्होंने कहा, "हम अपनी देशभक्ति और राष्ट्रवादी सोच को ज़ाहिर करने के लिए कोई भी मौक़ा खाली नहीं जाने देना चाहते. अगर भारत में पाकिस्तान विरोधी गाने नहीं बजेंगे, तो फिर कहाँ बजेंगे."

किनके हैं ये गाने?

मुसद्दी मोहल्ले में रहने वाले ज़ुल्फ़िकार अली कहते हैं, ''वो पूरे साल रामनवमी बनाएँ, हमें इससे कोई परेशानी नहीं है. लेकिन रामनवमी पर जो गाने बजाये जा रहे थे वो सचमुच भड़काऊ थे. इससे हमारी भावनाएँ आहत हुईं.''

यू-ट्यूब पर बहुत सारे रामनवमी डीजे गाने हैं जो बजरंग दल और हिंदू युवा वाहिनी के नाम से अपलोड किए गए हैं.

गानों को कश्मीर की तस्वीरों, पाकिस्तानी झंडे और एक ख़ास भारतीय मुस्लिम राजनीतिज्ञ की फ़ोटो के साथ विज़ुअल इफ़ेक्ट देकर पोस्ट किया गया है.

पश्चिमी बर्धमान ज़िले में भाजपा के प्रवक्ता प्रशांत चक्रवर्ती का कहना है कि मुझे नहीं पता कि रामनवमी के जुलूस में इस तरह के गाने बजे थे या नहीं.

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'अगर मैं सारे आरोपों को स्वीकार भी कर लेता हूं तो भी ये सिर्फ़ पाकिस्तान विरोधी गाने थे. ऐसे में स्थानीय मुस्लिमों को तकलीफ़ क्यों हो रही है?'

क़ुरैशी मोहल्ले के एक युवक का कहना है, "क्या हम पाकिस्तानी हैं? हमारे मोहल्ले में इस तरह के गानों को बजाने का क्या मतलब है?"

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