प्रेस रिव्यू: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, प्रदर्शनकारियों ने हमारा फ़ैसला ठीक से पढ़ा नहीं

  • 4 अप्रैल 2018
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नवभारत टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो एससी/एसटी (प्रिवेंशन ऑफ़ एट्रोसिटीज़) एक्ट के ख़िलाफ़ नहीं है और न ही उसने ऐक्ट को कमज़ोर किया है.

कोर्ट ने कहा कि हो सकता है आंदोलनकारियों ने हमारे फ़ैसले को ठीक से पढ़ा ही नहीं और कुछ लोगों ने अपने 'निहित स्वार्थों' के लिए उन्हें ग़ुमराह किया हो.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलावर को ऐक्ट से जुड़े फ़ैसले पर केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई की, लेकिन अपने आदेश पर स्टे लगाने से इनकार कर दिया.

कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने ऐक्ट को लेकर कहा था कि इन मामलों में तुरंत गिरफ़्तारी नहीं होनी चाहिए और शुरुआती जाँच के बाद ही कार्रवाई होनी चाहिए. इसके बाद भारत के कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई थी.

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Image caption सांकेतिक तस्वीर

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी ख़बर के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में कई जगहों पर सैलानियों पर पत्थरों से हमले हुए. श्रीनगर में रविवार रात सैलानियों को ले जा रही दो बसों पर पत्थरों से हमला किया गया. इसके बाद श्रीनगर एयरपोर्ट पर कैब में बैठी दो महिलाओं पर भी पत्थर फेंके गए जिससे उनके सिर में चोटें आईं.

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इसके अलावा दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में भीड़ ने सैलानियों से भरी एक बस पर हमला किया और लोगों पर पत्थर फेंके, इसमें उत्तर प्रदेश की दो महिलाएं घायल हो गईं.

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हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और नासा के हवाले से कहा गया है कि दिल्ली की प्रदूषित हवा के लिए खेतों में जलाए जाने वाली पुआल सबसे ज़्यादा (78%) ज़िम्मेदार है.

रिसर्च अध्ययन में कहा गया है कि खेतों में जलने वाले अवशेषों से निकलने वाले धुएं में काला कार्बन और जैविक पीएम (पार्टिक्युलेट मैटर) होता है. फ़सलों की कटाई के मौसम में जब पंजाब और हरियाणा में पुआल जलाई जाती है तो ये तत्व हवा के साथ दिल्ली-एनसीआर में पहुंच जाते हैं और हवा को प्रदूषित करते हैं.

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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अब अरुण जेटली की मानहानि का मुकदमा अकेले कुमार विश्वास पर चलेगा क्योंकि अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के तीन विधायकों ने माफ़ी मांग ली और जेटली ने उनकी माफ़ी स्वीकार भी कर ली है.

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अरुण जेटली ने केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के पांच नेताओं के खिलाफ़ मानहानि का मुकदमा किया था और 10 करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा था.

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दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कैंडी क्रश, लूडो और दूसरे ऑनलाइन गेम्स से भी यूज़र का डेटा चुराया जा सकता है.

कई मोबाइल ऐप और वेबसाइटें यूज़र की अनुमति लेकर उनकी निजी जानकारियां ले लेती हैं और फिर अनाधिकृत तौर पर इसका इस्तेमाल करती हैं.

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