ब्रिटेन: शराब के चंगुल में फंसे पंजाबियों की अनकही कहानी

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हरजिंदर अपनी बेटी जसप्रीत को कहानी सुनाकर उसे 'गुडनाइड किस' देती हैं और सुला देती हैं. वो एक लंबे दिन के बाद थककर चूर हो गई हैं. उनका नन्हा बेटा पहले ही बगल वाले कमरे में सो चुका है. हरजिंदर भी अपनी बेटी के बगल में लेट गईं और उनकी आंख लग गई.

इसके बाद उन्हें जो याद है वो ये कि उनके पति चीख़ रहे थे. वो पब से शराब के नशे में लौटे थे और इस बात से गुस्सा थे कि हरजिंदर उनके बिस्तर में क्यों नहीं थीं. गुस्से में उन्होंने बिस्तर को धक्का दिया जिससे हरजिंदर और उनकी बेटी ज़मीन पर जा गिरे.

इस घटना के 20 साल से भी ज़्यादा वक़्त हो चुके हैं. हरजिंदर के बच्चे अब बड़े हो गए हैं और उनकी बेटी जसप्रीत उन्हें अपने पति से अलग रहने के लिए कहती रहती हैं. हरजिंदर रहती तो अपने पति के साथ ही हैं, लेकिन असल में उनकी ज़िंदगियां बहुत अलग हैं.

उनके ससुराल वालों ने उम्मीद दिलाई थी कि उनके पति शराब पीना छोड़ देंगे और चीज़ें ठीक हो जाएंगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. हरजिंदर डिप्रेशन में आ गईं और उन्हें काउंसलर की मदद लेनी पड़ी.

वो अब भी काउंसलिंग के लिए जाती हैं. वो कहती हैं, "कभी सोचती हूं इस उम्र में अब क्या अलग होना. कभी सोचती हूं अभी ज़िंदगी के कई साल बचे हैं. हो सकता है मैं अलग हो भी जाऊं."

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ब्रिटेन में रहने वाले पंजाबियों के लिए 'एल्कोहल अब्यूज़' एक खुले रहस्य की तरह है जिसे जानते तो सब हैं, लेकिन इस बारे में बात करने से कतराते हैं.

पंजाबी संस्कृति में शराब पीने को ग्लैमर की तरह देखा जाता है और इसीलिए लोग इससे होने वाले तमाम नुक़सानों के बाद भी वो मदद मांगने में एक किस्म की झिझक महसूस करते हैं.

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यूके में तक़रीबन 4,30,000 सिख रहते हैं. हरजिंदर भी सिख हैं और दूसरी कई सिख औरतों की कहानी भी उन्हीं जैसी है.

सिख धर्म में शराब पीने पर मनाही

बीबीसी के एक सर्वे से पता चला है कि 27% सिख परिवारों में कम से कम एक सदस्य ऐसा ज़रूर है जो शराब की लत से जूझ रहा है. दिलचस्प बात ये है कि सिख धर्म में शराब पीने पर मनाही है.

हरजिंदर की अरेंज्ड मैरिज हुई थी और उन्हें ये देखकर धक्का लगा कि उनके ससुराल के पुरुष सदस्य किस तरह शराब की लत में जकड़े हुए हैं.

हरजिंदर बताती हैं कि परिवार की औरतें जब भी बच्चों के साथ किसी दोस्त के यहा मिलने-जुलने या पार्टी के लिए जाती थीं तो उन्हें रात के दो-तीन बजे तक वहीं बैठकर मर्दों के आने का इंतज़ार करना पड़ता था क्योंकि तब तक वो शराब पी रहे होते थे.

आए दिन इस तरह की घटनाओं से हरजिंदर ख़ुद को अलग-थलग महसूस करने लगीं.

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संजय भंडारी एक हिंदू पंजाबी परिवार से हैं और अब वो शराब की लत से निजात पा चुके हैं. उन्होंने 15 साल की उम्र में अपने पिता की मौत के बाद शराब पीना शुरू किया था और इसके बाद ये सिलसिला कभी रुका नहीं.

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30 साल की उम्र में उन्होंने ये पाया कि कोई भी ऐसा दिन नहीं था जब वो शराब न पीते हों. वो कुबूल करते हैं कि पंजाबी परिवार से होने की वजह से उन्हें कभी ये एहसास ही नहीं हुआ कि वो किसी तरह की लत के शिकार हैं.

संजय ने 'एल्कोहॉलिक्स ऐनॉनिमस' नाम की संस्था से मदद ले जो लोगों को नशे की लत से बाहर आने में मदद करती है. उनकी कोशिश कामयाब हुई. उन्होंने पिछले 16 साल से शराब नहीं पी है.

संजय ने अपने समुदाय में किसी से मदद क्यों नहीं मांगी?

इसके जवाब में वो कहते हैं, "किसी पंजाबी से मदद मांगना आख़िरी विकल्प होता. वो ये बात समझते ही नहीं कि शराब की लत होना कोई समस्या है."

ब्रिटेन में पंजाबी

ब्रिटेन में पंजाबियों के आने का सिलसिला 1950 में शुरू हुआ. यहां आने वालों में ज़्यादातर पुरुष थे और उनके लिए ख़ुद को नई जगह में वहां के लोगों और माहौल के मुताबिक ढालने में दिक्कत हुई. वो बिना सुस्ताए घंटों काम करते थे क्योंकि उन पर भारत में रह रहे परिवार को पैसे भेजने की जिम्मेदारी भी थी.

इन सबसे उबरने और नए लोगों से घुलने-मिलने के लिए उन्होंने शराब का सहारा लिया.

ज़ेनिफ़र शेरगिल एक एल्कोहल प्रैक्टिशनर हैं जो सिख पुरुषों और महिलाओं को नशे की लत से बाहर आने में मदद करती हैं. वो शांति प्रोजेक्ट के साथ काम करती हैं जो ख़ासकर पंजाबी लोगों की मदद के मक़सद से बनाया गया है.

इसके अलावा सिख हेल्पलाइन, डर्बी रिकवरी नेटवर्क और फ़र्स्ट स्टेप फ़ाउंडेशकुछ ऐसी संस्थाएं हैं जो पंजाबी संस्कृति को समझने और पंजाबियों को नशे से दूर करने की क़ोशिश कर रही हैं.

(हरजिंदर और उनके परिवार के सदस्यों के नाम बदल दिए गए हैं.)

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