ग्राउंड रिपोर्ट: 27 मार्च को बिहार के रोसड़ा में कैसे भड़की थी हिंसा?

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Image caption 27 मार्च को रोसड़ा में जामा मस्जिद पर भगवा झंडा लगाते लोग

चैती दुर्गा का विसर्जन करने युवाओं की एक टोली समस्तीपुर के रोसड़ा के गुदड़ी मार्केट में जामा मस्जिद के पास पहुंची थी.

तारीख़ 26 मार्च थी और शाम का वक़्त था. अचानक से किसी ने अफ़वाह फैला दी कि मस्जिद की तरफ़ से विसर्जन दल पर चप्पल फेंकी गई.

इसके बाद लोगों ने मस्जिद के पास हंगामा कर दिया. हालांकि 26 तारीख़ को मामले को किसी तरह काबू में कर लिया गया.

वहां के एक स्थानीय पत्रकार 27 तारीख़ को मौक़े पर मौजूद थे. वो फ़ोटो खींच रहे थे.

उनका कहना है कि इस हंगामे के बाद 26 मार्च की रात में दुर्गा विसर्जन करने वालों की एक बैठक हुई. इस बैठक में बजरंग दल के भी लोग मौजूद थे.

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मुस्लिम विरोधी नारे

स्थानीय पत्रकार ने बताया, "रात में बैठक के दौरान लोगों ने फ़ैसला किया मस्जिद के पास जाकर विरोध करना है. सुबह आठ बजे ही लोग वहां पहुंच गए. वो जय श्रीराम के नारे लगाने लगे. इनके नारों में कई चीज़ें मुस्लिम विरोधी थीं."

उन्होंने कहा, "आठ से नौ बजे के बीच मस्जिद के पास भीड़ कम से कम एक हज़ार लोगों की इकट्ठी हो गई. यह भीड़ लगातार बढ़ती गई. प्रशासन भी पहुंच गया था, लेकिन लोग किसी की सुन नहीं रहे थे. उनकी मांग थी कि मोहम्मद शाहिद को गिरफ़्तार किया जाए."

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स्थानीय पत्रकार के अनुसार "पुलिस ने उनसे कहा कि पहले शिकायत दर्ज कराइए. मस्जिद के सामने ही शिकायत दर्ज कराई गई. अब ये पुलिस से कहने लगे कि शाहिद को उनके हवाले किया जाए. पुलिस ने ऐसा करने से साफ़ इनकार कर दिया."

"इसके बाद लोग बगल की इमारत की छत पर चढ़कर मस्जिद पर चढ़ गए. मस्जिद में लोगों ने जमकर तोड़फोड़ की और हर तरफ़ भगवा झंडे लगा दिए."

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प्रशासन को चकमा

तब तक रोसड़ा में डीएम, एसपी, एसडीओ और भारी संख्या में सुरक्षा बल पहुंच गए थे. रोसड़ा के ही रामकिशोर मंडल कहते हैं कि वहां से भीड़ पास के ही मदरसे में पहुंच गई.

रामकिशोर मंडल ने कहा, "सभी 20 से 25 साल के लड़के थे. सब ने मदरसे में तोड़फोड़ की. मदरसे के बच्चों को हमने वहां से हटा दिया था. पास के डॉक्टर अशोक मिश्रा भी आए वो अपने घर 20 से 25 बच्चों को ले गए."

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इस मदरसे के संचालक मौलाना नज़ीर अहमद नदवी उस वक़्त वहीं थे.

उनका कहना है, "जब दंगाइयों ने मदरसे पर हमला किया तो हमलोग छत पर छुप गए थे. एक घंटे तक तोड़फोड़ करते रहे. क़ुरान शरीफ़ को आग के हवाले कर दिया. बच्चों की किताबें जला दीं. मदरसे में दो मोटरसाइकिल थीं उसमें आग लगा दी."

"अज़ान के लाउडस्पीकर, बच्चों के कपड़े और फ़्रीज जला दिए. ऐसा करते हुए वो जय श्रीराम के नारे लगा रहे थे. हमलोग नमाज़ पढ़कर निकले ही थे कि इन्होंने हमला कर दिया."

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जय श्रीराम के नारे

दंगाई दिन भर पुलिस को चकमा देते रहे. जब जामा मस्जिद और मदरसे के पास सुरक्षाबल भारी संख्या में पहुंच गए तो भीड़ फ़कीराना मस्जिद पहुंच गई. वहां भी लोग जय श्रीराम के नारे लगाते पहुंचे और गेट पर भगवा झंडा लगा दिया.

मस्जिद के इमाम रहमत अली कहते हैं, "लोग शोर करते आए और मस्जिद के सामने नारा लगाने लगे. दिन का ग्यारह बज रहा था. जय श्रीराम का नारा लगाते हुए मुसलमान को गाली दे रहे थे. गेट पर धक्का दिया. मस्जिद की दीवार पर भगवा झंडा लगाया. पास के मुस्लिम इलाक़े के घरों के बाहर मीटर लगे थे जिन्हें तोड़ दिया."

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समस्तीपुर के डीएम प्रणव कुमार का कहना है कि इस में क़रीब 12 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

इनमें बीजेपी के भी दो नेता हैं- दिनेश झा और मोहन पटवा. दिनेश झा प्रदेश बीजेपी किसान प्रकोष्ठ कार्यसमति के सदस्य हैं और मोहन पटवा प्रदेश बीजेपी बुनकर कार्यसमिति के सदस्य हैं. वाकये के जो वीडियो सामने आए हैं, उनमें दिनेश झा भी दिख रहे हैं.

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बजरंग दल के लोग शामिल?

हालांकि पुलिस ने दिनेश झा को छोड़ दिया है. पूरे मामले पर दिनेश झा का कहना है कि वो लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे थे.

उनका कहना है कि इसमें बजरंग दल के भी लोग शामिल थे. रोसड़ा में जिन नेताओं की पहचान बजरंग दल के नेता के रूप में हैं वो शहर से फरार हैं.

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तीन अप्रैल को मैं फ़कीराना मस्जिद के पास मुस्लिम महिलाओं से बात कर रहा था था. तभी एक बुज़ुर्ग मुस्लिम आए. वो ग़ुस्से में थे.

उन्होंने कांपती आवाज़ में ज़ोर से कहा, "30-40 लड़का आया और मस्जिद पर चढ़कर बजरंगबली का झंडा लगा दिया. उसके बाद हमने कहा कि झंडा लगाने दो, इनके जाने के बाद निकाल देंगे. इस खेल के खिलाड़ी चार ठो है. श्याम पटवा, बिसुन शर्मा, जग्गु है जो कि गनेशिया का बेटा है और लक्ष्मी बनिया."

"ये ही चार लोग शहर में नफ़रत फैलाया है. सब बजरंगबली दल से जुड़ा है. तीन साल से ई लोग मूर्ति बैठाना शुरू किया है. हमलोग से पूजा के लिए चंदा भी लेता है और ऐसा किया. इसमें पार्षद श्याम सिंह भी है. इन चारों-पाचों ने रोसड़ा का इतिहास बदला है."

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रोसड़ा में कभी दंगा नहीं हुआ...

डीएम प्रणव कुमार का कहना है कि यह मामला सुनियोजित और अचानक के बीच का लग रहा है. 26 मार्च को मामला शांत हो गया था लेकिन बाद में योजना बनाकर 27 को सब कुछ किया गया. पूरे मामले में दूसरा समुदाय खामोश रहा.

अगर दूसरा समुदाय जवाब देता तो क्या होता? ज़िलाधिकारी ये मानते हैं कि इससे ज़्यादा नुक़सान होता.

रोसड़ा में कभी दंगा नहीं हुआ. यहां सात से आठ फ़ीसदी ही मुसलमान हैं.

Image caption मदरसे के भीतर मस्जिद का एक दृश्य जिसे पुलिस ने तोड़फोड़ के तत्काल बाद ठीक करा दिया

रोसड़ा के कांग्रेस विधायक अशोक राम का कहना है कि इस दंगे का सीधा संबंध 2019 के आम चुनाव से है. उनका कहना है कि इसमें बजरंग दल को लोग शामिल थे.

रोसड़ा सुरक्षित सीट है. पहले यह लोकसभा सीट थी लेकिन परिसीमन के बाद यह समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा बन गया.

समस्तीपुर से लोकजनशक्ति पार्टी और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के भाई रामचंद्र पासवान सांसद हैं.

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बिहार में सांप्रदायिक झड़पें

आजकल रोसड़ा समेत बिहार कई ज़िलों में मोटरसाइकल पर भगवा झंडे दिख रहे हैं. सडकों पर चलने वाली ज़्यादातर मोटरसाइकलों पर भगवा झंडे दिख जाते हैं.

डीएम प्रणव कुमार का कहना है कि अगर यह नया ट्रेंड है और इसका कोई मक़सद है तो हम इसे समझने की कोशिश करेंगे.

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Image caption हमले में घायल पुलिस के जवान

समस्तीपुर के बीजेपी ज़िला अध्यक्ष रामसुमिरन सिंह रोसड़ा में जो हुआ उसे दंगा नहीं मानते हैं.

उनका कहना है, "हिंदू और मुसलमान आमने-सामने होता तब दंगा कहा जाता. इसमें तो केवल हिंदू ही था."

वहीं, बीजेपी के प्रदेश महामंत्री राजेंद्र सिंह का कहना है कि बिहार में सांप्रदायिक झड़पें क्रिया की प्रतिक्रिया है.

रोसड़ा में तो रामसुमिरन सिंह ये भी कहने की स्थिति में नहीं थे कि विसर्जन दल पर किसी ने चप्पल फेंकी थी भी या नहीं.

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