'सांसद हूं लेकिन दलित होने की वजह से शोषण झेलता हूं'

  • 7 अप्रैल 2018
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उत्तर प्रदेश के सोनभद्र ज़िले की आरक्षित संसदीय सीट रॉबर्ट्सगंज से सांसद छोटेलाल ने दलित होने की वजह से अपने साथ ' भेदभाव और शोषण होने' के आरोप लगाए हैं.

भारतीय जनता पार्टी के सांसद छोटेलाल ने बीबीसी से कहा, "मेरे साथ मारपीट की गई थी और हथियार दिखाकर धमकाया गया था. मैंने थाने से लेकर डीजीपी तक शिकायत की लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं सुनी. अब मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है."

छोटेलाल कहते हैं, "एसपी और डीएम ऊंची जाति के लोग हैं और वो ऊंची जाति के लोगों के साथ मिलकर हमारे साथ भेदभाव कर रहे हैं."

वहीं सोनभद्र से सटे चंदौली ज़िले के पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने बीबीसी से कहा, "इस प्रकरण की कई स्तर पर जांच की गई है और किसी भी जांच में उनकी बातों में कोई तथ्य नहीं पाया गया."

हालांकि सांसद छोटेलाल का कहना है, "हम दलित सांसद हैं, हम क्या कर सकते हैं बस अपने साथ जो हो रहा है वो बता ही सकते हैं. अगर हमारी बात को गंभीरता से लिया जाता तो ये स्थिति ही नहीं आती."

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छोटेलाल कहते हैं, "हमने सामान्य सीट पर अपने भाई को ब्लॉक प्रमुख बनवाया था. सभी लोगों ने षडयंत्र रचकर हटा दिया. इसलिए हटाया क्योंकि वो नहीं चाहते कि सामान्य सीट पर दलित प्रमुख रहे."

छोटेलाल कहते हैं, "सांसद होने के बावजूद मुझे दलित होने की वजह से शोषण का सामना करना पड़ रहा है. जिस तरह से हम भोग रहे हैं आम लोग भी ऐसे ही भोग रहे हैं. जब हमारी ही बात नहीं सुनी जा रही है तो आम आदमी की बात कौन सुनता होगा?"

जब छोटेलाल से हाल ही में एससी/एसटी एक्ट के विरोध में दलितों के भारत बंद के संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "मैं सांसद हूं और मेरी अर्ज़ी नहीं ली गई और रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई. अगर एससी/एसटी क़ानून और कमज़ोर होगा तो दलितों का क्या हाल होगा? इसी से अंदाज़ा लगाया जा सका है?"

उत्तर प्रदेश पुलिस सरकार से निराश छोटेलाल को अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मदद की आस है. वो कहते हैं, "अब मुझे दलितों के मसीहा, ग़रीबों के मसीहा नरेंद्र भाई मोदी जी पर विश्वास है कि वो ही अब मुझे न्याय दिला सकते हैं. राज्य में तो हमें न्याय नहीं मिल सका."

छोटेलाल कहते हैं, "जनता आशा और विश्वास से हमें चुनकर भेजती है. उन्हें उम्मीद होती है कि हम उनके मुद्दे उठाएंगे लेकिन जब हमारी बात ही नहीं सुनी जा रही है तो हम क्या करें? जनता देख रही है कि हम इतने बड़े पद पर होते हुई कुछ कर नहीं पा रहे हैं और जनता हमसे दूर हो रही है. हम सोच रहे हैं, जाएं तो कहां जाएं."

छोटेलाल कहते हैं, "हमारे लिए हालात बहुत मुश्किल हो गए हैं. उनका राज है, सब कुछ उनका है."

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जब छोटेलाल से पूछा गया कि ऐसे हालात सिर्फ़ दलित सांसदों के साथ ही हैं या बाकियों के भी साथ भी ऐसा होता है. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि बाकी सांसदों के साथ ऐसा नहीं होता होगा. बाकी किसी सांसद ने इस तरह की शिकायत भी नहीं की है. जो बहुत पीड़ित होगा वही अपनी बात कहेगा. कोई बिना वजह तो रोना नहीं रोयेगा."

हाल ही में उत्तर प्रदेश की एक और दलित सांसद सावित्री बाई फुले ने बग़ावती तेवर अपना लिए हैं. उन्होंने भाजपा सरकार में दलितों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं.

सावित्री फुले ने एक अप्रैल को 'भारतीय संविधान बचाओ रैली' भी आयोजित की थी और कहा कि,"'कभी कहा जा रहा है कि संविधान बदलने के लिए आए हैं. कभी कहा जा रहा है कि आरक्षण को ख़त्म करेंगे. बाबा साहेब का बनाया संविधान सुरक्षित नहीं है."

(बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा से बातचीत पर आधारित)

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