एनसीसी कैडेट्स के मोबाइल नंबर क्यों मांग रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी?

  • 10 अप्रैल 2018
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Image caption पीएम मोदी एनसीसी कैडेट्स के साथ

एनसीसी यानि राष्ट्रीय कैडेट कोर के आंतरिक संचार से मिली जानकारी के अनुसार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनसीसी के 13 लाख युवा कैडेटों में से कुछ विशेष समूह के कैडेट्स के मोबाइल नंबर मांगे हैं.

इसके अलावा वे चाहते हैं कि सभी कैडेट्स अपने फ़ोन में भीम ऐप और नरेंद्र मोदी ऐप भी डाउनलोड करें. 16 मार्च 2018 को एनसीसी के डायरेक्टर जनरल की तरफ़ से जारी किए इस आदेश के पीछे हालांकि कोई कारण नहीं बताया गया है.

इसी मुद्दे के परिपेक्ष्य में फ़रवरी माह में एनसीसी के डायरेक्टर जनरल लेफ़्टिनेंट जनरल बीएस सहरावत ने कैडेटों से नरेंद्र मोदी ऐप को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने के लिए कुछ सवाल और सुझाव भी मांगे थे. उस समय इसका कारण बताया गया था कि प्रधानमंत्री मोदी इस ऐप के ज़रिए एनसीसी कैडेट के साथ सीधा संपर्क करना चाहते हैं.

हालांकि इस क़दम के साथ ही डेटा प्रोटेक्शन और निजता के हनन की चिंताएं भी उठने लगी हैं.

प्रधानमंत्री की चिट्ठी

अब जो ताज़ा चिट्ठी इस संबंध में मिली है उसमें भी इन ऐप्स को डाउनलोड करने की बात कही गई है लेकिन इसके कारणों को लेकर अस्पष्टता बरकरार है.

एनसीसी रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आता है और देश के 713 ज़िलों में से 706 में यह मौजूद है. एनसीसी से उसके डेटा की हार्ड और सॉफ़्ट कॉपी भी मांगी गई है. इसके साथ ही चिट्ठी में पूरा डेटा एक विशेष कूरियर के ज़रिए एनसीसी मुख्यालय में 30 मार्च तक जमा करने की बात भी लिखी गई थी.

एनसीसी को प्राप्त चिट्ठी पर शीर्षक लिखा था, 'प्रधानमंत्री की तरफ से निर्देश.' इस चिट्ठी के पहले पन्ने पर जेडी/जेडब्ल्यू के सेकेंड इयर और एसडी/एसडब्ल्यू के थर्ड इयर के कैडेट्स के मोबाइल नंबर मांगे गए थे.

इसके साथ ही चिट्ठी में अलग रंग में यह बात विशेष तौर पर लिखी गई थी कि सेकेंड इयर जेडी/जेडब्ल्यू और थर्ड इयर एसडी/एसडब्ली समूहों को अलग-अलग स्पष्ट तौर पर दर्शाया जाए.

Image caption एनसीसी को प्राप्त हुई चिट्ठी

क्या होता जेडी/जेडब्ल्यू और एसडी/एसडब्ल्यू?

एनसीसी की वेबसाइट के अनुसार स्कूलों में जब पुरुष छात्र (13 वर्ष या उससे ऊपर की आयु वाले) एनसीसी में अपना नामांकन करवाते हैं उन्हें जूनियर डिविज़न दिया जाता है इसे ही जेडी कहते हैं. इसके बाद जब ये छात्र 11वीं, 12वीं या कॉलेजों में एनसीसी का हिस्सा बनते हैं तो वे सीनियर डिविज़न में चले जाते हैं और एसडी कहलाते हैं.

इसी तरह महिला छात्राओं की इकाई को सीनियर विंग यानि एसडब्ल्यू कहा जाता है.

जेडी/जेडब्ल्यू कैडेट्स की उम्र 13 से 18.5 वर्ष तक होती है जबकि एसडी/एसडब्ल्यू कैडेट्स 24 वर्ष तक की आयु के होते हैं.

चिट्ठी में ग्रुप कमांडरों को साफ़ पर निर्देश दिए गए हैं कि वे डेटा की विश्वसनीयता की पूरी तरह जांच कर लें साथ ही किसी मोबाइल या लैंडलाइन नंबर के दोहराव से भी बचें.

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बहुत से सवालों के जवाब नहीं मिले

एनसीसी अभी तक इस बात का जवाब नहीं दे पाई है कि आखिर वह अपने कैडेट्स का डेटा क्यों इकट्ठा कर रही है, इसके पीछे क्या मंशा है. इस विषय पर रक्षा मंत्रालय ने भी कोई जवाब नहीं दिया है.

जब यह पूछा गया कि नरेंद्र मोदी ऐप के ज़रिए निजता संबंध चिंताओं का क्या हल निकाला गया तो इस सवाल का जवाब ना एनसीसी ने दिया ना ही रक्षा मंत्रालय ने दिया.

अपनी पहचान ज़ाहिर ना करने की शर्त पर एनसीसी से जुड़े कुछ लोगों ने इस क़दम को गलत बताया है, हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री के संदेश से किसी भी एनसीसी कैडेट को कोई परेशानी नहीं होगी.

लेकिन फिर भी कई लोगों को अपनी निजता के हनन का खतरा मंडराता हुआ महसूस हो रहा है. एक सूत्र ने बताया, ''डेटा इकट्ठा करना बहुत ही मुश्किल काम होगा क्योंकि बहुत से कैडेट गांव-देहात के इलाकों से आते हैं, उनके परिवार बहुत ही गरीब हैं. कई लोगों के पास तो स्मार्टफ़ोन तक नहीं हैं. हमने ये तमाम परेशानियां अपने वरिष्ठ अधिकारियों को बताई हैं.''

दरअसल नरेंद्र मोदी ऐप प्रधानमंत्री का आधिकारिक ऐप है जबकि भीम ऐप यानि भारत इंटरफेस फ़ॉर मनी का काम डिजिटल लेनदेन करना है. इस ऐप को नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया ने बनाया है.

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Image caption नरेंद्र मोदी एप

जिन सवालों के जवाब एनसीसी और रक्षा मंत्रालय ने नहीं दिएः

  • एनसीसी के भीतर कुछ विशेष समूह के कैडेट्स के मोबाइल नंबर क्यों मांगे जा रहे हैं?
  • जो भी डेटा इकट्ठा किया जा रहा है उसका क्या इस्तेमाल किया जाएगा ?
  • क्या एनसीसी अब लगातार अपने कैडेट्स का डेटा इकट्ठा करेगी और ऐप डाउनलोड करवाएगी?
  • अगर कोई कैडेट ऐप डाउनलोड नहीं करना चाहता तो उसके पास क्या कोई विकल्प है?
  • कैडेट्स की निजता के हनन संबंधी चिंताओं पर एनसीसी और रक्षा मंत्रालय ने क्या क़दम उठाए?

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