पीएम मोदी संग पूरी भाजपा उपवास पर, कांग्रेस ने कहा स्वांग

  • 12 अप्रैल 2018
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'द इंडियन एक्सप्रेस' में छपी एक ख़बर के अनुसार बृहस्पतिवार को संसद सत्र के दौरान संसद न चलने देने के लिए नाराज़गी प्रकट करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दिन का उपवास करेंगे. उनके साथ अन्य भाजपा नेता और कर्यकर्ता भी उपवास करेंगे.

दिल्ली प्रदेश भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वो इस दिन खाना खाते हुए या सेल्फी लेते हुए न दिखें और अपने इलाके से खाने के खोमचों को भी हटवाएं. प्रदेश भाजपा ने ये भी कहा है कि जिन कार्यकर्ताओं को डायबिटीज़ की शिकायत है वो उपवास में हिस्सा न लें.

अख़बार के अनुसार उपवास के दौरान मोदी अपने पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार ही काम करेंगे और चेन्नई के कांचीपुरम में डिफेन्स एक्पो का उद्घाटन करेंगे.

इससे पहले कांग्रेस ने 9 अप्रैल को दलितों के विरोध को समर्थन देने के लिए और "सांप्रदायिक सौहार्द की रक्षा और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए" सांकेतिक उपवास दिवस मनाया था.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाले ने ट्वीट कर भाजपा के उपवास को स्वांग कहा है.

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'दैनिक जागरण' के पहले पहले पन्ने पर छपी एक ख़बर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पीठों के गठन और काम का आवंटन चीफ जस्टिस का विशेषाधिकार है और ये अधिकार उन्हें संविधान के तहत मिला हुआ है.

अख़बार के अनुसार कोर्ट ने कहा कि कौन सा मामला किस जज की कोर्ट में सुना जाएगा इसमें नियुक्ति के आधार पर वरिष्ठता का कोई फर्क नहीं पड़ता. कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के बाद प्रत्येक जज आवंटित केस को सुनने के लिए अधिकृत और कर्तव्यबद्ध हैं.

ये फैसला चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनाया है. पीठ में अन्य जज जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ हैं.

इससे पहले इसी साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है और चीफ़ जस्टिस मामलों का अनुचित आवंटन करते हैं. चार जजों का कहना था कि लोकतंत्र के लिए ये हालात ठीक नहीं हैं.

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'इकोनोमिक टाइम्स' में छपी एक ख़बर के अनुसार रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारतीय सेना के आधुनिकीकरण के लिए देश के पास "पर्याप्त आर्थिक संसाधन हैं" और इस बारे में "रक्षा मंत्रालय में फ़ैसले लिए जा रहे हैं".

उन्होंने कहा कि सरकार भारतीय सेना को देश के भीतर बने हथियारों को खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि वो अधिक से अधिक देश ने भीतर बने सामान को खरीदने के लिए कहती हैं लेकिन सेना के लिए क्या ठीक है और उनकी जरूरत क्या है, इसके संबंध में फ़ैसला सेनाओं को ही करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनी अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करती है तो ये अच्छी बात है, लेकिन इसके लिए उन्हें बाध्य नहीं होना चाहिए.

इससे पहले इस तरह की ख़बरें आ रही थीं कि देश के पास सेना पर खर्च करने के लिए पर्यापात धन नहीं हैं और इसका असर भारत के मुकाबला करने की क्षमताओं पर पड़ सकता है.

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'दैनिक भास्कर' में छपी एक ख़बर के अनुसार उन्नाव में महिला उत्पीड़न के मामले को ले कर पुलिस की उदासीनता के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस के बारे में एक और अलीगढ़ से ख़बर आई है.

अलीगढ़ की एक युवती सामूहिक दुष्कर्म की शिकायत करने पुलिस शाने पहुंची तो पुलिस ने उसकी शिकायत नहीं लिखी. पीड़िता के मुख्यमंत्री से गुहार लगाने के बाद 15 दिन की देरी से मामला दर्ज हुआ.

लेकिन जब पीड़िता की शिकायत पर पुलिसकर्मियों पर लापरवही बरतने के सिलसिले में विभागीय कर्यवाई हुई तो पुलिसकर्मियों ने दुष्कर्म के मामले में कोर्ट मे जो चर्जशीट दायर की वो मरपीट से संबंधित चार्जशीट थी.

ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है और कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है.

लड़की का कहना है कि 13 सितंबर 2016 को उसके साथ बंदूक की नोंक पर तीन लोगों ने सामूहिक बलात्कर किया था. इसी की शिकायत करने वो थाने पहुंची थी.

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'जनसत्ता' अख़बार में छपी एक ख़बर के अनुसार हरियाणा में स्कूली बच्चों से एक लंबा प्रेवश फॉर्म भर कर ये बताने को कहा गया है कि उनके माता-पिता किसी 'मलिनता से जुड़े पेशे' में तो नहीं हैं और क्यो वो खुद किसी आनुवांशिक रोग से पीड़ित हैं.

इतनी ही नहीं फॉर्म में माता पिता आयकर भरते हैं या नहीं, उनका धर्म, जाति की जानकारी मांगी गई है और साथ-साथ बच्चे के बैंक से जुड़े विवरण भी मंगे गए हैं.

इस प्रेवश फॉर्म पर विपक्ष ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है और कहा है कि सरकार नस्लीय और धार्मिक जानकारी जुट रही है. कांग्रेस का कनहा है कि ये फॉर्म असल में अभिभावक-छात्र निगरानी फॉर्म भरवाए जा रहे हैं.

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अख़बार 'अमर उजाला' में छपी एक ख़बर के अनुसार हाईकोर्ट ने पीएनबी घोटाले में शामिल हीरा कारोबारी नीरव मोदी की कंपनी के वकील से कहा है कि वो नीरव मोदी से कहें कि वो वापस आ जाएं.

कोर्ट नीरव की कंपनी की याचिका पर सुनवाई कर रही है. सुनवाई कर रहे जजों की पीठ ने कहा कि यदि आप चाहते हैं कि कोर्ट मामले में तकनीकी जटिलताओं पर ध्यान न दे, तो नीरव मोदी से कहें, वह वापस आ जाएं.

हालांकि कंपनी के वकील ने कोर्ट को बताया है कि मोदी कहां है इस बारे में उन्हें कुछ पता नहीं है.

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