कठुआ रेप केस में पुलिस जाँच को लेकर प्रदर्शन

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जम्मू और कश्मीर के कठुआ ज़िले में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए रेप और हत्या का मामला राज्य में लगातार तूल पकड़ता जा रहा है.

कठुआ के हीरानगर तहसील के रसाना गाँव में इसी साल जनवरी में एक आठ साल की बच्ची का अपहरण कर उसके साथ रेप किया गया और बाद में हत्या कर दी गई थी.

इसी मामले में सीबीआई जांच की मांग पर अड़े जम्मू और कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन की जम्मू शाखा के नेतृत्व में लगभग एक दर्जन से ज्यादा राजनीतिक और धार्मिक संगठनों ने बुधवार को जम्मू और आस-पास के इलाकों में एक दिन का बंद रखा था.

बार एसोसिएशन ने राज्य सरकार पर दबाव बनाने के लिए उन मांगों को भी शामिल किया था जिन पर लंबे समय से राज्य की गठबंधन सरकार के घटक दलों के बीच खींचतान चल रही है.

इन में रोहिंग्या मुसलमानों को जम्मू क्षेत्र से बाहर भेजने की मांग सबसे मुखर रूप से उभर कर सामने आई है.

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जम्मू बंद

पूरे जम्मू क्षेत्र में बुधवार को बंद के दौरान आम जीवन अस्तव्यस्त रहा और अधिकतर शिक्षा संस्थान बंद रहे. वहीं, सार्वजनिक यातायात बंद रहने की वजह से ज़िंदगी की रफ़्तार एक दिन के लिए थम सी गई.

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए थे और भारी तादाद में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे.

बंद के समर्थन में उतरे विभिन्न सियासी दलों के नेता, कार्यकर्ता और वकीलों ने एक तिरंगा रैली निकाली और रोहिंग्या को शहर से बाहर करने की मांग दोहराई !

जम्मू में तैनात एडिशनल डिप्टी कमिश्नर अरुण मन्हास ने बीबीसी हिंदी को बताया बंद पूरी तरह से शांति पूर्वक रहा और कहीं से भी किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना प्राप्त नहीं हुई है.

अरुण मन्हास ने बताया, "सरकार ने उपयुक्त संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती भी की थी और जगह-जगह मजिस्ट्रेट भेज कर दिन भर निगरानी बनाए रखी."

उन्होंने माना कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए कुछ शिक्षा संस्थानों ने स्कूल बंद रखे थे और सार्वजनिक यातायात भी बंद रहा.

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सैलानियों की दिक्कत

इस दौरान जम्मू आए सैलानियों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा और साथ ही साथ आम लोग भी इससे प्रभावित रहा. जम्मू शहर और उसके आसपास के इलाकों में भी बंद का आंशिक असर दिखा.

हीरानगर के पास जम्मू-पठानकोट राजमार्ग पर नागरिकों ने कुछ टायर जलाकर धरना प्रदर्शन किया जिसके चलते यातायात काफी समय के लिए बाधित रहा.

राजौरी और पूंछ जिले में बंद का असर न के बराबर दिखा. लेकिन कठुआ, साम्बा, रियासी, उधमपुर में बंद का आंशिक असर रहा और जगह-जगह सरकार के पुतले जलाए गए.

कठुआ बार एसोसिएशन के सभी सदस्यों ने मामले में अपराध शाखा की ओर से आरोप पत्र दाखिल करने को लेकर प्रदर्शन किया, क्योंकि वे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं.

एसोसिएशन के अध्यक्ष कीर्ति भूषण महाजन ने कहा कि मामले में अपराध शाखा की तहकीकात को लेकर बार एसोसिएशन हड़ताल पर है और सीबीआई जांच के पक्ष में है.

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जांच पर सवाल

वहीं, जम्मू बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएस सलाथिया ने बीबीसी से बात चीत करते हुए कहा, "राज्य पुलिस की अपराध शाखा द्वारा की गई जांच पर हमें बिल्कुल भरोसा नहीं है."

सलाथिया ने कहा, "शुरू से ही अपराध शाखा द्वारा की जा रही जाँच पर उंगलियाँ उठने लगी थी."

उन्होंने कहा, "अपराध शाखा के अधिकारी एक सुनिश्चित साज़िश के तहत कश्मीर से बुलाए गए और उन्होंने रसाना गाँव के लोगों को मुलज़िम साबित करने के लिए उनके साथ बदसलूकी की और साथ में उनका शोषण किया.

उन्होंने जांच अधिकारियों पर भी उंगली उठाते हुए कहा जिन अधिकारीयों ने हत्या और रेप के मामले में खुद सजा भुगती है, उन्हें ऐसे मामले की जांच के लिए क्यूं चुना गया.

लंबे इंतज़ार के बाद सोमवार को राज्य पुलिस की अपराध शाखा ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया था. अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने गई अपराध शाखा की टीम को स्थानीय वकीलों ने रोकने की कोशिश की.

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क्या है मामला

'जय श्री राम' के नारों के बीच वकीलों ने कथित तौर पर अधिकारीयों को खदेड़ने की भी कोशिश की. वकीलों के विरोध पर काबू पाने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा.

इसके बाद सातों अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दायर किया जा सका. सरकारी काम में बाधा डालने वाले वकीलों के ख़िलाफ़ पुलिस ने दबाव में आकर अगले दिन प्राथमिकी दर्ज की.

अदालत में दाखिल आरोपपत्र के मुताबिक बच्ची को अगवा करके एक धार्मिक स्थल के परिसर में रखा गया था. वहां उसे बार-बार नशा दिया गया. उसके साथ कई बार रेप किया गया.

पीड़िता के पिता ने 12 जनवरी को हीरानगर पुलिस स्टेशन में अपने बच्ची के लापता होने के संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

उन्होंने बताया था कि उनकी आठ वर्षीय बच्ची 10 जनवरी को घोड़ों को चराने के लिए गई, तबसे वापस नहीं लौटी. पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करके बच्ची की तलाश शुरू कर दी.

17 जनवरी को लापता बच्ची का शव जंगल के पास से बरामद किया गया था. 23 जनवरी को राज्य सरकार ने मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दी थी.

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